Lucknow Flood: यूपी की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के उफान पर आने से शहर के कई इलाकों में हाहाकार मचा हुआ है. नदी का जलस्तर बढ़ने से शहर के कई प्रमुख इलाके जलमग्न हो गए है. इकाना स्टेडियम की जीरो नंबर पार्किंग और मशहूर प्लासियो मॉल तक बाढ़ का पानी पहुंच चुका है, जिससे हजारों लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ट्रैफिक विभाग ने अलर्ट जारी किया है. इकाना स्टेडियम से प्लासियो मार्ग पर पानी भरने से यातायात धीमा पड़ गया है. यातायात पुलिस मौके पर मुस्तैद है और सुरक्षित आवागमन के लिए लगातार व्यवस्थाएं कर रही है। प्रशासन ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे सावधानी बरतें, गति नियंत्रित रखें और उस मार्ग पर अनावश्यक रूप से रुकने से बचें.
इकाना स्टेडियम से प्लासियो मार्ग पर यातायात प्रभावित

बताते चले कि, गोमती नदी का पानी इकाना स्टेडियम से प्लासियो की तरफ जाने वाले मार्ग तक पहुंचने के बाद यातायात की रफ्तार धीमी हो गई है। लखनऊ ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों के लिए अलर्ट जारी करते हुए सावधानी बरतने की अपील की है। यातायात पुलिस की टीम मौके पर मौजूद है और वाहनों की सुरक्षित आवाजाही के लिए जरूरी व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे गति नियंत्रित रखें और अनावश्यक रूप से प्रभावित मार्ग पर रुकने से बचें।
लखनऊ बाढ़ राहत अभियान में नगर निगम की टीमें सक्रिय

आपकी जानकारी के लिए बात दे कि, गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित इलाकों में लखनऊ नगर निगम ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। जोन-3 और जोन-6 की टीमें लगातार प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रही हैं। दाउदनगर, मामा कॉलोनी, लोहरामऊ और मिल्लतनगर समेत कई इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। प्रभावित परिवारों को भोजन, पेयजल, दवाएं और जरूरत के मुताबिक आश्रय उपलब्ध कराने का काम भी जारी है।
90 नावों से रेस्क्यू, राहत सामग्री पहुंचाने का काम जारी
जिला प्रशासन की करीब 90 नावों के जरिए प्रभावित क्षेत्रों में रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। इन नावों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ-साथ भोजन, पानी और अन्य जरूरी राहत सामग्री भी पहुंचाई जा रही है। जलभराव वाले इलाकों में फंसे बच्चों और स्थानीय नागरिकों को प्राथमिकता के आधार पर बाहर निकाला जा रहा है। प्रशासन और नगर निगम की टीमें लगातार संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण कर रही हैं।
लखनऊ बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी और भोजन की व्यवस्था

राहत अभियान के तहत प्रभावित लोगों तक भोजन, पेयजल और दवाएं पहुंचाई जा रही हैं। जोन-6 के अलग-अलग क्षेत्रों में भोजन के पैकेट वितरित किए गए हैं। दाउदनगर, लोहरामऊ और मिल्लतनगर में करीब 14 से 15 पानी के टैंकर लगाए गए हैं। प्रशासन के मुताबिक अब तक लगभग 80 हजार लीटर पैकेज्ड पानी लोगों तक पहुंचाया जा चुका है। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में 13 मोबाइल टॉयलेट भी लगाए गए हैं। दाउदनगर में रात के राहत कार्यों को आसान बनाने के लिए करीब 65 अतिरिक्त स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं।
200 सफाईकर्मी तैनात, जलभराव के बाद सफाई की तैयारी
लखनऊ में बाढ़ का पानी उतरने के बाद संक्रमण और गंदगी की समस्या से निपटने के लिए नगर निगम ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। यादव चौराहे से मामा कॉलोनी तक करीब 200 सफाईकर्मियों की टीम तैनात की गई है। प्रभावित इलाकों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जा रहा है। पानी उतरने के बाद क्षेत्रवार विशेष टीमें कीचड़, कचरे और गंदगी की सफाई के साथ सैनिटाइजेशन और बीमारी की रोकथाम का अभियान चलाएंगी।
138 एकड़ में ड्रोन से एंटी लार्वा का छिड़काव
बाढ़ के बाद मच्छरों के प्रजनन और संक्रमण का खतरा बढ़ने की आशंका को देखते हुए नगर निगम ने एंटी लार्वा अभियान भी तेज कर दिया है। जोन-3 और जोन-6 में कुल 138 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन के जरिए दवा का छिड़काव किया गया है। इसमें जोन-3 का 76 एकड़ और जोन-6 का 62 एकड़ क्षेत्र शामिल है। इसके अलावा छह मैनुअल और छह बड़ी फॉगिंग मशीनों से भी लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
नाव और स्टीमर से लगातार राहत-बचाव अभियान

दाउदनगर, लोहरामऊ और मिल्लतनगर में राहत सामग्री की लोडिंग और अनलोडिंग के लिए नगर निगम के कर्मचारियों को लगाया गया है। जोन-6 के दौलत खेड़ा, मुन्नू खेड़ा, सैंथा, टांड खेड़ा, सुखलाल खेड़ा, गुलमी खेड़ा और हयातगंज में नावों और स्टीमर के जरिए लोगों की आवाजाही और राहत सामग्री पहुंचाने का काम जारी है। प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ पशुओं के लिए भूसे की भी व्यवस्था की गई है।
लखनऊ में प्रशासन की नजर
नगर आयुक्त ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर अधिकारियों को राहत, पेयजल, भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और रेस्क्यू अभियान को लगातार जारी रखने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का फोकस फिलहाल प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर है। वहीं, गोमती नदी के जलस्तर और जलभराव वाले क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।








