Mallikarjun Kharge Statement : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दिए गए कथित विवादित बयान ने महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। इस विवाद में अब शिवसेना (UBT) के कद्दावर नेता और सांसद संजय राउत भी खुलकर सामने आ गए हैं। राउत ने न केवल खरगे के रुख का समर्थन किया, बल्कि केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर भी कड़े प्रहार किए। उन्होंने कहा कि जिस तरह से केंद्र सरकार विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है, वह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। राउत के इस बयान ने आगामी चुनावों से पहले महाविकास अघाड़ी (MVA) के भीतर एकजुटता का संदेश दिया है, साथ ही सत्ता पक्ष के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।
संस्थाओं का दुरुपयोग: ‘पॉलिटिकल टेररिज्म’ पर संजय राउत का प्रहार
संजय राउत ने केंद्र सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और पुलिस का इस्तेमाल विपक्ष की आवाज दबाने के लिए किया जा रहा है। राउत के अनुसार, “संवैधानिक संस्थाओं को ‘मिसाइल’ की तरह इस्तेमाल करना और विरोधियों को डराना असल में ‘पॉलिटिकल टेररिज्म’ (राजनीतिक आतंकवाद) ही है।” उन्होंने आगे तर्क दिया कि जब आप चुनाव जीतने के लिए समाज में दहशत पैदा करते हैं और विरोधियों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियाँ देते हैं, तो इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं कहा जा सकता। महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में चल रहे घटनाक्रमों को उन्होंने इसी ‘दहशत के खेल’ का हिस्सा बताया।
विदेश नीति और आंतरिक सुरक्षा पर सवाल: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र
पहलगाम हमले की बरसी का हवाला देते हुए संजय राउत ने केंद्र सरकार की विदेश नीति और आतंकवाद के खिलाफ उनकी जीरो-टोलरेंस की नीति को कटघरे में खड़ा किया। राउत ने एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि पहलगाम में निर्दोष हिंदू पर्यटकों की हत्या के बाद सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू करने की योजना बनाई थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे सरकार झुक गई। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोन आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी पीछे हट गए। राउत ने तीखा सवाल पूछते हुए कहा, “जिन आतंकवादियों ने 26 निर्दोषों का खून बहाया, वे आज भी पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहे हैं। सरकार की गर्जना केवल चुनावी रैलियों तक सीमित क्यों है?”
मुंबई की पहचान और मराठी अस्मिता: टैक्सी चालकों के लिए भाषा की शर्त
राजनीतिक विवादों के बीच संजय राउत ने महाराष्ट्र सरकार के उस फैसले का पुरजोर समर्थन किया, जिसमें टैक्सी और ऑटो चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य की गई है। राउत ने क्षेत्रीय गौरव पर जोर देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति महाराष्ट्र में रोजगार के लिए आता है और यहाँ से अपनी आजीविका कमाता है, तो उसे स्थानीय भाषा का ज्ञान होना ही चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्य अपनी भाषाओं को लेकर सख्त हैं, तो महाराष्ट्र में मराठी की अनिवार्यता पर आपत्ति क्यों? उन्होंने स्पष्ट किया कि शिवसेना हमेशा से मराठी अस्मिता के लिए खड़ी रही है और इस फैसले का विरोध करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
महिला आरक्षण और धमकियों की राजनीति पर सरकार को घेरा
राउत ने महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मंशा पर संदेह जताया। उन्होंने कहा कि अभी तक विधेयक पूरी तरह लागू नहीं हुआ है, लेकिन भाजपा इसका श्रेय लेने और महिलाओं के नाम पर राजनीति करने में व्यस्त है। संजय राउत ने सत्ता पक्ष द्वारा दी जाने वाली ‘परिणाम भुगतने’ की चेतावनियों पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में धमकियों का कोई स्थान नहीं है। आप हमें डराने वाले कौन होते हैं?” राउत के इन तीखे तेवरों ने साफ कर दिया है कि आगामी चुनाव केवल विकास के मुद्दों पर नहीं, बल्कि अस्मिता, जांच एजेंसियों के एक्शन और ‘राजनीतिक आतंकवाद’ जैसे भारी-भरकम नैरेटिव पर लड़े जाएंगे।
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