Mahakal Aarti Fee : महाकालेश्वर मंदिर संध्या-शयन आरती ऑनलाइन शुल्क पर बढ़ा विवाद, सियासी घमासान तेज

क्या उज्जैन के महाकाल मंदिर में अब बिना पैसे दिए आरती में शामिल होना मुमकिन नहीं होगा? प्रशासन ने पारदर्शिता के नाम पर ₹250 का ऑनलाइन शुल्क तो लगा दिया, लेकिन कांग्रेस इसे आस्था का अपमान बता रही है। बढ़ते विरोध और सड़कों पर उतरते कार्यकर्ताओं के बीच क्या सरकार वापस लेगी यह फैसला?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 23, 2026

Mahakal Aarti Fee : श्री महाकालेश्वर मंदिर में संध्या और शयन आरती के लिए 250 रुपये प्रति व्यक्ति शुल्क और अनिवार्य ऑनलाइन बुकिंग लागू किए जाने के फैसले के बाद विरोध तेज हो गया है। मंदिर प्रबंधन इसे व्यवस्था, पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन की दिशा में उठाया गया कदम बता रहा है, जबकि विरोध कर रहे लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या अब बाबा के दरबार में प्रवेश भी टिकट आधारित होगा। कई श्रद्धालुओं और संगठनों ने इस निर्णय को धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय बताया है।

मंदिर समिति का तर्क-डिजिटलाइजेशन से व्यवस्था होगी बेहतर

मंदिर प्रबंध समिति का कहना है कि दर्शन व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और सुगम बनाने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। समिति ने डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए ‘संध्या आरती’ और ‘शयन आरती’ की बुकिंग पूरी तरह ऑनलाइन करने का फैसला किया है। प्रबंधन का दावा है कि इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से घर बैठे आरती में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित कर सकेंगे, जिससे भीड़ नियंत्रण और अव्यवस्था की समस्या कम होगी।

बुकिंग प्रक्रिया, समय और शुल्क की पूरी जानकारी

नई व्यवस्था के अनुसार, आरती की बुकिंग केवल अधिकृत वेबसाइट https://www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in/ के जरिए ही की जा सकेगी। संध्या आरती के लिए प्रतिदिन दोपहर 12 बजे से ऑनलाइन पंजीयन शुरू होगा, जबकि शयन आरती की बुकिंग शाम 4 बजे से उपलब्ध रहेगी। दोनों आरतियों के लिए प्रति श्रद्धालु 250 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है, जो ‘शीघ्र दर्शन’ के समान है। पूरी प्रक्रिया ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर संचालित होगी। समिति का कहना है कि इससे दलालों और अनियमितताओं पर रोक लगेगी।

हिंदू संगठनों ने बताया ‘जजिया कर’, जताई नाराजगी

इस फैसले के खिलाफ कुछ हिंदू संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है और इसे ‘जजिया कर’ जैसा कदम बताया है। उनका कहना है कि आरती जैसे धार्मिक अनुष्ठान पर शुल्क लगाना अनुचित है और इससे आर्थिक रूप से कमजोर श्रद्धालुओं को कठिनाई होगी। विरोध कर रहे लोगों का तर्क है कि मंदिर में पूजा-अर्चना और आरती में शामिल होना आस्था का विषय है, जिसे शुल्क से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

कांग्रेस का हमला-गरीब श्रद्धालुओं पर बोझ

मामले ने सियासी रंग भी ले लिया है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि आरती के लिए शुल्क लेना संवेदनशील विषय है और यह शर्मनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब श्रद्धालुओं को अब दर्शन के लिए अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा। पटवारी ने इसे सरकार के निर्देश पर लिया गया निर्णय बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई।

सरकार का रुख-प्रबंधन से चर्चा की बात

विवाद बढ़ने के बाद मध्य प्रदेश सरकार की ओर से भी प्रतिक्रिया आई है। सरकार में शामिल एक मंत्री ने कहा कि वे जल्द ही मंदिर प्रबंधन से चर्चा करेंगे और श्रद्धालुओं की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए शुल्क हटाने की मांग करेंगे। फिलहाल, यह मुद्दा धार्मिक आस्था और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच संतुलन का प्रश्न बन गया है, जिस पर आने वाले दिनों में और बहस होने की संभावना है।