Magh Mela 2026: प्रयागराज में मकर संक्रांति के अवसर पर आयोजित माघ मेले में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। तापमान 7 डिग्री से नीचे होने के बावजूद लाखों श्रद्धालु सुबह-सुबह संगम तट पर स्नान के लिए पहुंचे। सुबह 4 बजे से ही लोग “जय गंगा मैया” और “हर-हर महादेव” के उद्घोष के साथ पवित्र डुबकी लगा रहे थे। प्रशासन के अनुसार सुबह 10 बजे तक 36 लाख श्रद्धालु स्नान कर चुके थे और अनुमान है कि दिनभर में डेढ़ करोड़ से अधिक लोग स्नान करेंगे।
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महाकुंभ के बाद पहला माघ मेला

महाकुंभ के बाद आयोजित यह पहला माघ मेला समाज में गहरे सांस्कृतिक बदलाव का संकेत दे रहा है। संगम की रेती पर उमड़ी भीड़ सरकार और आयोजकों के अनुमान से कहीं अधिक रही। यह भीड़ केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में हो रहे परिवर्तन का परिचायक भी है।
संगम तट पर श्रद्धालुओं की भीड़
संगम पर इतनी भीड़ रही कि पैर रखने की जगह नहीं थी। स्नान के बाद श्रद्धालु लेटे हनुमान जी के दर्शन कर रहे थे। भीड़ को देखते हुए अक्षयवट के दर्शन और नावों का संचालन फिलहाल बंद कर दिया गया है।
सुरक्षा और व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
माघ मेले में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। यूपी एटीएस समेत करीब 10 हजार पुलिसकर्मी तैनात हैं। एआई, सीसीटीवी और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। प्रशासन का अनुमान है कि इस बार मेले में 9 करोड़ से अधिक श्रद्धालु शामिल होंगे। 800 हेक्टेयर में फैले मेले को सात सेक्टरों में बांटा गया है और करीब 8 किलोमीटर में अस्थायी घाट बनाए गए हैं।
नगर निगम की तैयारी
नगर निगम ने 24×7 सफाई व्यवस्था सुनिश्चित की है। प्रकाश, शौचालय और चेंजिंग रूम की व्यवस्था की गई है। मेला क्षेत्र में 960 मेला कर्मी और 528 अतिरिक्त कर्मचारी तैनात हैं। सफाई व्यवस्था को तीन पालियों में बांटा गया है ताकि निरंतर स्वच्छता बनी रहे। साथ ही 15 स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है।
साधु-संतों की आस्था
कांटे वाले बाबा के बाद एक मौनी महाराज 1.5 किलोमीटर लेटकर स्नान करने पहुंचे। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ है, उसी तरह मथुरा और काशी में भी मंदिर निर्माण होना चाहिए। इसी कामना के साथ उन्होंने संगम में स्नान किया।
श्रद्धा और संस्कृति का संगम

फिल्म अभिनेता राजपाल यादव से लेकर शंकराचार्य पद पर विराजमान संत और तकनीकी कौशल से बड़ी कंपनियां खड़ी करने वाले युवा तक, सभी ने सनातनी संस्कारों और भारतीय संस्कृति को मजबूत करने में योगदान दिया। यहां न तो दिखावा था और न ही अनावश्यक बातचीत, केवल श्रद्धा और विश्वास का माहौल था।
वाटर लेजर शो
माघ मेले में यमुना के काली घाट पर रोज शाम को वाटर लेजर शो आयोजित किया जा रहा है। इसमें त्रिवेणी की महिमा, महाकुंभ और समुद्र मंथन की कहानी को लेजर शो के जरिए प्रस्तुत किया जा रहा है।
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