Women Reservation Bill 2026: लोकसभा में हाल ही में महिला आरक्षण बिल 2026 पारित नहीं हो सका, जिसके बाद देश की राजनीति में खड़ा हो गया है। इस घटनाक्रम के बाद भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने विपक्ष पर तीखा हमला शुरू कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी और एनडीए गठबंधन ने इसे महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताते हुए देशव्यापी आंदोलन की योजना बनाई है।
देशभर में विरोध प्रदर्शन का ऐलान
बीजेपी और एनडीए सहयोगी दलों ने निर्णय लिया है कि वे पूरे देश में विपक्ष के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके तहत जिला मुख्यालयों पर रैलियों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया अभियान चलाए जाएंगे। महिला मोर्चा की अगुवाई में यह प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे, जिसमें महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए जाएंगे। संसद परिसर में भी एनडीए की महिला सांसदों ने अपना विरोध दर्ज कराया।
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु चुनाव में बनेगा बड़ा मुद्दा
बीजेपी ने संकेत दिया है कि यह मामला आगामी विधानसभा चुनावों में बड़ा राजनीतिक हथियार बनेगा। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में पार्टी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएगी। पार्टी इसे महिलाओं के लिए ऐतिहासिक अवसर को रोकने के रूप में पेश करने की रणनीति बना रही है, ताकि जनता के बीच विपक्ष के खिलाफ माहौल बनाया जा सके।
बीजेपी का विपक्ष पर गंभीर आरोप

बीजेपी सांसद पूनमबेन मदाम ने कहा कि 2023 में तय लक्ष्य के अनुसार 2029 तक महिला आरक्षण लागू होना था, लेकिन विपक्ष ने इसका विरोध करके इस प्रक्रिया को रोक दिया। उनका आरोप है कि विपक्ष ने महिलाओं के हितों की अनदेखी की है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की महिलाएं इस निर्णय को लंबे समय तक याद रखेंगी।
Women Reservation Bill 2026: लोकसभा में पेश होगा महिला आरक्षण बिल, कांग्रेस-सपा विरोध में
केंद्र सरकार और नेताओं की प्रतिक्रिया
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस घटना को लोकतंत्र के लिए निराशाजनक बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से लाया गया था, लेकिन विपक्ष ने इसे रोककर बड़ा अवसर गंवा दिया। वहीं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने इस दिन को भारतीय लोकतंत्र का “काला अध्याय” बताया और विपक्ष पर महिला विरोधी सोच का आरोप लगाया।रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।
राजनीतिक बहस और आगे की रणनीति
सरकार का कहना है कि यह विधेयक महिलाओं को अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए लाया गया था, लेकिन विपक्ष के विरोध के कारण यह पारित नहीं हो सका। अब बीजेपी इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर जन आंदोलन का रूप देने की तैयारी कर रही है। दूसरी ओर विपक्ष अपने रुख को सही ठहराते हुए इसे राजनीतिक बहस का हिस्सा बता रहा है।









