Maharashtra SIR : SIR में नाम कटने वालों को मिलेगी राहत? फॉर्म 6 में बदलाव पर चुनाव आयोग का फैसला अहम

एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से नाम कटने वालों के लिए महाराष्ट्र ने नई पहल का प्रस्ताव दिया है। फॉर्म 6 में बदलाव से पुराने मतदाताओं को दोबारा नाम जुड़वाने में आसानी हो सकती है। लेकिन क्या चुनाव आयोग इन तीन सुझावों को मंजूरी देगा? फिलहाल इस पर आधिकारिक फैसला आना बाकी है।

Maharashtra SIR

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 18, 2026

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Maharashtra SIR : मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने चुनाव आयोग के सामने एक अहम प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य उन मतदाताओं को दोबारा मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया आसान बनाना है, जिनके नाम एसआईआर के दौरान सूची से हट गए थे। प्रस्ताव के अनुसार, ऐसे लोगों को नए मतदाता के रूप में खुद को घोषित किए बिना दोबारा नाम शामिल कराने के लिए आवेदन करने की सुविधा मिलनी चाहिए। इसके लिए फॉर्म 6 में संशोधन करने का सुझाव दिया गया है।

चुनाव आयोग को भेजा गया प्रस्ताव, घोषणा पत्र पर सवाल

सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पिछले सप्ताह ही यह प्रस्ताव चुनाव आयोग को भेजा है। इसका प्रमुख उद्देश्य फॉर्म 6 में मौजूद घोषणा से जुड़ी संभावित उलझन को दूर करना है। वर्तमान व्यवस्था में इस फॉर्म के जरिए आवेदन करने वाले व्यक्ति को यह घोषणा करनी होती है कि वह पहली बार मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर रहा है। आम तौर पर नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए फॉर्म 6 का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, एसआईआर के दौरान जिन लोगों के नाम सूची से हट गए हैं, उन्हें भी दोबारा नाम जुड़वाने के लिए इसी फॉर्म का इस्तेमाल करने को कहा गया है।

पहले से पंजीकृत मतदाताओं के सामने क्या है परेशानी?

मौजूदा घोषणा के कारण उन लोगों के सामने व्यावहारिक समस्या पैदा हो सकती है, जिनका नाम पहले मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन एसआईआर के दौरान किसी वजह से हट गया। ऐसे मतदाता फॉर्म 6 भरने में हिचकिचा सकते हैं, क्योंकि उन्हें लग सकता है कि पहली बार मतदाता बनने की घोषणा करना गलत जानकारी देने जैसा होगा। इससे दोबारा पंजीकरण की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। प्रस्ताव का मकसद इसी भ्रम को खत्म करना और पहले से पंजीकृत मतदाताओं के लिए दोबारा नाम जुड़वाने का रास्ता स्पष्ट करना है।

गलत जानकारी देने पर हो सकती है कानूनी कार्रवाई

इस मामले में कानूनी पहलू भी महत्वपूर्ण है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत मतदाता पंजीकरण से जुड़े किसी मामले में जानबूझकर गलत बयान या घोषणा करने पर सजा का प्रावधान है। इसके तहत दोषी पाए जाने पर एक साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति का नाम पहले मतदाता सूची में था और एसआईआर में हट गया, तो पहली बार पंजीकरण करने से जुड़ी घोषणा उसे असमंजस में डाल सकती है। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य इस तरह की आशंकाओं को दूर करना भी है।

फॉर्म 6 में बदलाव के लिए तीन अहम सुझाव

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने फॉर्म 6 में तीन प्रमुख बदलावों की सिफारिश की है।

  • ‘नए मतदाता’ शब्द हटाने का सुझाव: फॉर्म 6 के शीर्षक से ‘नया मतदाता’ शब्द हटाया जाए, ताकि पहले से पंजीकृत रहे लोगों को आवेदन करने में परेशानी न हो।

  • वैकल्पिक घोषणा का प्रावधान: ऐसे आवेदकों के लिए अलग घोषणा का विकल्प दिया जाए, जिनका नाम पहले किसी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज था, लेकिन अब किसी भी सूची में नहीं है।

  • पुराना वोटर आईडी नंबर देने की सुविधा: आवेदन करने वालों को अपना पिछला मतदाता पहचान पत्र नंबर दर्ज करने का विकल्प मिले, जिससे निर्वाचन अधिकारी उनकी पुरानी पंजीकरण संबंधी जानकारी की पहचान कर सकें।

अब चुनाव आयोग के फैसले पर नजर

फिलहाल, महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के प्रस्ताव पर चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि इन सुझावों को मंजूरी मिलती है, तो एसआईआर के दौरान नाम कटने वाले लोगों के दोबारा पंजीकरण की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट हो सकती है। इससे उन मतदाताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, जो पहले सूची में शामिल थे, लेकिन अब अपना नाम दोबारा जुड़वाना चाहते हैं। हालांकि, अंतिम फैसला चुनाव आयोग को लेना है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि आयोग फॉर्म 6 में बदलाव को मंजूरी देता है या नहीं।