Lucknow Flood: लखनऊ में गोमती का रौद्र रूप, 30 करोड़ की सामग्री बही, कई इलाके जलमग्न

लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। फैजुल्लागंज समेत कई इलाकों में पानी घरों तक पहुंच गया है। निर्माण स्थल पर करोड़ों की सामग्री बह गई, जबकि स्टेडियम और खेत भी जलमग्न हैं। प्रशासन ने 30 नावें, राहत कैंप और बचाव दल तैनात कर प्रभावित लोगों की मदद तेज कर दी है।

Lucknow Flood

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 4, 2026

Lucknow Flood: लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से राजधानी के कई इलाकों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति गंभीर बनी हुई है। फैजुल्लागंज समेत कई क्षेत्रों में पानी घरों की दहलीज तक पहुंच गया है। नदी का पानी अब रिहायशी इलाकों के साथ निर्माण स्थलों, खेल परिसरों और सड़कों तक पहुंच चुका है। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव कार्य तेज किए गए हैं।

गोमती बाढ़ से लखनऊ में 30 करोड़ की निर्माण सामग्री बही

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बताते चले कि, गोमतीनगर में लामार्टिनियर कॉलेज के पीछे एलडीए के जी-2 फ्लाईओवर का निर्माण चल रहा है। बढ़ते जलस्तर के कारण यहां निर्माण सामग्री रखने वाले स्टोर और अस्थायी कमरों में अचानक पानी घुस गया। कार्यदायी संस्था एनसीसी के स्टोर मैनेजर मंतोष श्रीवास्तव के मुताबिक, पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि कर्मचारियों को सामान बाहर निकालने तक का मौका नहीं मिला। इससे करीब 30 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।

फ्लाईओवर निर्माण स्थल पर डीजल, सिलिंडर और मशीनें पानी में डूबी

बाढ़ के पानी में करीब 10 करोड़ रुपये की शटरिंग, पांच हजार लीटर डीजल, 12 ऑक्सीजन सिलिंडर, ऑयल और लुब्रिकेंट के 20 ड्रम समेत राशन, गैस सिलिंडर और सरिया बह गए। इसके अलावा पांच जेनरेटर और एक डीजल टैंकर भी पानी में डूब गया। अचानक आई बाढ़ ने निर्माण स्थल पर भारी नुकसान पहुंचाया है।

गोमती नदी का पानी सेज क्रिकेट स्टेडियम में घुसा

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गोमती का पानी सेज क्रिकेट स्टेडियम के परिसर में भी पहुंच गया है। शुक्रवार को पूरा मैदान पानी से भर गया, जिसके बाद सेज क्रिकेट एकेडमी को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। मैदान में पानी जमा होने के कारण खिलाड़ियों का अभ्यास प्रभावित हुआ है। पानी निकालने के लिए तीन पंपिंग सेट लगाए गए हैं। लंबे समय तक जलभराव रहने पर पिच और मैदान को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

इकाना स्टेडियम और गोमती ग्रींस में भी बढ़ा बाढ़ का खतरा

इकाना स्टेडियम के बाहर तक पानी पहुंच गया है। पानी को स्टेडियम परिसर में प्रवेश करने से रोकने के लिए नाले को मिट्टी डालकर बंद किया गया है। दूसरी ओर गोमती का पानी नाले के रास्ते एमार गोमती ग्रींस की तरफ बढ़ रहा है। तेज बहाव के कारण सड़क पर भी पानी जमा हो गया है। सोसाइटी के निवासियों ने प्रशासन से जलस्तर की निगरानी, बिजली उपकेंद्र की सुरक्षा और आपदा राहत टीमों के संपर्क नंबर उपलब्ध कराने की मांग की है।

गोमती नदी सामान्य स्तर से 2.44 मीटर ऊपर पहुंची

गोमती नदी का जलस्तर सामान्य से करीब 2.44 मीटर यानी लगभग आठ फीट ऊपर पहुंचकर 108.14 मीटर दर्ज किया गया है। शनिवार को हनुमत धाम मंदिर परिसर तक पानी पहुंच गया। प्राचीन शनि देव मंदिर और लक्ष्मण मेला मैदान के आसपास भी जलभराव हो गया। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए रिवरफ्रंट की फूड वैली को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।

फैजुल्लागंज में 200 से ज्यादा घर प्रभावित

गोमती के उफान से फैजुल्लागंज में 200 से अधिक घर प्रभावित हुए हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बैराज के सभी 10 गेट खोल दिए गए हैं, जिससे पानी को डाउनस्ट्रीम की ओर निकालने में मदद मिलेगी। नदी का पानी शहर के ड्रेनेज नेटवर्क में वापस न आए, इसके लिए 48 आउटलेट बंद किए गए हैं। सिंचाई विभाग के अनुसार, ऊपरी जिलों से लगातार पानी आने के कारण बारिश रुकने के बावजूद गोमती का जलस्तर बढ़ रहा है।

बीकेटी के गांवों में राहत-बचाव के लिए 30 नावें तैनात

गोमती नदी की बाढ़ से बीकेटी तहसील के लासा, बहादुरपुर, सुल्तानपुर और अकड़िया मऊ समेत कई गांव प्रभावित हैं। कुछ इलाकों में पानी थोड़ा कम हुआ है, लेकिन ग्रामीणों की मुश्किलें बनी हुई हैं। आवागमन और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 30 नावें लगाई गई हैं। प्रशासन ने चार राहत शिविर और सहायता केंद्र भी बनाए हैं, जहां प्रभावित लोगों को भोजन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

डीएम ने नाव से बाढ़ प्रभावित इलाकों का किया निरीक्षण

जिलाधिकारी विशाख जी ने लगातार दूसरे दिन संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार के साथ नाव से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं और राहत कार्यों की स्थिति देखी। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

बाढ़ राहत शिविरों में भोजन, दवाएं और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था

राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों को पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। परिवारों को राहत किट भी वितरित की जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने प्रभावित गांवों में पहुंचकर आवश्यक दवाएं और क्लोरीन की गोलियां बांटी हैं। पशुपालन विभाग की ओर से पशुओं के लिए हरा चारा और भूसा उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि पशु चिकित्सकों की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में उपचार कर रही हैं।

बाढ़ में फंसे बुजुर्ग की बाल-बाल बची जान

अकड़िया गांव की सड़क पर भी बाढ़ का पानी भर गया है। बहादुरपुर गांव के बुजुर्ग पांचू पांच भैंसों को रस्सी से बांधकर करीब पांच फीट गहरे पानी से बाहर निकल रहे थे। इसी दौरान भैंसों के रास्ता बदलने से वह गहरे पानी में डूबने लगे, लेकिन ग्रामीणों की मदद से उनकी जान बच गई। प्रभावित गांवों में फसलें भी कई फीट पानी में डूबी हुई हैं।

माल में सैकड़ों बीघे धान और सब्जियों की फसल बर्बाद

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माल क्षेत्र के बसहरी और बहरौरा गांवों में भी गोमती के बढ़े जलस्तर का असर दिखाई दे रहा है। धान की तैयार फसल के साथ उड़द, सब्जी और चारे के खेत पानी में डूब गए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, सैकड़ों बीघे फसल जलमग्न हो चुकी है। कई घरों और दुकानों में भी पानी प्रवेश कर गया है, जिससे ग्रामीणों को सामान और पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा।

दुबग्गा में राहत-बचाव कैंप और नावें तैनात

दुबग्गा के लालजी टंडन वार्ड के सैथा और आसपास के गांवों में भी जलभराव की स्थिति गंभीर है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में तीन राहत-बचाव कैंप लगाए हैं और तीन नावें तैनात की हैं। सैंथा, दौलतखेड़ा, गुलमीखेड़ा, सुखलालखेड़ा, उमरावखेड़ा और जेहटा रोड स्थित हयातनगर मोड़ के ग्रामीण भी बाढ़ से प्रभावित हैं। इन इलाकों में करीब 500 बीघे से अधिक धान और सब्जियों की फसल पानी में डूबने की सूचना है।