माघ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ कल से: गुप्त साधना का महापर्व, पूजा मुहूर्त और महत्व जानिए

हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। शक्ति की साधना के बगैर बाकी देवी-देवताओं की पूजा भी अधूरी मानी जाती है। ऐसे में नवरात्रि अलग-अलग रूप में साल में चार बार आती है। शारदीय और चैत्र के अलावा साल में दो बार गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है। शारदीय और चैत्र नवरात्रि में माता रानी की पूजा पूरे 9 दिन धूमधाम के साथ होती है। वहीं गुप्त नवरात्रि में उनकी साधना गुप्त रूप से की जाती है। जानिए इस साल माघ महीने वाली गुप्त नवरात्रि कब है और इसके महत्व से लेकर जानें पूजा के शुभ मुहूर्त के बारे में…

Wrriten By :

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Published On :

जनवरी 18, 2026

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हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। शक्ति की साधना के बगैर बाकी देवी-देवताओं की पूजा भी अधूरी मानी जाती है। ऐसे में नवरात्रि अलग-अलग रूप में साल में चार बार आती है। शारदीय और चैत्र के अलावा साल में दो बार गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है। शारदीय और चैत्र नवरात्रि में माता रानी की पूजा पूरे 9 दिन धूमधाम के साथ होती है। वहीं गुप्त नवरात्रि में उनकी साधना गुप्त रूप से की जाती है। जानिए इस साल माघ महीने वाली गुप्त नवरात्रि कब है और इसके महत्व से लेकर जानें पूजा के शुभ मुहूर्त के बारे में…

पूजा का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार माघ माह के गुप्त नवरात्रि की शुरुआत कल यानी 19 जनवरी से होने वाली है। इसका समापन 27 जनवरी को है। इस दौरान घट स्थापना के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त 19 जनवरी की सुबह 6 बजकर 43 मिनट से लेकर 10 बजकर 24 मिनट तक है। वहीं अभिजीत मुहूर्त की बात करें तो ये सुबह 11 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 36 मिनट तक रहने वाला है।

गुप्त नवरात्रि का महत्व
गुप्त नवरात्रि का संबंध 10 महाविद्या की साधना से जुड़ा है। माघ के महीने में मनाई जाने वाली गुप्त नवरात्रि ठंड के दिनों में होती है। बसंत ऋतु के आगमन के दौरान ही ये पूजा होती है। ये तंत्र-मंत्र और गुप्त सिद्धियों के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा और उनकी 10 महाविद्याओं को पूजने से जिंदगी की बाधाएं खत्म होती हैं और हर मनोकामना की पूर्ति होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान की गई पूजा जितनी गुप्त रखी जाए, वो उतनी ही सफल होती है।

गुप्त नवरात्रि की पूजा विधि
गुप्त नवरात्रि के पहले दिन स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहन लें। इसके बाद पूजा घर की सफाई करें। मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति के आगे दीया जलाएं। फूल और अक्षत अर्पित करें। इस दौरान मां दुर्गा के सभी मत्रों का जाप मन ही मन करें। माना जाता है कि इस दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करना फलदायी होता है। पाठ के बाद आरती करें और किसी भी भूलचूक के लिए मां से माफी मांगकर उनका आशीर्वाद लें।

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