Ladakh LG Resignation: लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता का इस्तीफा, नौ महीने में ही छोड़ा पद

लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने पद संभालने के महज 9 महीने बाद अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को सौंप दिया है। सोनम वांगचुक के नेतृत्व में जारी छठी अनुसूची और पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग के बीच इस इस्तीफे को केंद्र सरकार की नई रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

Ladakh LG Resignation

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मार्च 5, 2026

Ladakh LG Resignation: केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की राजनीति से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। महज नौ महीने के संक्षिप्त कार्यकाल के बाद उनके इस फैसले ने प्रशासनिक गलियारों और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। कविंदर गुप्ता ने पिछले साल 18 जुलाई को लद्दाख के तीसरे उपराज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। उनका इस्तीफा ऐसे संवेदनशील समय में आया है जब लद्दाख अपनी संवैधानिक पहचान और भविष्य की सुरक्षा को लेकर एक बड़े आंदोलन के दौर से गुजर रहा है।

संक्षिप्त रहा कार्यकाल: नौ महीने में ही छोड़ी लद्दाख की कमान

जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री रहे कविंदर गुप्ता को लद्दाख की जिम्मेदारी एक बेहद चुनौतीपूर्ण समय पर सौंपी गई थी। हालांकि, उनका कार्यकाल एक वर्ष भी पूरा नहीं कर सका। राजभवन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, उन्होंने अपना त्यागपत्र केंद्र सरकार को भेज दिया है। उनके अचानक पद छोड़ने के सटीक कारणों का अभी तक आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन इसे लद्दाख में बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक दबाव से जोड़कर देखा जा रहा है। लद्दाख जैसे रणनीतिक और सीमावर्ती क्षेत्र में संवैधानिक प्रमुख का इस तरह इस्तीफा देना केंद्र सरकार के लिए एक नई चिंता का विषय बन गया है।

विरोध प्रदर्शन और मांगें: कार्यकाल के दौरान बढ़ी अशांति

कविंदर गुप्ता के नौ महीने के कार्यकाल के दौरान लद्दाख में अशांति और असंतोष का ग्राफ काफी ऊपर गया। ‘लेह एपेक्स बॉडी’ और ‘कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस’ जैसे प्रभावशाली संगठनों ने लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने, संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा प्रदान करने और स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों में आरक्षण की मांगों को लेकर जोरदार आंदोलन चलाया। केंद्र सरकार के साथ कई दौर की वार्ता विफल होने के बाद पूरे लद्दाख में बड़े पैमाने पर बंद और प्रदर्शन देखे गए। माना जा रहा है कि इन मांगों पर समाधान न निकल पाना और प्रशासनिक गतिरोध भी इस्तीफे की एक वजह हो सकता है।

पश्चिम बंगाल से लद्दाख तक: राज्यपालों के इस्तीफे का सिलसिला

दिलचस्प बात यह है कि कविंदर गुप्ता का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सी.वी. आनंद बोस ने भी अचानक पद त्याग दिया है। बंगाल में साढ़े तीन साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद बोस ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेजा है। एक ही समय में दो महत्वपूर्ण राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के संवैधानिक प्रमुखों का हटना प्रशासनिक फेरबदल की ओर इशारा कर रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इन इस्तीफों पर हैरानी जताते हुए इसे चिंता का विषय बताया है।

अगला कदम क्या? केंद्र की नई रणनीति पर टिकी नजरें

कविंदर गुप्ता के जाने के बाद अब लद्दाख के लिए नए उपराज्यपाल की तलाश शुरू हो गई है। लद्दाख की भू-राजनीतिक स्थिति और चीन के साथ जारी सीमा विवाद को देखते हुए केंद्र सरकार जल्द ही किसी अनुभवी प्रशासक या सैन्य पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति को यह जिम्मेदारी सौंप सकती है। स्थानीय जनता और आंदोलनकारी नेताओं को उम्मीद है कि नया नेतृत्व उनकी मांगों के प्रति अधिक संवेदनशील होगा। फिलहाल, कविंदर गुप्ता के इस्तीफे ने लद्दाख की सियासत में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है।

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