Women Reservation Bill 2026: लोकसभा में पास नहीं हुआ महिला आरक्षण बिल, योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर हमला

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल 2026 के गिरने से देश की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा हो गया है, लेकिन क्या यह सिर्फ वोटिंग की हार है या इसके पीछे कोई गहरी राजनीतिक रणनीति छिपी है, जानिए योगी आदित्यनाथ के बयान, विपक्ष की प्रतिक्रिया और पूरे घटनाक्रम की असली कहानी

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अप्रैल 18, 2026

Women Reservation Bill 2026: महिला आरक्षण बिल 2026 मतदान से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका। इस प्रस्ताव के तहत संसद की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान रखा गया था। इस महत्वपूर्ण बिल पर सदन में 21 घंटे से अधिक समय तक विस्तृत चर्चा हुई, जिसके बाद मतदान कराया गया। वोटिंग में कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया। इनमें से 298 सांसदों ने बिल के पक्ष में वोट दिया, जबकि 230 सांसदों ने विरोध किया। संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत 352 वोट का था, लेकिन बिल 54 वोट कम रहने के कारण गिर गया।

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योगी आदित्यनाथ का विपक्ष पर तीखा हमला

योगी आदित्यनाथ ने इस बिल के गिरने पर विपक्ष पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह घटना भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक “काला अध्याय” है। योगी आदित्यनाथ ने आरोप लगाया कि विपक्ष द्वारा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के लिए आवश्यक संविधान संशोधन को रोकना देश की मातृशक्ति और उनके अधिकारों पर सीधा प्रहार है। उन्होंने इसे ‘भारत माता’ के सम्मान पर चोट बताया और कहा कि यह महिलाओं के साथ अन्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।

विपक्ष पर नारी विरोधी मानसिकता का आरोप

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी सोच नारी विरोधी दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं इस पूरे घटनाक्रम को देख और समझ रही हैं और आने वाले समय में इसका जवाब जरूर देंगी।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जारी रहेंगे प्रयास

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि केंद्र सरकार और एनडीए गठबंधन मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए लगातार काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।

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राजनीतिक बहस तेज, देशभर में चर्चा

इस बिल के गिरने के बाद देश की राजनीति में एक नई बहस शुरू हो गई है। सत्ता पक्ष इसे महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ कदम बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देख रहा है। सरकार का कहना है कि यह बिल महिलाओं को अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से लाया गया था। वहीं विपक्ष ने इसे सीट परिसीमन और संरचनात्मक बदलाव से जोड़कर इसका विरोध किया।

आगे की राह पर सवाल

महिला आरक्षण विधेयक विवाद 2026 ने संसद में सत्ता और विपक्ष के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले समय में सरकार इस मुद्दे को किस तरह आगे बढ़ाती है और क्या कोई नया संशोधन या रणनीति अपनाई जाती है।

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