Magh Mela 2026 Controversy : योगी के मंत्री ने अविमुक्तेश्वरानंद को घेरा, बोले- भ्रम फैलाना बंद करें

उत्तर प्रदेश की राजनीति में गोवंश संरक्षण को लेकर उबाल है! स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने योगी सरकार को 40 दिन में गोहत्या बंद करने और गाय को 'राज्यमाता' घोषित करने की चुनौती दी है। पलटवार में योगी के मंत्रियों ने आरोप लगाया है कि स्वामी केवल भ्रम और अराजकता फैलाना चाहते हैं। जानिए इस विवाद के पीछे का असली एजेंडा।

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 31, 2026

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Magh Mela 2026 Controversy : प्रयागराज माघ मेला 2026 के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हुए विवाद के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। इस विवाद के बाद से अविमुक्तेश्वरानंद उत्तर प्रदेश सरकार पर लगातार हमलावर हैं। उन्होंने गोवंश संरक्षण को लेकर योगी सरकार को घेरते हुए गौमांस निर्यात पर पूरी तरह रोक लगाने और 40 दिनों के भीतर गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग की थी। उनके इन बयानों ने सियासी और धार्मिक दोनों हलकों में हलचल मचा दी।

सरकार की ओर से पहली बार सामने आई तीखी प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले में अब उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें झूठा करार दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इस दिशा में 2017 से लगातार ठोस कदम उठाए गए हैं।

‘अविमुक्तेश्वरानंद को तथ्यों की जानकारी नहीं’

कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद बिना तथ्यों की जानकारी के बयान दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनते ही सबसे पहला फैसला अवैध बूचड़खानों को बंद करने का लिया गया था। मंत्री ने आरोप लगाया कि अविमुक्तेश्वरानंद जानबूझकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं और प्रदेश में अराजकता पैदा करना चाहते हैं।

गोकशों के दबाव में बयान देने का आरोप

धर्मपाल सिंह ने अविमुक्तेश्वरानंद पर गोकशों के दबाव में काम करने का भी गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जो लोग पहले गौकशी से जुड़े थे, वही आज सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। मंत्री ने कहा कि योगी सरकार ने गौकशी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

यूपी में गौमांस और गौकशी पूरी तरह प्रतिबंधित

कैबिनेट मंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में गौमांस और गौकशी पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। उन्होंने कहा कि गौहत्या अधिनियम को और अधिक सख्त बनाया गया है और कई मामलों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत भी कार्रवाई की गई है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेश में कानूनी रूप से सुअर और बकरी के मांस का कारोबार होता है, जिसे गौमांस से जोड़कर भ्रम फैलाया जा रहा है।

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‘सरकार किसी को शंकराचार्य घोषित नहीं करती’

धर्मपाल सिंह ने यह भी कहा कि सरकार किसी को शंकराचार्य घोषित नहीं करती, क्योंकि यह कोई संवैधानिक पद नहीं है। उन्होंने बताया कि शंकराचार्य जैसे धार्मिक पद मठों और परंपराओं से जुड़े होते हैं, न कि सरकारी मान्यता से। सरकार का रुख स्पष्ट है कि किसी भी धार्मिक पद को राजनीतिक हथियार नहीं बनने दिया जाएगा।

अविमुक्तेश्वरानंद को सरकारी मान्यता न होने का दावा

मंत्री ने दो टूक कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद को सरकार ने शंकराचार्य के रूप में कोई मान्यता नहीं दी है। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति धार्मिक पद की आड़ में समाज में भ्रम फैलाने की कोशिश करता है, तो सरकार उसे किसी भी प्रकार की आधिकारिक मान्यता नहीं दे सकती।

क्या कहा था अविमुक्तेश्वरानंद ने

दरअसल, वाराणसी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने योगी सरकार को खुली चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर सरकार खुद को हिंदू सरकार मानती है, तो गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करे और गौमांस का निर्यात बंद करे। उन्होंने 40 दिनों की समयसीमा तय करते हुए कहा था कि मांग पूरी न होने पर सरकार को “छद्म हिंदू” घोषित किया जाएगा।

गोवंश संरक्षण पर सियासी और धार्मिक टकराव तेज

इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि गोवंश संरक्षण का मुद्दा अब धार्मिक आस्था और सियासी बयानबाजी के केंद्र में आ चुका है। आने वाले दिनों में इस विवाद के और गहराने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े नजर आ रहे हैं।