सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: महिलाओं को 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश, सरकार को मिला महत्वपूर्ण आदेश

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा कि तीन महीने और उससे अधिक उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली मांओं को मातृत्व अवकाश मिलेगा. साथ ही कोर्ट ने कहा कि पितृत्व अवकाश के लेकर सरकार फैसला करेगी. पहले के नियम के मुताबिक तीन महीने के बच्चे को गोद लेने पर 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलता था. शीर्ष कोर्ट ने मंगलवार को अहम फैसला सुनाते हुए सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Social Security Code, 2020) की धारा 60(4) के उस प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया, जिसमें गोद लेने वाली मां को मातृत्व लाभ केवल तभी देने

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Published On :

मार्च 17, 2026

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा कि तीन महीने और उससे अधिक उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली मांओं को मातृत्व अवकाश मिलेगा. साथ ही कोर्ट ने कहा कि पितृत्व अवकाश के लेकर सरकार फैसला करेगी. पहले के नियम के मुताबिक तीन महीने के बच्चे को गोद लेने पर 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलता था. शीर्ष कोर्ट ने मंगलवार को अहम फैसला सुनाते हुए सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (Social Security Code, 2020) की धारा 60(4) के उस प्रावधान को असंवैधानिक करार दिया, जिसमें गोद लेने वाली मां को मातृत्व लाभ केवल तभी देने की बात कही गई थी जब बच्चा तीन महीने से कम उम्र का हो. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गोद लेने वाली मां को बच्चे की उम्र की परवाह किए बिना 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश मिलना चाहिए।

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सुप्रीम कोर्ट ने प्रावधान की व्याख्या करते हुए कहा कि जो महिला कानूनी रूप से किसी बच्चे को गोद लेती है या जो कमीशनिंग मदर है, उसे बच्चे को सौंपे जाने की तारीख से 12 सप्ताह तक मातृत्व लाभ का अधिकार होगा. इस फैसले को गोद लेने वाली माताओं के अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे उन्हें समानता और सामाजिक सुरक्षा का लाभ सुनिश्चित होगा।

जस्टिस जेबी पार्दीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा कि परिवार की परिभाषा केवल जैविक संबंधों के आधार पर ही तय नहीं की जा सकती. फैसले में जोर दिया गया कि गोद लेना परिवार बढ़ाने का उतना ही वैध तरीका है जितना जैविक तरीका. ऐसे में एक गोद दिए गए बच्चे का अधिकारी भी एक बायोलॉजिकल बच्चे जैसा है. जजों ने आगे कहा कि एक गोल लिए गए बच्चे को पालन पोषण में माता-पिता भावनात्मक रूप से उतना ही जड़े होते हैं जितना एक बॉयोलॉजिकल बच्चे को पालने में होता है. इसमें बच्चे की उम्र से कुछ भी लेना देना नहीं है।

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