हिंसा और उपद्रव से निपटने की बड़ी तैयारी, बिहार में बनेंगी 49 दंगा निरोधी कंपनियां

पटना बिहार में कानून-व्यवस्था से जुड़ी संवेदनशील परिस्थितियों, हिंसक प्रदर्शन, सड़क जाम, सरकारी संपत्ति पर हमले और भीड़ नियंत्रण जैसी स्थिति से निपटने के ल‍िए बड़ी व्‍यवस्‍था की गई है। अब हर जिले में दंगा निरोधी दस्ता (Riot Control Unit) तैयार किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को ए, बी और सी श्रेणी में बांटकर कुल 49 दंगा निरोधी कंपनियों के गठन की योजना बनाई है। इनके लिए कुल 294 वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। हर दंगा निरोधी कंपनी में तीन प्लाटून होंगे। एक प्लाटून में कुल 47 पुलिसकर्मी रहेंगे। संसाधनों से लैस रहेगी टीम इनमें आंसू गैस दस्ता, लाठी

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Published On :

अगस्त 19, 2026

पटना
बिहार में कानून-व्यवस्था से जुड़ी संवेदनशील परिस्थितियों, हिंसक प्रदर्शन, सड़क जाम, सरकारी संपत्ति पर हमले और भीड़ नियंत्रण जैसी स्थिति से निपटने के ल‍िए बड़ी व्‍यवस्‍था की गई है।

अब हर जिले में दंगा निरोधी दस्ता (Riot Control Unit) तैयार किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों को ए, बी और सी श्रेणी में बांटकर कुल 49 दंगा निरोधी कंपनियों के गठन की योजना बनाई है।

इनके लिए कुल 294 वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। हर दंगा निरोधी कंपनी में तीन प्लाटून होंगे। एक प्लाटून में कुल 47 पुलिसकर्मी रहेंगे।

संसाधनों से लैस रहेगी टीम
इनमें आंसू गैस दस्ता, लाठी दस्ता, सशस्त्र बल, चालक, वायरलेस ऑपरेटर और अन्य प्रशिक्षित कर्मी शामिल होंगे। जरूरत पड़ने पर महिला पुलिसकर्मी, चिकित्सा और एंबुलेंस सहायता दल तथा वीडियोग्राफी के लिए कर्मी भी टीम का हिस्सा होंगे।

प्रत्येक प्लाटून को एक बस और एक ट्रक समेत दो वाहन मिलेंगे। जिलों की श्रेणी के अनुसार संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। ए श्रेणी में पटना को तीन कंपनियां और 18 वाहन मिलेंगे।

गया, रोहतास, मुजफ्फरपुर, सारण, मोतिहारी, बेतिया, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, भागलपुर और अन्य चिन्हित जिलों में दो-दो कंपनियां और 12-12 वाहन होंगे।

बी श्रेणी के जिलों में एक-एक कंपनी और छह-छह वाहन, जबकि सी श्रेणी के जिलों में एक-एक प्लाटून और दो-दो वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे।

20 म‍िनट के अंदर होगी रवानगी
दंगा या हिंसा की सूचना मिलते ही जिला नियंत्रण कक्ष से तत्काल सूचना प्रसारित की जाएगी। दंगा निरोधी दस्ते को 20 मिनट के भीतर निर्धारित स्थान के लिए रवाना किया जाएगा।

मौके पर पहुंचकर टीम वरीय पुलिस अधिकारी के साथ समन्वय करते हुए स्थिति का लगातार आकलन करेगी और जरूरत के अनुसार कार्रवाई करेगी।

दस्ते में शामिल पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। हर जिले के पुलिस केंद्र में एक महीने का प्रशिक्षण होगा। इसके बाद प्रत्येक प्लाटून को हर तीन महीने में एक सप्ताह का रिफ्रेशर कोर्स कराया जाएगा।