Lucknow Flood: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी की बाढ़ से कई इलाकों में हालात गंभीर बने हुए हैं. बाढ़ ने भारी तबाही मचाते हुए हजारों लोगों को बेघर कर दिया है. शहर के निचले और आधुनिक इलाकों में जलभराव के कारण लाखों लोग गंभीर संकट का सामना कर रहे है. बाढ़ आए हुए दस दिन बीत चुके हैं, लेकिन हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं. गोमती नगर विस्तार के सेक्टर सात में इकाना स्टेडियम के पीछे लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पूरी तरह पानी में डूब चुका है. पानी के बहाव को नियंत्रित करने के लिए सड़क पर मिट्टी का अस्थायी बांध बनाया गया है, जिससे प्रशासन की तैयारियों की पोल खुल गई है.
जलभराव से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा

बताते चले कि, गोमती नगर विस्तार, इकाना स्टेडियम और पलासियो मॉल के आसपास जलभराव से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर पानी भरने से लोगों को घर छोड़कर होटल और रिश्तेदारों के यहां शरण लेनी पड़ी। बाढ़ के कई दिन बाद भी प्रभावित इलाकों में राहत और पानी की निकासी बड़ी चुनौती बनी हुई है। सड़कों पर पानी भरने और नाव चलने के वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में है।
इकाना स्टेडियम और पलासियो मॉल में दोबारा भरा पानी

आपको बता दे कि, गोमती नगर विस्तार के सेक्टर-7 में बुधवार रात पानी निकालने के लिए किए गए प्रयासों के बाद गुरुवार सुबह फिर जलभराव की स्थिति बन गई। बताया गया कि सुबह करीब आठ बजे पानी रोकने के लिए बंद कराया गया नाले का हिस्सा दोबारा टूट गया। इसके बाद इकाना स्टेडियम, पलासियो मॉल, आपदा प्रबंधन विभाग, मर्क्योर होटल और टेंडर पाम हॉस्पिटल के आसपास पानी फिर फैलने लगा। एलडीए का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी पानी में डूब गया। नाला टूटने से पानी तेजी से आसपास के इलाकों में पहुंचा। इससे प्रशासन और लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के सामने जलभराव को नियंत्रित करने की चुनौती बढ़ गई।
LDA ने संभाला मोर्चा, पानी निकालने के लिए लगाए 26 पंप

हालात बिगड़ने के बाद एलडीए की टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव का काम तेज किया। एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार और सचिव सुशील प्रताप सिंह ने भी प्रभावित इलाके का निरीक्षण किया। नाले के टूटे हिस्से को मिट्टी और बोल्डर डालकर बंद करने का प्रयास किया गया, ताकि पानी आगे न फैल सके। इसके बाद जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने का अभियान तेज किया गया। इसके लिए 26 पंप लगाए गए। पंपों की मदद से प्रभावित क्षेत्रों से पानी निकालने का काम शुरू हुआ। हालांकि, बार-बार पानी भरने की समस्या ने इलाके में स्थायी जल निकासी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बिल्डरों को नोटिस, बांध निर्माण शुल्क की होगी वसूली
गोमती नगर विस्तार और सुल्तानपुर रोड के नदी किनारे बसे इलाकों में जलभराव के बाद एलडीए ने सुरक्षा बांध के निर्माण और उससे जुड़े शुल्क की समीक्षा की। प्राधिकरण के अनुसार, नदी के कैचमेंट और तटीय क्षेत्रों में विकसित कई आवासीय योजनाओं के लिए सुरक्षा बांध बनाया जाना था। इसके लिए बिल्डरों से शुल्क तय किया गया था, लेकिन कई डेवलपर्स ने अब तक पूरा पैसा जमा नहीं किया।

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने अधिकारियों को बकाया शुल्क की वसूली के लिए आरसी जारी करने और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। प्राधिकरण का कहना है कि शुल्क जमा नहीं होने से बांध निर्माण का काम प्रभावित हुआ। अब सवाल यह है कि बकाया वसूली के साथ सुरक्षा बांध का काम कब पूरा होगा।
सुरक्षा बांध की अधूरी योजना भी चर्चा में
लखनऊ में गोमती की बाढ़ से हुए जलभराव के बीच सुरक्षा बांध की अधूरी योजना भी चर्चा में है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, गोमती नगर विस्तार के सेक्टर-7 से इकाना स्टेडियम की ओर करीब 2.5 किलोमीटर लंबा बांध बनाने की योजना वर्ष 2012-13 में तैयार की गई थी। इसके लिए एलडीए ने सिंचाई विभाग को 36 करोड़ रुपये भी उपलब्ध कराए थे।

बताया गया है कि सिंचाई विभाग ने वर्ष 2015 में इसके लिए टेंडर जारी किया था, लेकिन इसके बावजूद निर्माण शुरू नहीं हो सका। करीब 11 साल बाद भी योजना अधूरी रहने से बांध के निर्माण और विभागीय जिम्मेदारी पर सवाल उठ रहे हैं। यदि समय पर निर्माण पूरा हुआ होता, तो क्या इस बार जलभराव का असर कम हो सकता था, यह भी चर्चा का विषय है।
गोमती की बाढ़ से कई इलाके प्रभावित
गोमती का जलस्तर बढ़ने के बाद इकाना स्टेडियम, पलासियो मॉल, पुलिस मुख्यालय, सरसावां, आईटी सिटी, ट्रिपल आईटी, एचसीएल और आसपास की कई टाउनशिप में जलभराव की समस्या सामने आई। कई आवासीय सोसायटियों के बेसमेंट और निचले हिस्सों में पानी भर गया। सड़कों पर आवागमन प्रभावित हुआ और लोगों को रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में भी परेशानी हुई।
इस घटना ने लखनऊ में बाढ़ से बचाव, जल निकासी और नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े किए हैं। अब प्रभावित लोगों को राहत देने के साथ-साथ अधूरे बांध का निर्माण पूरा करना और भविष्य में ऐसे हालात से बचने के लिए ठोस व्यवस्था करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।










