Bulldozer Action : लखनऊ में वकीलों के चैंबर पर चला बुलडोजर, अवैध निर्माण के खिलाफ नगर निगम का बड़ा एक्शन

Lucknow Bulldozer Action: लखनऊ में हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम ने जिला कोर्ट के आसपास बने कथित अवैध वकीलों के चैंबर और अन्य निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू की। अभियान के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन और रास्तों से अतिक्रमण हटाया जा रहा है।

Bulldozer Action

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 30, 2026

Bulldozer Action : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रविवार को अवैध रूप से बनाए गए वकीलों के चैंबरों के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम की टीम ने कोर्ट और सरकारी कार्यालयों के आसपास बने अवैध निर्माणों को हटाना शुरू किया। कार्रवाई के दौरान किसी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई के चलते इलाके में दिनभर हलचल बनी रही।

डीएम ऑफिस के बाहर कब्जा कर बनाए गए थे चैंबर

बताया जा रहा है कि लखनऊ में डीएम कार्यालय, सेशन कोर्ट, पुराने हाईकोर्ट और रजिस्ट्री कार्यालय के आसपास कई चैंबर लंबे समय से बने हुए थे। इनमें से कई निर्माण कथित तौर पर सड़क, फुटपाथ और नालियों की जमीन पर कब्जा करके किए गए थे। प्रशासन की ओर से इन निर्माणों को अवैध मानते हुए पहले नोटिस जारी किए गए थे। रविवार को इन्हीं चिन्हित निर्माणों के खिलाफ नगर निगम की टीम ने कार्रवाई शुरू की।

शाम करीब पांच बजे पहुंची नगर निगम की टीम

रविवार शाम करीब पांच बजे आधा दर्जन से अधिक बुलडोजर लखनऊ के रजिस्ट्री ऑफिस क्षेत्र में पहुंचे। इसके बाद नगर निगम के कर्मचारियों ने चिह्नित अवैध चैंबरों को गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी। मामला वकीलों से जुड़े निर्माणों का होने के कारण प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सावधानी बरती। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में बुलडोजर से एक-एक करके अवैध ढांचों को हटाया गया।

हाईकोर्ट ने 72 अवैध चैंबर हटाने का दिया था आदेश

इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश से जुड़ी है। कोर्ट ने लखनऊ नगर निगम को कोर्ट परिसर के आसपास मौजूद 72 अवैध चैंबरों को हटाने का निर्देश दिया था। इसके लिए 30 अगस्त तक की समयसीमा निर्धारित की गई थी। आदेश के बाद प्रशासन ने चिन्हित निर्माणों पर कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी। मामला आगे सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा, लेकिन वहां से वकीलों को राहत नहीं मिली।

100 से ज्यादा चैंबरों पर लगाए गए थे नोटिस

नगर निगम ने कार्रवाई से पहले डीएम कार्यालय, सेशन कोर्ट, पुराने हाईकोर्ट और रजिस्ट्री कार्यालय के आसपास मौजूद 100 से अधिक चैंबरों को चिन्हित किया था। इन निर्माणों पर लाल निशान लगाए गए और नोटिस भी चस्पा किए गए। प्रशासन की ओर से कहा गया कि कई चैंबर सार्वजनिक रास्तों, फुटपाथ और नालियों पर अतिक्रमण करके बनाए गए हैं। इसके अलावा इलाके में कुछ ऐसी दुकानों की भी पहचान की गई, जिनके निर्माण को नियमों के विपरीत बताया गया।

29 अगस्त तक खुद कब्जा हटाने का दिया गया था मौका

नगर निगम ने संबंधित लोगों को तत्काल कार्रवाई से पहले अपना अतिक्रमण स्वयं हटाने का अवसर भी दिया था। नोटिस में 29 अगस्त तक अवैध कब्जा हटाने की समयसीमा दी गई थी। इसके बाद कई लोगों ने खुद ही अपने चैंबर खाली करना शुरू कर दिए। कुछ वकीलों ने चैंबरों से मेज, कुर्सियां, दस्तावेज, एसी और अन्य जरूरी सामान बाहर निकाल लिया था। हालांकि, कई निर्माण अब भी कार्रवाई के दायरे में बने हुए थे।

बुलडोजर कार्रवाई से पहले बड़ी संख्या में जुटे वकील

रविवार को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू होने से पहले ही कोर्ट के आसपास बड़ी संख्या में वकील सड़कों पर जमा हो गए थे। प्रशासन की कार्रवाई को लेकर इलाके में तनाव की स्थिति बनने की आशंका के चलते पुलिस बल को तैनात रखा गया। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी पूरे अभियान के दौरान स्थिति पर नजर बनाए रहे। अधिकारियों की कोशिश रही कि कार्रवाई निर्धारित प्रक्रिया के तहत पूरी की जाए और कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।

मई में भी हुआ था अतिक्रमण हटाने का अभियान

लखनऊ में अवैध चैंबरों को हटाने की कार्रवाई पहली बार नहीं हुई है। इससे पहले मई में भी हाईकोर्ट के आदेश के तहत प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया था। उस दौरान बड़ी संख्या में वकीलों ने कार्रवाई का विरोध किया था। विरोध के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी और पुलिस को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। उस समय पत्थरबाजी की घटना सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और ज्यादा कड़ी करनी पड़ी थी।

सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद कार्रवाई तेज

हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी गई थी। हालांकि, वहां से संबंधित वकीलों को कोई राहत नहीं मिलने के बाद नगर निगम के लिए कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया। प्रशासन ने तय समयसीमा के अनुसार अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। रविवार की कार्रवाई को इसी न्यायिक आदेश के अनुपालन के तौर पर देखा जा रहा है।

सार्वजनिक जमीन पर अतिक्रमण हटाने का प्रशासन का तर्क

प्रशासन का मुख्य जोर सार्वजनिक उपयोग वाली जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने पर है। सड़क, फुटपाथ और नालियों पर बने अवैध निर्माणों के कारण आम लोगों को परेशानी होने की बात सामने आई थी। नगर निगम की कार्रवाई के बाद अब इन स्थानों को दोबारा सार्वजनिक उपयोग के लिए उपलब्ध कराने की तैयारी है। हालांकि, अभियान के दौरान वकीलों की मौजूदगी और पहले हुए विरोध को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।

आगे भी जारी रह सकती है कार्रवाई

रविवार को शुरू हुए बुलडोजर अभियान के बाद अब प्रशासन की नजर बाकी चिन्हित अवैध निर्माणों पर है। नगर निगम द्वारा जारी नोटिस और अदालत के निर्देश के अनुसार कार्रवाई आगे बढ़ने की संभावना है। फिलहाल प्रशासन का कहना है कि अभियान नियमों और न्यायालय के आदेश के तहत चलाया जा रहा है। दूसरी ओर, वकीलों के बीच इस कार्रवाई को लेकर नाराजगी बनी हुई है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर लखनऊ में प्रशासन और वकीलों के बीच विवाद फिर गहरा सकता है।

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