धोखाधड़ी मामले के बाद बड़ा फैसला, खिलाड़ियों की कारतूस खरीद पर नजर; गन लाइसेंस पर लगी सीमा

भोपाल. भोपाल की फिजाओं में शूटिंग रेंज से आने वाली गोलियों की गूंज अक्सर देश के लिए मेडल जीतने वाले होनहारों की कहानी बयां करती थी। लेकिन, इसी गूंज के पीछे एक ऐसा खौफनाक सच छिपा था, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को हिलाकर रख दिया। दरअसल स्पोर्ट्स कोटे के तहत मिलने वाले कारतूस, जो देश का मान बढ़ाने के लिए चलने चाहिए थे, वे चंद रुपयों के लालच में अपराधियों की बंदूकों की खुराक बन रहे थे। एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। जांच बैठी तो सच सामने आया कि कई ऐसे लोगों के नाम पर भी कारतूस

Wrriten By :

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Published On :

जून 14, 2026

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भोपाल.

भोपाल की फिजाओं में शूटिंग रेंज से आने वाली गोलियों की गूंज अक्सर देश के लिए मेडल जीतने वाले होनहारों की कहानी बयां करती थी। लेकिन, इसी गूंज के पीछे एक ऐसा खौफनाक सच छिपा था, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले को हिलाकर रख दिया।

दरअसल स्पोर्ट्स कोटे के तहत मिलने वाले कारतूस, जो देश का मान बढ़ाने के लिए चलने चाहिए थे, वे चंद रुपयों के लालच में अपराधियों की बंदूकों की खुराक बन रहे थे। एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। जांच बैठी तो सच सामने आया कि कई ऐसे लोगों के नाम पर भी कारतूस जारी हो रहे थे, जिन्होंने कभी किसी प्रतियोगिता में हिस्सा तक नहीं लिया था। भोपाल के 135 शूटर्स की जांच हुई, जिसमें 69 के लाइसेंस रद और 10 के निलंबित कर दिए गए।

इस बड़ी धोखाधड़ी के बाद भोपाल जिला प्रशासन ने 'ऑपरेशन क्लीन' शुरू करते हुए नियमों के पेंच कस दिए हैं। अब तक जो शूटर सालभर में 15 हजार से लेकर 1 लाख तक कारतूस आसानी से ले लेते थे, उनके लिए अब नियम कड़े कर दिए गए हैं। अब नए नियमों के तहत एक शूटर को एक बार में अधिकतम सिर्फ 500 और सालभर में केवल 1000 कारतूस ही जारी किए जाएंगे। अगर किसी खिलाड़ी को इससे ज्यादा की जरूरत होगी, तो उसे खेल संचालक से बाकायदा सत्यापन कराना होगा।

यही नहीं, प्रशासन ने हथियारों की संख्या पर भी कैंची चला दी है। अब नेशनल और इंटरनेशनल लेवल के खिलाड़ी भी केवल दो गन के लाइसेंस रख सकेंगे, जबकि पहले उन्हें 8 से 10 बंदूकें रखने की छूट थी। प्रशासन अब हर एक गोली का हिसाब रखने की तैयारी में है। राज्य सरकार को एक प्रस्ताव भेजा गया है, जिसमें कानून बदलकर कारतूस के 'खोखों' (खाली शेल) का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य करने की सिफारिश की गई है। अब शूटर्स को यह भी लिखित में देना होगा कि कारतूस किस प्रतियोगिता के लिए खरीदे जा रहे हैं और उनका इस्तेमाल किस शूटिंग रेंज में होगा। 

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