UP News: ग्रेटर नोएडा वेस्ट की हाईराइज सोसायटियों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव एक बार फिर चर्चा में है। ताजा मामला ‘ला रेजीडेंशिया’ (La Residencia) सोसायटी का है, जहां मुख्य जलापूर्ति पाइपलाइन फटने से करीब 2200 परिवारों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। बुधवार, 18 फरवरी को हुई इस घटना ने बिल्डर के रखरखाव के दावों की पोल खोल दी है।
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अचानक बाधित हुई वॉटर सप्लाई
बताते चले कि, बुधवार की सुबह ला रेजीडेंशिया के निवासियों के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं थी। सुबह करीब 11 बजे जब लोग अपने दफ्तर जाने और बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी कर रहे थे, तभी अचानक 29 टावरों की नलों में पानी आना बंद हो गया। देखते ही देखते पूरी सोसायटी में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। निवासियों का आरोप है कि मुख्य पाइपलाइन मंगलवार रात 11 बजे ही फट गई थी, लेकिन प्रबंधन ने इसकी सूचना समय रहते साझा नहीं की, जिससे लोग पहले से पानी का संचय नहीं कर सके।
दैनिक कार्यों पर लगा ब्रेक
आपको बता दे कि, पानी की कमी के कारण लोगों के रोजमर्रा के काम पूरी तरह ठप हो गए। खाना बनाने, नहाने और साफ-सफाई जैसे बुनियादी कार्यों के लिए लोग तरस गए। खासकर उन फ्लैट्स में स्थिति अधिक गंभीर हो गई जहाँ छोटे बच्चे और बुजुर्ग रहते हैं। स्थानीय निवासियों ने बताया कि बिना किसी पूर्व सूचना के सप्लाई कटने से उन्हें अपनी दिनचर्या में भारी बदलाव करना पड़ा और कई लोगों को दफ्तर से छुट्टी तक लेनी पड़ी।
टैंकर और बोतलबंद पानी का सहारा
जब घरों का स्टॉक खत्म हो गया, तो लोग पास की दुकानों की ओर दौड़े। बाज़ारों में बोतलबंद पानी की मांग अचानक बढ़ गई। हालांकि प्रबंधन ने बाद में पानी के टैंकर मंगवाए, लेकिन हजारों की आबादी के लिए वे नाकाफी साबित हुए। निवासियों को बाल्टियों और डिब्बों में पानी भरकर अपने फ्लैट्स तक ले जाते देखा गया। लोगों का कहना है कि लाखों रुपये का मेंटेनेंस देने के बाद भी उन्हें सड़क पर पानी के लिए लाइन लगानी पड़ रही है, जो बेहद शर्मनाक है।
मेंटेनेंस विभाग के खिलाफ फूटा निवासियों का गुस्सा
सोसायटी के निवासी सुमित जलोटा और दीपांकर ने इस कुप्रबंधन पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है; इससे पहले भी कई बार तकनीकी खराबी के नाम पर घंटों सप्लाई रोकी गई है। निवासियों का आरोप है कि मोटा मेंटेनेंस चार्ज वसूलने के बावजूद इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत पर कोई ठोस ध्यान नहीं दिया जा रहा है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हुई, तो वे बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
देर रात बहाल हुई जलापूर्ति
करीब 24 घंटे के लंबे इंतजार के बाद बुधवार देर रात 11 बजे के आसपास जलापूर्ति आंशिक रूप से बहाल की जा सकी। आधी रात तक स्थिति सामान्य तो हुई, लेकिन निवासियों के मन में व्यवस्था को लेकर कड़वाहट बनी रही। करोड़ों रुपये के फ्लैट में रहने के बावजूद एक अदद पानी के कनेक्शन के लिए मोहताज होना, हाईराइज सोसायटियों के निवासियों की सुरक्षा और सुविधा पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
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