नकली दवाओं का बड़ा नेटवर्क बेनकाब, यूपी में 10 करोड़ से ज्यादा की अवैध दवाएं पकड़ी गईं

लखनऊ उत्तर प्रदेश में नकली दवा का कारोबार अरबों रुपये का है। हालत यह है कि जहां जांच हो रही है, वहीं गड़बड़ी सामने आ रही है। नामचीन कंपनियों के नाम पर दवाएं खुले बाजार में धड़ल्ले से बिक रही हैं। यूपी में यह अवैध धंधा जमकर चल रहा है। एफएसडीए की हालिया कार्रवाइयों में इसका खुलासा हुआ है। दवा के अवैध कारोबारियों की जड़ें पूर्वांचल में वाराणसी और आसपास के जिलों से लेकर पश्चिम में मेरठ, गाजियाबाद और सहारनपुर तक फैली हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में बनवाकर नकली दवाएं यूपी

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Published On :

अगस्त 23, 2026

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लखनऊ
उत्तर प्रदेश में नकली दवा का कारोबार अरबों रुपये का है। हालत यह है कि जहां जांच हो रही है, वहीं गड़बड़ी सामने आ रही है। नामचीन कंपनियों के नाम पर दवाएं खुले बाजार में धड़ल्ले से बिक रही हैं। यूपी में यह अवैध धंधा जमकर चल रहा है। एफएसडीए की हालिया कार्रवाइयों में इसका खुलासा हुआ है। दवा के अवैध कारोबारियों की जड़ें पूर्वांचल में वाराणसी और आसपास के जिलों से लेकर पश्चिम में मेरठ, गाजियाबाद और सहारनपुर तक फैली हैं। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में बनवाकर नकली दवाएं यूपी में खपाई जा रही हैं।

सबसे बड़ा राज्य होने के नाते यूपी दवाओं के लिहाज से बहुत बड़ा बाजार है। नकली दवाओं के धंधे से जुड़े जालसाजों ने इसे अवैध कारोबार की बड़ी मंडी भी बना दिया है। हालत यह है कि लोग दवा खा रहे हैं, लेकिन उसका असर नहीं हो रहा। नामचीन कंपनियों के सिरप, एंटीबायोटिक और इंजेक्शन हूबहू उसी पैकिंग में बेचे जा रहे हैं। कहीं दवा कंपनियों की शिकायत और निशानदेही पर तो कहीं गलत स्पेलिंग के चलते मामले पकड़े जा रहे हैं। अब तक दस करोड़ से अधिक की अवैध दवाएं पकड़ी गई हैं। जहां तक अवध क्षेत्र में दवा के अवैध कारोबार का सवाल है तो लखनऊ के साथ ही गोंडा, रायबरेली,
बाराबंकी में इसके मामले पकड़े गए हैं।

लाइसेंस बाद में मिला, बिक्री पहले शुरू
कार्रवाई के दौरान लखनऊ में 41.58 लाख रुपये, वाराणसी में 25 लाख, गोंडा 1.13 करोड़ और आगरा में 3.63 करोड़ रुपये की अवैध औषधियां हाल में बरामद की जा चुकी हैं। लखनऊ के अमीनाबाद में नकली और काउंटरफीट दवाओं की सप्लाई चेन चलाने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। जांच में सामने आया कि मेसर्स हेल्थ प्लस, मेसर्स एमके फार्मा, राम फार्मा और पैशन्ट केयर सर्जिकल हाउस (सहारनपुर) मिलकर फर्जी बिलिंग के जरिए नकली दवाएं बाजार में खपा रहे थे। खास बात यह है कि हेल्थ प्लस को लाइसेंस तो मई 2025 में मिला, लेकिन फर्म अप्रैल 2025 से ही अवैध खरीद-बिक्री दिखा रही थी।

नामी कंपनियों के नाम पर चल रहा है खेल
ऑगमेंटेन टैबलेट, अल्कासोल व डेक्सोरेंज सिरप, जोरिल एम1 टेबलेट, टेल्मा, पेंटाप सहित कई नकली दवाएं पकड़ी गईं, जो ब्रांडेड कंपनियों की पैकिंग में बेची जा रही थीं। हाल ही में एफएसडीए व क्राइम ब्रांच की टीम ने उत्तराखंड में एक फैक्ट्री भी पकड़ी, जहां डा. रेड्डीज, सिप्ला, एल्डर, इंटास, मैक्रो जैसी नामचीन कंपनियों की दवाएं बन रही थीं। क्लेवैक्टम 625 और रेजो-डी कैप्सूल की खुलेआम नकल तैयार हो रही थी। मौके से दो करोड़ से अधिक की नकली दवाएं, मशीनें व पैकिंग सामग्री भी पकड़़ी गई। सबसे बड़ा खुलासा आगरा में हुआ जहां चार करोड़ से अधिक की नकली दवाओं का जखीरा बरामद हुआ।

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