Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के सिरोंज में इंसान और एक पालतू जानवर के बीच लगाव की ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। भवानी नगर मोहल्ले के रहने वाले किसान नवल सिंह मालवीय ने अपनी पालतू बकरी ‘कटोरी उर्फ चमेली’ की मौत के बाद उसे परिवार के सदस्य की तरह विदाई दी। उन्होंने न सिर्फ बकरी का पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कराया, बल्कि उसकी अस्थियों को गंगा में विसर्जित करने के बाद बाकायदा तेरहवीं भी आयोजित की।
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20 साल तक परिवार का हिस्सा रही ‘कटोरी’
नवल सिंह के मुताबिक, उन्होंने ‘कटोरी’ को करीब 20 वर्षों तक अपने परिवार का हिस्सा बनाकर रखा। इतने लंबे समय में बकरी के साथ उनका रिश्ता महज मालिक और पालतू जानवर का नहीं रहा, बल्कि वह घर के एक सदस्य जैसी बन गई थी। नवल बताते हैं कि कटोरी घर में परिवार के साथ रहती थी और यहां तक कि पलंग पर भी सोती थी।
3 अगस्त को जब कटोरी ने आखिरी सांस ली तो नवल सिंह और उनके परिवार को ऐसा लगा जैसे घर का ही कोई सदस्य उनसे हमेशा के लिए बिछड़ गया हो। इसी भावनात्मक जुड़ाव के चलते उन्होंने तय किया कि कटोरी को भी वही सम्मान दिया जाएगा, जो किसी अपने को अंतिम विदाई देते समय दिया जाता है।
प्रशासन की अनुमति लेकर कराया अंतिम संस्कार
बकरी की मौत के बाद नवल सिंह ने प्रशासन से आवश्यक अनुमति ली और उसके बाद पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कराया। इसके बाद परिवार अस्थियां लेकर गंगा नदी तक पहुंचा, जहां विधि-विधान के साथ उनका विसर्जन किया गया। नवल सिंह का कहना है कि कटोरी उनके लिए सिर्फ एक बकरी नहीं थी। वह वर्षों तक परिवार के बीच रही और सुख-दुख की साथी बनी। इसलिए उसकी विदाई भी परिवार के किसी सदस्य की तरह करना उनके लिए भावनात्मक जिम्मेदारी थी।
शोक पत्रिका छपवाकर लोगों को दिया न्योता
कटोरी की याद में 15 अगस्त को तेरहवीं का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम को लेकर नवल सिंह ने बाकायदा शोक पत्रिका छपवाई और रिश्तेदारों, परिचितों तथा आसपास के लोगों को आमंत्रित किया। तेरहवीं के मौके पर करीब 500 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में पहुंचे और परिवार के साथ खड़े होकर कटोरी को श्रद्धांजलि दी। पूरे आयोजन ने इलाके में लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
लोगों ने कहा- जानवर भी परिवार का हिस्सा होते हैं
नवल सिंह के इस कदम की आसपास के लोगों और रिश्तेदारों ने जमकर सराहना की। लोगों का कहना था कि आज के दौर में जहां कई बार इंसानों को भी अपनों का साथ और सम्मान नहीं मिल पाता, वहीं एक किसान ने अपने पालतू पशु के प्रति वर्षों के प्रेम और लगाव को जिस तरह निभाया, वह इंसानियत और संवेदनशीलता की मिसाल है।
कटोरी की तेरहवीं में शामिल हुए लोगों ने परिवार को ढांढस बंधाया और उनके भावनात्मक लगाव की सराहना की। सिरोंज की यह कहानी बताती है कि प्यार और अपनापन केवल इंसानों तक सीमित नहीं होता। कभी-कभी एक बेजुबान जानवर भी परिवार के जीवन में ऐसी जगह बना लेता है, जिसकी कमी उसके जाने के बाद लंबे समय तक महसूस होती रहती है।
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