रक्षा उत्पादन में एमपी की बड़ी भूमिका, भारतीय सेना को मिलेंगे 10 ‘अजेय’ टैंक

जबलपुर भारतीय सेना के मुख्य युद्धक दो टी-72 टैंक की मैकेनिकल ओवरहालिंग का कार्य वीकल फैक्ट्री जबलपुर (VFJ) में पूरा कर लिया गया है। अब इसे रोल-ऑन प्रक्रिया के लिए तैयार किया जा रहा है, जो सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी की जाएगी। इसके बाद टैंक को अंतिम परीक्षण के लिए हैवी व्हीकल फैक्ट्री, आवडी (चेन्नई) भेजा जाएगा। टेस्टिंग में सफलता मिलने पर वीएफजे को 10 टी-72 टैंकों (T-72 Tanks) की नई खेप मिलने की संभावनाएं प्रबल हो जाएंगी। 2023 के दौरान कार्य में हुई थी भारी कमी रक्षा कंपनी आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड के अंतर्गत आने

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Published On :

जनवरी 21, 2026

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जबलपुर
भारतीय सेना के मुख्य युद्धक दो टी-72 टैंक की मैकेनिकल ओवरहालिंग का कार्य वीकल फैक्ट्री जबलपुर (VFJ) में पूरा कर लिया गया है। अब इसे रोल-ऑन प्रक्रिया के लिए तैयार किया जा रहा है, जो सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी की जाएगी। इसके बाद टैंक को अंतिम परीक्षण के लिए हैवी व्हीकल फैक्ट्री, आवडी (चेन्नई) भेजा जाएगा। टेस्टिंग में सफलता मिलने पर वीएफजे को 10 टी-72 टैंकों (T-72 Tanks) की नई खेप मिलने की संभावनाएं प्रबल हो जाएंगी।

2023 के दौरान कार्य में हुई थी भारी कमी
रक्षा कंपनी आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड के अंतर्गत आने वाली वीएफजे में वर्ष 2023 के दौरान कार्य की भारी कमी हो गई थी। 1500 करोड़ रुपए तक उत्पादन क्षमता वाली फैक्ट्री के पास उस समय मात्र 500-600 करोड़ रुपए का कार्य शेष था। ऐसे में फैक्ट्री प्रबंधन भविष्य को ने देखते हुए टी-72 टैंक मेंटेनेंस, रिपेयरिंग एंड ओवरहालिंग (एमआरओ) परियोजना पर काम शुरू किया।
 
इस परियोजना के तहत कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण के लिए चेन्नई भेजा गया, जहां उन्होंने टी-72 टैंक की ओवरहालिंग की तकनीकी बारीकियां सीखी। अप्रैल 2025 में बीएफजे को दो टी-72 टैंक प्राप्त हुए थे थे, जिनकी मैकेनिकल ओवरहालिंग दिसंबर 2025 में पूरी कर ली गई है।

दो चरणों में हो रहा ओवरहालिंग कार्य
पहले चरण में टैंक के टरेट और हल की ओवरहालिंग की गई। टरेट टैंक का ऊपरी हिस्सा होता है, जिस पर गन माउंट रहती है और जो 360 डिग्री घूमने में सक्षम होती है। वहीं हल वह आधार होता है, जिस पर पूरा टैंक निर्भर रहता है। दूसरे चरण में टैंक के अंदरूनी और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की मरम्मत व बदलाव किया जाएगा।
 
टी-72 टैंक को सोवियत संघ में डिजाइन और निर्मित किया गया था। भारत ने 1970 के दशक में इसे आयात किया और बाद में हैवी व्हीकल फैक्ट्री, आवडी में इसका स्वदेशी निर्माण और उन्नयन शुरू हुआ। 'अजेय टैंक' के नाम से पहचाना जाने वाला टी-72 आज भी भारतीय सेना के टैंक बेड़े की रीढ़ है।  

चेन्नई में होगा प्रशिक्षण- जनसंपर्क अधिकारी
टी-72 टैंक की मैकेनिकल ओवरहालिंग का कार्य पूरा हो चुका है। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से निरीक्षण के बाद इसे टेस्टिंग के लिए चेन्नई भेजा जाएगा। इसके पश्चात भविष्य में 10 नए टैंकों की खेप मिलने की उम्मीद है, जिनमें मैकेनिकल के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की ओवरहालिंग भी की जाएगी। -हर्ष भटनागर, जनसंपर्क अधिकारी, वीएफजे

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