Ladki Bahin Yojana Name Change: महाराष्ट्र की चर्चित ‘लाडकी बहिन योजना’ को लेकर अब नया विवाद सामने आया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अजित पवार गुट से जुड़े विधायक अमोल मिटकरी ने राज्य सरकार से मांग की है कि इस योजना का नाम दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नाम पर रखा जाए। उनका कहना है कि अजित पवार राज्य की महिलाओं के लिए भाई की तरह थे और यह योजना उनके नाम से जुड़ना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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अजित पवार और महिलाओं से जुड़ा रिश्ता

अमोल मिटकरी ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि जब अजित पवार राज्यभर में दौरों पर जाते थे, तो महिलाएं उन्हें राखी बांधती थीं। उनकी कलाई हमेशा राखियों से भरी रहती थी। इसी कारण मिटकरी ने सुझाव दिया कि योजना का नाम ‘अजितदादांची लाडकी बहिण योजना’ रखा जाए।
अजित पवार का निधन और राजनीतिक असर
28 जनवरी को पुणे जिले के बारामती में एक विमान दुर्घटना में अजित पवार और चार अन्य लोगों की मृत्यु हो गई थी। उनके निधन के बाद पार्टी की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। हाल ही में उनकी पत्नी ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। ऐसे में योजना का नाम बदलने की मांग पार्टी की मौजूदगी और राजनीतिक ताकत को बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखी जा रही है।
योजना की शुरुआत और लाभ
‘लाडकी बहिन योजना’ की घोषणा अजित पवार ने वित्त मंत्री रहते हुए की थी। जुलाई 2024 में शुरू हुई इस योजना के तहत 21 से 65 वर्ष की महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की वित्तीय सहायता सीधे बैंक खाते में दी जाती है। यह योजना महिलाओं की आर्थिक मदद के लिए बनाई गई थी और माना जाता है कि इसने 2024 के विधानसभा चुनावों में भाजपा नेतृत्व वाली महायुति की जीत में अहम भूमिका निभाई।
सहायता राशि बढ़ाने की चर्चा
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हाल ही में कहा कि सरकार इस योजना को बंद नहीं करेगी क्योंकि इससे महिलाओं को बड़ी राहत मिल रही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सही समय पर मासिक सहायता राशि 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,100 रुपये की जा सकती है।
राजनीतिक महत्व
अमोल मिटकरी की मांग से साफ है कि एनसीपी अजित पवार गुट अपने नेता की विरासत को जीवित रखना चाहता है। योजना का नाम बदलने का प्रस्ताव न केवल श्रद्धांजलि है बल्कि राजनीतिक रणनीति भी है। इससे पार्टी अपने समर्थकों को यह संदेश देना चाहती है कि अजित पवार की पहचान और योगदान हमेशा याद रखे जाएंगे।
इस तरह, ‘लाडकी बहिन योजना’ का नाम बदलने की मांग ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस पर क्या निर्णय लेती है और क्या योजना वास्तव में ‘अजितदादांची लाडकी बहिण योजना’ बन पाएगी।










