Mamata Banerjee: आईसीसी अंडर-19 वर्ल्ड कप की खबरों के बीच अब राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राजधानी दिल्ली में अपनी सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए विशेष बल बुलाने का निर्णय लिया है।
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बंगाल से दिल्ली पहुंचे विशेष बल
दिल्ली पुलिस की मौजूदगी के बावजूद ममता बनर्जी ने कोलकाता से रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की 22 सदस्यीय टुकड़ी और बंगाल पुलिस का विशेष दस्ता दिल्ली भेजा है। इस टीम का नेतृत्व डीएसपी रैंक के अधिकारी करेंगे। माना जा रहा है कि यह कदम बंग भवन और अन्य बंगाल सरकार की संपत्तियों की सुरक्षा को ‘बुलेटप्रूफ’ बनाने के लिए उठाया गया है। मंगलवार शाम 4 बजे बंग भवन में टी-टू पार्टी का आयोजन किया गया है, जिसमें तृणमूल कांग्रेस के सभी सांसदों को आमंत्रित किया गया है। इसके पहले दोपहर 3 बजे ममता बनर्जी एसआईआर पीड़ितों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी।
ममता बनर्जी और चुनाव आयोग के बीच बढ़ा तनाव
ममता बनर्जी और चुनाव आयोग के बीच चल रहा विवाद अब दिल्ली तक पहुंच चुका है। सोमवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एसआईआर मुद्दे पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात के दौरान बैठक बीच में ही छोड़कर बाहर निकल गई थीं। उन्होंने आयोग पर अहंकारी रवैया अपनाने का आरोप लगाया और अपने प्रतिनिधिमंडल के अपमान की शिकायत की। इसके बाद राजनीतिक माहौल और तनावपूर्ण हो गया। माना जा रहा है कि दिल्ली में संभावित विरोध-प्रदर्शन या किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए ममता बनर्जी ने सुरक्षा बढ़ाने का निर्णय लिया।
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दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाने का फैसला
दिल्ली स्थित बंग भवन और पश्चिम बंगाल सरकार के अन्य गेस्ट हाउसों की सुरक्षा बढ़ाई जा रही है। इसमें 20 से 25 जवानों की टीम शामिल होगी, जिसमें डीएसपी, इंस्पेक्टर, महिला पुलिसकर्मी और रैपिड एक्शन फोर्स की टुकड़ी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि सोमवार को हुई बैठक के दौरान उन्होंने काला शॉल ओढ़कर विरोध प्रदर्शन किया और चुनाव आयोग पर बीजेपी का पक्ष लेने का आरोप लगाया।
चुनाव आयोग पर ममता का हमला
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आयोग भाजपा के इशारों पर काम कर रहा है। उन्होंने अधिकारियों के रवैये पर भी नाराजगी जताई और कहा कि उन्हें न्याय की उम्मीद थी, लेकिन वह पूरी नहीं हुई। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वे जमीनी स्तर पर लड़ाई लड़ेंगी और जनता की ताकत के बल पर मुकाबला करेंगी। इस फैसले से साफ है कि राजनीतिक और सुरक्षा माहौल दोनों ही अत्यधिक संवेदनशील है।
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