Magh Mela 2026: प्रयागराज में माघ मेले के दौरान पुलिस और एक संत के अनुयायियों के बीच हुई झड़प अब गंभीर रूप लेती जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना अनुमति परंपरा के खिलाफ आचरण किया गया है और पूरे मामले की जांच सीसीटीवी फुटेज के आधार पर की जाएगी।
प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश का आरोप
प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सुबह करीब 9 बजे अपने लगभग 200 अनुयायियों के साथ उस क्षेत्र में पहुंचे थे, जिसे सुरक्षा कारणों से एक दिन पहले ही बंद कर दिया गया था। उनके अनुसार, अनुयायियों ने पुलिस द्वारा लगाए गए बैरियर को तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति पैदा हो गई।
संगम नोज जाने की जिद बनी टकराव की वजह
पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद संगम नोज पर जाने पर अड़े हुए थे, जबकि उस समय वहां भारी भीड़ मौजूद थी। सुबह के समय कोहरे के कारण 9 से 10 बजे के बीच संगम क्षेत्र में सबसे अधिक भीड़ रहती है। पुलिस ने उन्हें समझाने की कोशिश की कि इतने लोगों और एक रथ के साथ आगे बढ़ना भगदड़ का कारण बन सकता है, लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी।
तीन घंटे तक अवरुद्ध रहा वापसी मार्ग
आरोप है कि स्वामी के समर्थकों ने छोटे बच्चों को आगे कर अव्यवस्था फैलाने की कोशिश की। इसके अलावा, करीब तीन घंटे तक वापसी का रास्ता पूरी तरह बंद रखा गया, जिससे आम श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान पुलिस और समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की की भी घटनाएं सामने आईं।
प्रशासन ने बताया परंपरा के खिलाफ कदम
प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि परंपरा के विपरीत स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बिना अनुमति अपनी पालकी पर सवार होकर संगम पहुंचे। उस समय संगम क्षेत्र में अत्यधिक भीड़ थी। बार-बार अनुरोध के बावजूद वे अपनी जिद पर अड़े रहे, जो प्रशासन के अनुसार गलत था। बैरियर तोड़ने और पुलिस से धक्का-मुक्की के आरोपों की जांच की जा रही है।
मंडलायुक्त ने गिनाईं गंभीर लापरवाहियां
प्रयागराज मंडल की मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने भी इस मामले को गंभीर बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बिना किसी पूर्व अनुमति के करीब 200 अनुयायियों के साथ पालकी में सवार होकर पहुंचे। संगम पर करोड़ों की भीड़ थी और इसके बावजूद बैरियर तोड़कर प्रवेश किया गया। तीन घंटे तक वापसी मार्ग अवरुद्ध रहने से जनसामान्य को भारी असुविधा हुई।प्रशासन का कहना है कि पूरे घटनाक्रम के सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध हैं। इन्हीं फुटेज के आधार पर सभी पहलुओं की जांच की जाएगी और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। अधिकारियों ने साफ संकेत दिए हैं कि नियमों का उल्लंघन किसी के लिए भी स्वीकार्य नहीं है।
धरने पर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
विवाद के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर में धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि जब तक पुलिस और प्रशासन उन्हें ससम्मान और तय प्रोटोकॉल के तहत संगम तक नहीं ले जाएगा, तब तक वे गंगा स्नान नहीं करेंगे।इस पूरे घटनाक्रम के बाद माघ मेले की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की भूमिका को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। संत, प्रशासन और श्रद्धालुओं के बीच संतुलन बनाए रखना अब प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।








