Mahashivratri 2026: 15 या 16 फरवरी कब है महाशिवरात्रि? जानें पूजा का सबसे श्रेष्ठ मुहूर्त

महाशिवरात्रि भगवान शिव को अत्यंत प्रिय पर्व है और यह शिव-शक्ति के मिलन का प्रतीक है। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए यह दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी।

Mahashivratri 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जनवरी 21, 2026

Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक प्रमुख और पावन पर्व है, जिसे ‘देवों के देव’ भगवान शिव की प्रिय रात्रि के रूप में मनाया जाता है। शिवरात्रि हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है, जबकि महाशिवरात्रि फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने शिवलिंग रूप में प्रकट होकर ब्रह्मांड की रचना में अपनी सर्वोच्च शक्ति का प्रदर्शन किया था।

महाशिवरात्रि का पर्व न केवल भगवान शिव की उपासना का अवसर है, बल्कि यह मन, चित्त, बुद्धि, जीव, ब्रह्मा, माया, आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी द्वारा निर्मित शिवलिंग की पूजा का दिन भी माना जाता है। यही कारण है कि महाशिवरात्रि पर की गई साधना और पूजा भक्तों की सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करती है।

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महाशिवरात्रि की तिथि और निशिता मुहूर्त

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15 या 16 फरवरी कब है महाशिवरात्रि?

फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 2026 में 15 फरवरी की शाम 05:04 बजे प्रारम्भ होगी और 16 फरवरी की शाम 05:34 बजे समाप्त होगी। हिंदू धर्म में पर्व को उदयातिथि से मान्यता दी जाती है, लेकिन महाशिवरात्रि उसी दिन मनाई जाती है जब फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी निशिता काल में विद्यमान हो। इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी।

निशिता काल मुहूर्त

देर रात 12:09 बजे से देर रात 01:01 बजे तक।

महाशिवरात्रि पर चारों प्रहर की पूजा का समय

महाशिवरात्रि पर भक्त चारों प्रहर में भगवान शिव की पूजा करते हैं। प्रत्येक प्रहर का समय इस प्रकार है

प्रथम प्रहर: शाम 06:11 – रात 09:23

द्वितीय प्रहर: रात 09:23 – 16 फरवरी, सुबह 12:35

तृतीय प्रहर: 16 फरवरी, सुबह 12:35 – सुबह 03:47

चतुर्थ प्रहर: 16 फरवरी, सुबह 03:47 – सुबह 06:59

इन प्रहरों में भगवान शिव की आराधना करना अत्यंत शुभ माना जाता है और यह भक्तों की आध्यात्मिक शक्ति बढ़ाने में सहायक होता है।

भगवान शिव का प्रकट होना और शिवलिंग की उत्पत्ति

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15 या 16 फरवरी कब है महाशिवरात्रि?

शिव पुराण के अनुसार, सृष्टि के प्रारंभ में भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी के बीच शक्ति प्रदर्शन को लेकर विवाद हुआ। उसी समय एक चमकीला रहस्यमयी पत्थर प्रकट हुआ। आकाशवाणी ने कहा कि जो इसका अंत खोज लेगा, वही सर्वशक्तिमान होगा। विष्णु और ब्रह्मा दोनों प्रयास करने के बावजूद इसे नहीं पा सके। ब्रह्मा ने झूठ बोलकर दावा किया कि उन्हें पत्थर का अंत मिल गया।

तभी दिव्य आवाज आई, “मैं शिवलिंग हूँ, मेरा न कोई अंत है और न कोई शुरुआत।” इसी क्षण भगवान शिव प्रकट हुए और ब्रह्मांड में अपनी सर्वोच्च शक्ति का प्रदर्शन किया। यह कथा सत्य और ईमानदारी का महत्व सिखाती है कि अंततः सत्य की ही जीत होती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।