Mallikarjun Kharge: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को मोदी सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला। उन्होंने केंद्र पर आरोप लगाया कि सरकार चीन से जुड़े मुद्दों पर अस्थिर और अनिश्चित रवैया अपनाती है। खरगे ने कहा कि सरकार का रुख पेंडुलम की तरह कभी इधर और कभी उधर डोलता रहता है।
चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध हटाने की खबरों पर नाराजगी
खरगे ने उन खबरों का जिक्र किया, जिनमें कहा गया कि केंद्र सरकार 2020 में गलवान संघर्ष के बाद लगी चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध हटाने की योजना बना रही है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताया और कहा कि सरकार विदेशी दबाव में आकर महत्वपूर्ण निर्णय बदल रही है।
गलवान में शहीद जवानों का अपमान
खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी के पुराने वादे ‘मैं देश को झुकने नहीं दूंगा’ पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि गलवान में शहीद हुए भारतीय सैनिकों के बलिदान का अपमान तब हुआ जब मोदी सरकार ने चीन को ‘क्लीन चिट’ दे दी। अब चीनी कंपनियों को ‘रेड कार्पेट’ बिछाने का मतलब यह है कि सरकार ने वास्तविक तौर पर चीन के लाल रंग को अनदेखा किया।
अमेरिकी दबाव और रूसी तेल पर चुप्पी
कांग्रेस अध्यक्ष ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत के रूसी तेल व्यापार पर की गई टिप्पणियों पर पीएम मोदी की चुप्पी को ‘सरेंडर’ बताया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की यह खामोशी राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की गुटनिरपेक्ष और स्वतंत्र विदेश नीति इस अस्थिरता के चलते प्रभावित हो रही है।
विदेश नीति में पेंडुलम रवैया
खरगे ने कहा कि मोदी सरकार की विदेश नीति में लगातार उतार-चढ़ाव आ रहे हैं। कभी चीन के प्रति नरम रवैया, कभी अमेरिका के दबाव में फैसले बदलना, यह सब भारत के अंतरराष्ट्रीय हितों पर प्रतिकूल असर डाल रहा है। उन्होंने कहा कि इन बदलावों की भारी कीमत भारतीय जनता को चुकानी पड़ रही है।
पिछली यात्रा और हालात का असर
खरगे ने बताया कि चीनी कंपनियों पर पाबंदियां 2020 में गलवान संघर्ष के बाद लगाई गई थीं। लेकिन अब भारत और चीन अपने रिश्तों को सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं। इसके पीछे अमेरिका का दबाव और बदलते वैश्विक हालात भी प्रमुख कारण हैं।
पीएम मोदी और शी जिनपिंग की बैठक
पिछले साल पीएम मोदी की चीन यात्रा और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई मुलाकात के बाद दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की थी। खरगे ने इसे विदेशी दबाव में भारत की नीति को नरम करने की कोशिश बताया।
सरकार पर राष्ट्रीय हितों से समझौते का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने निष्कर्ष निकाला कि मोदी सरकार की यह नीति न सिर्फ गलवान शहीदों के बलिदान के अपमान जैसी स्थिति पैदा करती है बल्कि भारत की स्वतंत्र और गुटनिरपेक्ष विदेश नीति को भी कमजोर करती है। उन्होंने कहा कि यह अस्थिर रुख देश और जनता के हित में नहीं है।
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