UP News: लखनऊ से अयोध्या जाने वालों के लिए बड़ा अपडेट, 20 कैमरे पकड़ेंगे ओवरस्पीडिंग

लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर वाहन चालकों की निगरानी के लिए 140 कैमरे और 12 एलईडी डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे। इनमें 20 एनपीआर कैमरे ओवरस्पीडिंग पकड़ने और चालान की कार्रवाई में मदद करेंगे। 120 पीटीजेड कैमरों से जाम और हादसों पर नजर रखी जाएगी। एनएचएआई का लक्ष्य अगले साल फरवरी तक यह व्यवस्था पूरी करने का है।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 22, 2026

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UP News: लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर तेज रफ्तार और यातायात नियमों की अनदेखी करने वाले वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। 124 किलोमीटर लंबे हाईवे पर निगरानी के लिए 140 कैमरे लगाए जाएंगे। इनमें 20 कैमरे ओवरस्पीडिंग पकड़कर चालान की कार्रवाई में मदद करेंगे, जबकि 120 कैमरों से हाईवे की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। इसके अलावा 12 एलईडी डिस्प्ले बोर्ड भी लगाए जाएंगे। यह काम अगले साल फरवरी तक पूरा करने का लक्ष्य है।

लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर 140 कैमरों से होगी निगरानी

बताते चले कि, लखनऊ से अयोध्या जाने वाले हाईवे पर सफर करने वाले वाहन चालकों को अब ज्यादा सतर्क रहना होगा। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) इस 124 किलोमीटर लंबे हाईवे पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करने जा रहा है। इसके तहत कुल 140 कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि तेज रफ्तार वाहनों पर नजर रखने के साथ सड़क पर होने वाली घटनाओं की जानकारी भी तुरंत मिल सके।

लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर 140 कैमरों से होगी निगरानी

इस व्यवस्था में 20 कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट पहचानकर ओवरस्पीडिंग के मामलों में चालान की कार्रवाई के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे। वहीं, बाकी 120 कैमरे हाईवे पर ट्रैफिक, जाम और दुर्घटनाओं जैसी स्थितियों पर नजर रखेंगे। इसके साथ ही वाहन चालकों को जरूरी सूचनाएं देने के लिए 12 एलईडी डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे। अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरी व्यवस्था को अगले साल फरवरी तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

ओवरस्पीडिंग पर लगेगी लगाम, 20 एनपीआर कैमरों से कटेंगे चालान

लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर निर्धारित गति सीमा से ज्यादा रफ्तार में वाहन चलाने वालों को पकड़ने के लिए 20 एनपीआर यानी ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरे लगाए जाएंगे। योजना के मुताबिक, छोटे वाहनों के लिए गति सीमा 80 किलोमीटर प्रति घंटा और बड़े वाहनों के लिए 60 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है. ये हाई रिजॉल्यूशन कैमरे गुजरने वाले वाहनों की नंबर प्लेट को अपने आप पढ़ सकेंगे। साथ ही वाहन की तस्वीर और गति से जुड़ी जानकारी सिस्टम तक पहुंचाई जाएगी। इसके बाद संबंधित ट्रैफिक पुलिस कंट्रोल रूम को चालान की कार्रवाई के लिए सूचना भेजी जाएगी।

इन कैमरों में डॉप्लर रडार या लिडार जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे वाहनों की गति मापने में मदद मिलती है। इस व्यवस्था से तेज रफ्तार पर नियंत्रण रखने और सड़क हादसों का खतरा कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

120 पीटीजेड कैमरों से हाईवे पर जाम और हादसों पर नजर

120 पीटीजेड कैमरों से हाईवे पर जाम और हादसों पर नजर

हाईवे पर निगरानी के लिए 120 पीटीजेड यानी पैन-टिल्ट-जूम कैमरे भी लगाए जाएंगे। ये कैमरे घूमकर अलग-अलग दिशाओं में निगरानी कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर दूर तक की गतिविधियों को जूम करके देखा जा सकता है। इनकी मदद से किसी जगह वाहनों की लंबी कतार लगने, सड़क पर दुर्घटना होने या यातायात में बाधा आने की जानकारी समय रहते मिल सकेगी। इससे संबंधित अधिकारियों और पेट्रोलिंग टीम को मौके पर पहुंचने और रास्ता साफ कराने में मदद मिलेगी।

12 एलईडी डिस्प्ले बोर्ड देंगे ट्रैफिक से जुड़ी जरूरी जानकारी

लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर 12 एलईडी डिस्प्ले स्क्रीन भी लगाई जाएंगी। इन स्क्रीन के जरिए वाहन चालकों को गति सीमा, सावधानी बरतने और यातायात नियमों का पालन करने से जुड़े संदेश दिखाए जाएंगे। जरूरत के अनुसार सड़क की स्थिति, आगे जाम होने या किसी संभावित बाधा की जानकारी भी इन बोर्डों पर दी जा सकेगी। इससे वाहन चालक समय रहते सतर्क हो सकेंगे और अपनी यात्रा के दौरान जरूरी सावधानी बरत पाएंगे।

अहमदपुर और रौनाई में बनेंगे कंट्रोल रूम

एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार, हाईवे पर लगे कैमरों की निगरानी के लिए अहमदपुर और रौनाई में कंट्रोल रूम बनाए जाएंगे। यहां से कैमरों की मदद से हाईवे की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। किसी दुर्घटना या आपात स्थिति की जानकारी मिलने पर संबंधित पेट्रोलिंग टीम को तुरंत सूचना दी जाएगी, ताकि वह कम से कम समय में मौके पर पहुंच सके। कंट्रोल रूम को ट्रैफिक कंट्रोल रूम से भी जोड़ा जाएगा, जिससे ओवरस्पीडिंग के मामलों में चालान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

अहमदपुर और रौनाई में बनेंगे कंट्रोल रूम

कुल मिलाकर, इस नई व्यवस्था का उद्देश्य लखनऊ-अयोध्या हाईवे पर यातायात को सुरक्षित और सुचारु बनाना है। हालांकि, इसका वास्तविक असर कैमरों की स्थापना, तकनीकी व्यवस्था और समय पर कार्रवाई पर निर्भर करेगा।