Magh Mela Controversy 2026: प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना, अखिलेश यादव ने जताया समर्थन

प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी रोके जाने के विरोध में धरने पर बैठे हैं।

Magh Mela Controversy 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जनवरी 20, 2026

Magh Mela Controversy 2026: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में चल रहे माघ मेला 2026 में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपनी पारंपरिक पालकी यात्रा को रोक दिए जाने के विरोध में धरना शुरू कर दिया है। इस विवाद ने धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर सुर्खियां बटोरी हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शंकराचार्य से फोन पर बात कर अपना समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि वह जल्द ही प्रयागराज आएंगे और शंकराचार्य से मुलाकात कर उनके साथ खड़े होंगे।

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शंकराचार्य की नाराजगी

Magh Mela Controversy 2026
प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना

धरने पर बैठे शंकराचार्य ने अखिलेश यादव से बातचीत में कहा कि उनकी लड़ाई अभिमन्यु की तरह चक्रव्यूह में लड़ी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जब कोई बच्चा हिंदू धर्म में जन्म लेता है, तभी से उसे गंगा-यमुना में स्नान करने का अधिकार प्राप्त होता है, लेकिन प्रशासन ने इसे उनसे छीन लिया। उन्होंने इसे परंपरा और धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया।

रोकी गई पालकी यात्रा

मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अपनी पारंपरिक पालकी यात्रा के जरिए संगम स्नान के लिए जा रहे थे। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उनकी पालकी यात्रा को बीच रास्ते में रोक दिया और उन्हें वहीं उतार दिया। इसके विरोध में शंकराचार्य धरने पर बैठ गए।

अनशन और तपस्या

शंकराचार्य अपने पंडाल में नहीं बल्कि फुटपाथ पर धरने पर बैठे हैं। रविवार रात से लगातार ठंड में उन्होंने धरना शुरू किया। जानकारी के अनुसार शंकराचार्य ने 28 घंटे से कोई भोजन या पानी ग्रहण नहीं किया। सोमवार सुबह उन्होंने उसी स्थान पर पूजा और दंड तर्पण भी किया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस और शर्तें

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प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का धरना

सोमवार दोपहर शंकराचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि जब तक प्रशासनिक अधिकारी सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते, तब तक वह अपने आश्रम में प्रवेश नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि इतिहास में जब भी शंकराचार्य संगम स्नान के लिए गए हैं, वे पालकी में ही गए हैं। उन्होंने प्रण किया कि भविष्य में हर माघ मेले में प्रयागराज आएंगे, लेकिन शिविर में नहीं रुकेंगे और फुटपाथ पर ही व्यवस्था करेंगे।

राजनीतिक हलचल

अब तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी शंकराचार्य से मिलने नहीं पहुंचे हैं। इस वजह से साधु-संतों और श्रद्धालुओं में नाराजगी बढ़ रही है। विवाद राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर तूल पकड़ रहा है। अखिलेश यादव के समर्थन के बाद मामला और भी चर्चित हो गया है।

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