Mahavir Jayanti 2026: जैन धर्म के २४वें और अंतिम तीर्थंकर, भगवान महावीर स्वामी की जयंती का पावन त्योहार पूरे देश में बड़े ही हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। जैन समाज के लिए यह दिन आत्मिक शुद्धि और अहिंसा के मार्ग पर चलने का सबसे बड़ा पर्व है।
भगवान महावीर ने बेहद कम उम्र में ही राजपाठ और सांसारिक सुखों का त्याग कर अध्यात्म और सत्य की राह चुन ली थी। हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को उनका जन्म कल्याणक मनाया जाता है। इस विशेष अवसर पर मंदिरों में भव्य सजावट की जाती है, भगवान महावीर की प्रतिमा के साथ विशाल और आकर्षक शोभायात्राएं (जुलूस) निकाली जाती हैं और लोगों को सत्य, अहिंसा व शाकाहार की ओर प्रेरित किया जाता है।
महावीर जयंती पर भगवान महावीर की सरल पूजा विधि

यदि आप घर पर या मंदिर में भगवान महावीर की आराधना करना चाहते हैं, तो इस सरल और प्रामाणिक विधि का पालन कर सकते हैं:
प्रातः काल की शुरुआत: इस पावन दिन पर सुबह जल्दी उठकर सबसे पहले भगवान महावीर स्वामी का ध्यान करें।
वेदी स्थापना: पवित्र स्नान करने के बाद अपने घर के पूजा स्थल या मंदिर को अच्छी तरह साफ और शुद्ध करें। इसके बाद वहां एक सुंदर वेदी (चौकी) की स्थापना करें।
प्रतिमा अभिषेक: वेदी पर भगवान महावीर की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। यदि धातु की प्रतिमा है, तो दूध और शुद्ध जल से उनका अभिषेक करें।
अर्पण और संकल्प: प्रभु को ताजे फल, फूल और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर सच्चे मन से अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्रत या उपवास रखने का संकल्प लें।
दीप प्रज्वलन: शुद्ध घी या तेल का दीपक जलाएं और धूप-अगरबत्ती अर्पित करें।
मंत्र जाप: पूजा के समय मन को शांत रखते हुए नवकार महामंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। इससे मानसिक शांति और आध्यात्मिक स्पष्टता मिलती है।
जैन धर्म में नवकार महामंत्र का महत्व
जैन धर्म में ‘नवकार महामंत्र’ का स्थान सर्वोपरि है। इसे सभी मंत्रों का राजा माना जाता है। इस मंत्र को ‘नमस्कार मंगल’ या ‘परमेष्ठी मंत्र’ के रूप में भी जाना जाता है। इस मंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि उन सभी संतों, मुनियों और सिद्ध आत्माओं की वंदना की गई है जो मोक्ष मार्ग पर अग्रसर हैं या मोक्ष प्राप्त कर चुके हैं।
यह पावन नवकार महामंत्र इस प्रकार है:
नमो अरिहंताणं
नमो सिद्धाणं
नमो आयरियाणं
नमो उवज्झायाणं
नमो लोए सव्व साहूणं।
एसो पंच णमोक्कारो, सव्व पावप्पणासणो
मंगलाणं च सव्वसिं, पढमं हवइ मंगलं।
मंत्र का अर्थ: मैं सभी अरिहंतों (शत्रु-जेताओं), सिद्धों (मुक्त आत्माओं), आचार्यों (गुरुओं), उपाध्यायों (शिक्षकों) और लोक के सभी साधुओं को नमन करता हूँ। यह पांच नमस्कारों का समूह सभी पापों का नाश करने वाला है और संसार के सभी मंगलों में यह प्रथम और सबसे उत्तम मंगल है।
महावीर जयंती का दिव्य संदेश
भगवान महावीर ने दुनिया को ‘जियो और जीने दो’ का अमर संदेश दिया था। उनके पांच मुख्य सिद्धांत— अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह (जरूरत से ज्यादा संचय न करना) आज के इस भागदौड़ भरे युग में भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं। इस पावन दिन पर हमें उनके बताए अहिंसा और करुणा के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।
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