Maharashtra Politics : महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ‘पवार प्ले’ शब्द चर्चा के केंद्र में है। लंबे समय से राजनीतिक बयानबाजी से दूरी बनाए रखने वाले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता शरद पवार अचानक दोबारा सक्रिय नजर आए हैं। अजित पवार की विमान हादसे में मौत के बाद उनकी यह सक्रियता केवल पारिवारिक शोक तक सीमित नहीं मानी जा रही। बारामती और नीरा नदी से जुड़े उनके हालिया कदमों ने यह संकेत दिया है कि शरद पवार अब भी सत्ता और संगठन की राजनीति में पूरी मजबूती से मौजूद हैं।
राजनीति में प्रतीकों के माहिर खिलाड़ी
महाराष्ट्र की राजनीति के ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले शरद पवार बीते करीब 50 वर्षों से राजनीति में दृश्य और प्रतीकों के प्रभावी इस्तेमाल के लिए जाने जाते हैं। माना जाता है कि एक तस्वीर या एक दृश्य कई राजनीतिक संदेश दे सकता है, और पवार इस रणनीति के उस्ताद रहे हैं। हालिया घटनाक्रम में भी यही देखने को मिला। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर नगर निकाय चुनावों से दूरी बनाए रखी, लेकिन जैसे ही समय अनुकूल हुआ, वे एक बार फिर सार्वजनिक रूप से सामने आ गए।
अचानक सक्रियता और बारामती पहुंचने का अर्थ
शरद पवार का अचानक टीवी स्क्रीन पर दिखाई देना और इसके तुरंत बाद बारामती पहुंचना केवल निजी या पारिवारिक शोक का मामला नहीं था। राजनीतिक जानकारों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह एक सुनियोजित राजनीतिक कदम था। बारामती, जिसे पवार परिवार का राजनीतिक गढ़ माना जाता है, वहां उनकी मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि नेतृत्व का केंद्र अभी भी कायम है। इससे यह संदेश भी गया कि एनसीपी और उससे जुड़ी राजनीति में नेतृत्व का कोई खालीपन नहीं है।
नीरा नदी दौरे के पीछे छिपा संदेश
कागजों पर शरद पवार का नीरा नदी का दौरा पर्यावरण और प्रदूषण की स्थिति की समीक्षा के लिए था। इस दौरान उन्होंने नदी की बदहाली पर नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों से तत्काल कदम उठाने की मांग की। हालांकि, अनुभवी राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस दौरे का राजनीतिक अर्थ कहीं ज्यादा गहरा था। इस उपस्थिति के जरिए पवार ने यह साफ किया कि अजित पवार के निधन के बाद भी बारामती और आसपास की राजनीति दिशाहीन नहीं हुई है।
सत्ता तंत्र को दिया स्पष्ट संकेत
नीरा नदी दौरे और बारामती में सक्रियता के माध्यम से शरद पवार ने राज्य की राजनीतिक मशीनरी को यह संदेश दिया कि वे अब भी पूरी तरह सक्रिय हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में होने वाले राजनीतिक बदलावों और संक्रमण की दिशा तय करने की क्षमता उनके पास अभी भी है। यह वही पुराना ‘पवार प्लेबुक’ है, जो समय के साथ और ज्यादा परिपक्व और प्रभावशाली होती गई है।
पहले भी ऐसे संकेत देते रहे हैं पवार
यह पहला मौका नहीं है जब शरद पवार ने इस तरह के राजनीतिक प्रतीकों का इस्तेमाल किया हो। 1990 के दशक में रक्षा मंत्री रहते हुए अरब सागर में ‘जैकस्टे’ सैन्य अभ्यास में उनकी भागीदारी हो या सतारा में मूसलाधार बारिश के बीच दिया गया भावनात्मक भाषण, हर बार उन्होंने एक मजबूत और जुझारू नेता की छवि गढ़ी है। सतारा की उस रैली ने पार्टी के टूट के दौर में एनसीपी को नई ऊर्जा दी थी।
वर्तमान परिदृश्य में पवार की रणनीति
आज, जब अजित पवार के निधन और एनसीपी के संभावित पुनर्गठन या पुनर्मिलन की चर्चाएं चल रही हैं, नीरा नदी का यह दौरा उसी पुरानी रणनीति की नई कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। शरद पवार ने एक बार फिर दिखा दिया है कि वे राजनीति के मंच से भले कुछ समय के लिए दूर रहें, लेकिन खेल की बागडोर अब भी उनके ही हाथ में है।
Read More : Pune Porsche Case में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जानें पूरा मामला










