Magh Mela Controversy: प्रशासन मांगेगा शंकराचार्य से लिखित माफी? जानें पूरी खबर

प्रयागराज माघ मेला 2026 में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच टकराव तेज हो गया है। मौनी अमावस्या पर हुए अपमान के बाद शंकराचार्य बिना स्नान किए काशी लौट गए। अब प्रशासन लिखित माफी और विशेष प्रोटोकॉल की शर्तों पर उन्हें मनाने की कोशिश में जुटा है। क्या माघ पूर्णिमा पर होगा संगम स्नान? पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

जनवरी 30, 2026

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Magh Mela Controversy: प्रयागराज के माघ मेले में इस वर्ष आस्था के साथ-साथ एक बड़ा प्रशासनिक और धार्मिक गतिरोध उत्पन्न हो गया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और स्थानीय प्रशासन के बीच ठनी रार अब वाराणसी की गलियों तक पहुंच चुकी है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि प्रशासन अब इस विवाद को सुलझाने के लिए ‘बैकफुट’ पर नजर आ रहा है।

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अचानक प्रस्थान से प्रशासन में हड़कंप

बताते चले कि, प्रशासन को पूरी उम्मीद थी कि शंकराचार्य को माघ पूर्णिमा (1 फरवरी) तक मेले में रुकने के लिए मना लिया जाएगा। हालांकि, 28 जनवरी को अचानक उनके वाराणसी प्रस्थान ने अधिकारियों के हाथ-पांव फुला दिए हैं। शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार के अनुसार, लखनऊ के दो वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्वामी जी के संपर्क में हैं और उन्हें ससम्मान प्रयागराज वापस लाकर संगम स्नान कराने की योजना बना रहे हैं।

लिखित माफी और विशेष प्रोटोकॉल

आपको बता दे कि, वाराणसी पहुंचने के बाद शंकराचार्य ने अपनी वापसी के लिए प्रशासन के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली शर्त यह है कि जिम्मेदार अधिकारी अपने व्यवहार के लिए लिखित में माफी मांगें। दूसरी मांग भविष्य के लिए एक स्थायी समाधान की है, जिसके तहत माघ मेला, कुंभ और महाकुंभ में चारों पीठों के शंकराचार्यों के लिए स्पष्ट और घोषित प्रोटोकॉल लागू किया जाए। वर्तमान में स्वामी जी ने अपना स्नान वाराणसी में ही करने की बात कही है, जिससे प्रयागराज प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।

संगम नोज पर हुआ था हाई-वोल्टेज ड्रामा

विवाद की जड़ें 27 जनवरी को मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान हुई घटना में छिपी हैं। जब शंकराचार्य अपने रथ और पालकी के साथ संगम की ओर बढ़ रहे थे, तब पुलिस ने सुरक्षा का हवाला देते हुए उन्हें पैदल जाने को कहा। समर्थकों और पुलिस के बीच हुई धक्का-मुक्की और बदसलूकी के आरोपों ने मामले को तूल दे दिया। अपमान से आहत होकर शंकराचार्य ने संगम स्नान से इनकार कर दिया और माघ मेला क्षेत्र छोड़ने का कड़ा निर्णय लिया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी निगाहें

शंकराचार्य पक्ष का आरोप है कि प्रशासन ने माफी मांगने में जानबूझकर देरी की, जिसके कारण उन्होंने मेला क्षेत्र का परित्याग किया। आज होने वाली महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में यह स्पष्ट हो जाएगा कि क्या धर्मगुरु प्रशासन की पेशकश स्वीकार कर पुनः प्रयागराज लौटेंगे या माघ पूर्णिमा का पवित्र स्नान काशी के घाटों पर ही संपन्न होगा।

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