
Maharashtra Politics : महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अजित पवार गुट के छह वरिष्ठ नेताओं की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। इस मुलाकात को पार्टी की आगे की रणनीति और महायुति सरकार में उसकी भूमिका के लिहाज से अहम माना जा रहा है। खासतौर पर वित्त मंत्रालय को लेकर चल रही चर्चाओं ने इस बैठक का राजनीतिक महत्व बढ़ा दिया है।
अमित शाह से मिले एनसीपी के छह दिग्गज नेता
जानकारी के मुताबिक, दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात करने वाले नेताओं में धनंजय मुंडे, सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल, हसन मुश्रीफ, छगन भुजबल और दिलीप वळसे पाटील शामिल हैं। ये सभी नेता एनसीपी के वरिष्ठ चेहरों में गिने जाते हैं और महाराष्ट्र की राजनीति में पार्टी की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में एक साथ इन नेताओं की दिल्ली में मौजूदगी को सामान्य मुलाकात के बजाय महत्वपूर्ण राजनीतिक गतिविधि के तौर पर देखा जा रहा है।
वित्त मंत्रालय वापस लेने की मांग पर चर्चा
इस मुलाकात को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा महाराष्ट्र सरकार में वित्त मंत्रालय के बंटवारे को लेकर है। राजनीतिक गलियारों में ऐसी चर्चा है कि एनसीपी नेताओं ने अमित शाह के सामने वित्त मंत्रालय का जिम्मा दोबारा पार्टी को सौंपने का मुद्दा उठाया। पार्टी का तर्क रहा है कि महायुति सरकार के गठन के समय वित्त विभाग एनसीपी के हिस्से में आया था। ऐसे में अब यह विभाग फिर से पार्टी को मिलना चाहिए।
अजित पवार के निधन के बाद वित्त मंत्रालय मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास है। पहले यह विभाग अजित पवार संभालते थे। वित्त मंत्रालय को लेकर एनसीपी की मांग पहले भी सामने आ चुकी है। पार्टी नेताओं का मानना है कि यह विभाग मिलने से सरकार में उसकी भूमिका मजबूत होगी। साथ ही विधायकों के क्षेत्रों में विकास कार्यों और बजट से जुड़े फैसलों में पार्टी की भागीदारी बढ़ सकती है।

सुनेत्रा और पार्थ पवार की गैर-मौजूदगी से सवाल
इस बैठक में सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार की गैर-मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को नया मोड़ दे दिया है। सुनेत्रा पवार पार्टी की प्रमुख नेता और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री हैं। वहीं पार्थ पवार भी पवार परिवार से जुड़े अहम राजनीतिक चेहरे हैं। ऐसे में पार्टी के छह वरिष्ठ नेताओं की अमित शाह से मुलाकात के दौरान इन दोनों की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, केवल किसी बैठक में मौजूद नहीं होने से पार्टी के भीतर मतभेद या नेतृत्व को लेकर विवाद की पुष्टि नहीं होती। फिर भी मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में इस घटनाक्रम को एनसीपी के अंदरूनी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी की ओर से इस मुलाकात के एजेंडे और गैर-मौजूदगी को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
देवगिरी में कोर कमेटी की बैठक पर नजर
अब सभी की नजरें मुंबई में होने वाली एनसीपी कोर कमेटी की बैठक पर टिकी हैं। जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम चार बजे मुंबई स्थित अजित पवार के आवास देवगिरी में यह बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में दिल्ली में हुई मुलाकात और वित्त मंत्रालय की मांग पर चर्चा होने की संभावना है।कोर कमेटी की बैठक में पार्टी की आगे की रणनीति, संगठनात्मक स्थिति और महायुति सरकार में उसकी भूमिका जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। बैठक के बाद नेताओं की ओर से कोई बयान आता है तो उससे पार्टी के रुख को समझने में मदद मिलेगी।
क्या वित्त मंत्रालय बनेगा एनसीपी की प्राथमिकता?
महाराष्ट्र की महायुति सरकार में भाजपा, शिवसेना और एनसीपी शामिल हैं। ऐसे में मंत्रालयों का बंटवारा गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन का अहम हिस्सा है। वित्त मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभाग को लेकर एनसीपी की मांग सरकार के सहयोगी दलों के बीच बातचीत का विषय बन सकती है। फिलहाल अमित शाह से मुलाकात और देवगिरी की बैठक के बाद ही तस्वीर अधिक साफ होने की उम्मीद है।











