Lok Sabha Speaker Om Birla: लोकसभा के स्पीकर Om Birla ने गुरुवार को विपक्षी सांसदों के उस आरोप को सख्ती से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि सदन में भाषण के दौरान कुछ सांसदों के माइक्रोफोन बंद कर दिए गए थे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्पीकर के पास माइक्रोफोन को चालू या बंद करने का कोई बटन नहीं होता, इसलिए यह आरोप पूरी तरह गलत है।
लोकसभा में अपने बयान के दौरान उन्होंने बताया कि सदन में जो भी सदस्य बोलने के लिए अधिकृत होता है, उसका माइक्रोफोन स्वतः सक्रिय कर दिया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कई सांसद स्वयं भी पहले इस कुर्सी पर बैठकर कार्यवाही चला चुके हैं, इसलिए उन्हें इस प्रक्रिया की जानकारी होती है।
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सदन के नियमों का पालन करना स्पीकर की जिम्मेदारी
स्पीकर ने यह भी कहा कि सदन के किसी सदस्य को नियमों और प्रक्रियाओं से सहमति या असहमति हो सकती है, लेकिन उन नियमों को लागू करना स्पीकर का कर्तव्य होता है। उन्होंने दोहराया कि उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी संसद की गरिमा बनाए रखना है। उनके अनुसार, जब भी कोई सदस्य सदन की मर्यादा के खिलाफ आचरण करता है, तब स्पीकर को कठिन निर्णय लेने पड़ते हैं। कुछ सांसदों को सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित करने के फैसले पर बोलते हुए भी उन्होंने यही कहा कि यह कदम सदन की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया था।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संसदीय नियम
स्पीकर ने संविधान के Article 105 of the Constitution of India का भी उल्लेख किया, जो संसद में बोलने की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि यह अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि सदस्य सदन के नियमों और परंपराओं का पालन करें। उन्होंने कहा कि संसद में हर सदस्य को अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है, लेकिन यह स्वतंत्रता पूरी तरह निरंकुश नहीं है। यह सदन की कार्यप्रणाली और स्थापित नियमों के अनुसार संचालित होती है।
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सभी सदस्यों को बोलने का समान अधिकार
ओम बिरला ने यह भी स्पष्ट किया कि लोकसभा में हर सदस्य—चाहे वह मंत्री हो या विपक्ष का सांसद—को नियमों के तहत अपनी बात रखने का समान अधिकार है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि सदन में सभी सदस्य निर्धारित प्रक्रियाओं के भीतर रहकर अपने विचार रख सकें। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि स्वतंत्र भारत के संसदीय इतिहास में लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा केवल तीसरी बार हुई है, और ऐसे महत्वपूर्ण अवसरों पर सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाना बेहद जरूरी होता है।
राहुल गांधी के भाषण को लेकर विवाद
दरअसल, विपक्षी दलों के कई नेताओं ने आरोप लगाया था कि जब Rahul Gandhi सदन में बोल रहे थे, तब उनका माइक्रोफोन बंद कर दिया गया था। इस आरोप को लेकर विपक्षी दलों में काफी नाराजगी देखने को मिली। कांग्रेस के कई नेताओं के साथ-साथ Sanjay Raut समेत अन्य विपक्षी सांसदों ने भी इस मुद्दे को उठाया और कहा कि विपक्ष के नेताओं को अपनी बात रखने का पूरा मौका नहीं दिया जा रहा है।
लोकसभा में हंगामे के बीच स्पीकर की अपील
गुरुवार को जब ओम बिरला फिर से लोकसभा में स्पीकर के रूप में लौटे, तो सदन में विपक्षी सांसदों की ओर से जोरदार विरोध और नारेबाजी देखने को मिली। इसके बावजूद उन्होंने विपक्ष से अपील की कि प्रश्नकाल के दौरान सदन को शांतिपूर्वक चलने दिया जाए ताकि कार्यवाही बाधित न हो। उल्लेखनीय है कि उनके खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव वॉयस वोट के माध्यम से खारिज हो गया, जिसके बाद वे फिर से लोकसभा की कार्यवाही का संचालन करने के लिए अपनी कुर्सी पर लौटे।










