यूपी में स्कूलों को बड़ा झटका, मान्यता शुल्क के साथ देना होगा 18% GST

लखनऊ  माध्यमिक शिक्षा परिषद,उत्तर प्रदेश से मान्यता प्राप्त और नवीन मान्यता के लिए आवेदन करने वाले स्कूलों को बड़ा झटका लगा है। अब मान्यता शुल्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी देना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था एक अप्रैल 2026 से ऑनलाइन मान्यता या संबद्धता के लिए आवेदन करने वाली संस्थाओं पर लागू कर दी गई है। बोर्ड सचिव भगवती सिंह की ओर से जारी सूचना के अनुसार, जीएसटी जमा होने की पुष्टि के बाद ही मान्यता प्रदान करने की संस्तुति की जाएगी। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग की कर अनुसंधान इकाई के 11 अक्तूबर 2024 के परिपत्र तथा केंद्रीय

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Published On :

अगस्त 23, 2026

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लखनऊ
 माध्यमिक शिक्षा परिषद,उत्तर प्रदेश से मान्यता प्राप्त और नवीन मान्यता के लिए आवेदन करने वाले स्कूलों को बड़ा झटका लगा है। अब मान्यता शुल्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी देना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था एक अप्रैल 2026 से ऑनलाइन मान्यता या संबद्धता के लिए आवेदन करने वाली संस्थाओं पर लागू कर दी गई है। बोर्ड सचिव भगवती सिंह की ओर से जारी सूचना के अनुसार, जीएसटी जमा होने की पुष्टि के बाद ही मान्यता प्रदान करने की संस्तुति की जाएगी।

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग की कर अनुसंधान इकाई के 11 अक्तूबर 2024 के परिपत्र तथा केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर अधिनियम-2017 की धारा 168(1) के तहत शिक्षण संस्थाओं की मान्यता और संबद्धता शुल्क पर 18 प्रतिशत जीएसटी का प्रावधान किया गया है। इसी के तहत परिषद ने नई व्यवस्था लागू की है। एक अप्रैल 2026 से नवीन मान्यता के लिए किए गए अथवा किए जा रहे सभी आवेदनों में निर्धारित मान्यता शुल्क के अतिरिक्त 18 प्रतिशत जीएसटी जमा करना होगा। भविष्य में किए जाने वाले आवेदनों पर भी यह शुल्क अनिवार्य रहेगा। बिना जीएसटी भुगतान वाले आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा और न ही उसे अग्रसारित या संस्तुत किया जाएगा।

विद्यालयों को मान्यता आवेदन शुल्क राजकोष में जमा करने के बाद जीएसटी की 18 प्रतिशत धनराशि परिषद के निर्धारित बैंक खाते में अलग से जमा करनी होगी। इसके बाद जमा रसीद या चालान की प्रमाणित और स्पष्ट प्रति ऑनलाइन आवेदन के समय पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को भी इसकी प्रति उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। बोर्ड ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिया है कि वे अपने जिले के वित्तविहीन विद्यालयों के प्रबंधकों, प्रधानाचार्यों और नवीन मान्यता के आवेदकों को नई व्यवस्था की जानकारी देकर नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं।

दाखिले को जरूरी डब्ल्यूआरएन की नहीं बढ़ेगी तिथि
उधर, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) से संबद्ध महाविद्यालयों में होने वाले दाखिलों पर शासन ने रोक लगा दी है। राजभवन में हुई बैठक के बाद निर्देश दिए हैं कि दाखिले के लिए बार-बार वेब रजिस्ट्रेशन नंबर (डब्ल्यूआरएन) की तिथि बढ़ाना सही नहीं है। राज्यपाल के निर्देश पर विवि ने इस पर अमल करना शुरू कर दिया है। महाविद्यालयों में दाखिले के लिए 20 अगस्त अंतिम तिथि थी जिसे अब नहीं बढ़ाया गया है। इसको लेकर कई कॉलेज के प्रबंधक परेशान हैं।

यूपी बोर्ड का परिणाम जारी होने के बाद अप्रैल माह से ही सीएसजेएमयू में दाखिले के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू हो गया था। विवि में हर साल दाखिले की अंतिम तिथि कई बार बढ़ती है। अक्तूबर तक दाखिले की प्रक्रिया चलती है। इस कारण, सैकड़ों छात्रों को पहले सेमेस्टर की परीक्षा के लिए कुछ ही दिन मिलते हैं। इसे देखते हुए राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने 14 अगस्त को सभी विवि के अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। विचार-विमर्श करने के बाद तय किया गया कि अब एक ही अंतिम तिथि निर्धारित होगी और बार-बार दाखिले के लिए पंजीकरण पोर्टल नहीं खुलेगा। पिछले साल लगभग दो लाख दाखिले हुए थे जबकि इस साल अभी संख्या 1.80 लाख ही पहुंची है।

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