
UP Election 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को एक के बाद एक झटके लगते नजर आ रहे हैं। आंवला से पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप के भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद अब बदायूं की बिसौली विधानसभा सीट से पूर्व विधायक कुशाग्र सागर ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस फैसले के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अब चर्चा है कि कुशाग्र सागर भी जल्द ही समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं। हालांकि, उनके सपा में शामिल होने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
कुशाग्र सागर ने फेसबुक पोस्ट में बयां किया दर्द
आपको बताते चले कि, भाजपा से इस्तीफा देने के बाद कुशाग्र सागर ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने बताया कि उन्होंने करीब 11 साल तक भाजपा को अपना परिवार समझकर काम किया। इस दौरान संगठन के लिए पूरी मेहनत की और व्यक्तिगत परेशानियों के बावजूद अपनी जिम्मेदारियां निभाने की कोशिश की।

कुशाग्र ने अपनी पोस्ट में कहा कि किसी संगठन से 11 साल तक जुड़े रहना केवल राजनीतिक रिश्ता नहीं होता, बल्कि उससे भावनाएं भी जुड़ जाती हैं। उन्होंने लिखा कि उनका दर्द पद या प्रतिष्ठा को लेकर नहीं है, बल्कि सम्मान और भरोसा टूटने से उन्हें ठेस पहुंची है। इतने साल तक मेहनत करने के बाद भी जब अपनापन महसूस नहीं हुआ, तो उन्हें निराशा हुई। उन्होंने अपने इस फैसले को अंत नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की नई शुरुआत बताया।
बिसौली सीट पर आशुतोष मौर्य को लेकर बढ़ी थी नाराजगी
बताते चले कि, कुशाग्र सागर की नाराजगी की एक बड़ी वजह बिसौली सीट की राजनीतिक गतिविधियों को माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि वह मौजूदा विधायक आशुतोष मौर्य उर्फ राजू को भाजपा में मिल रही अहमियत से खुश नहीं थे।
आशुतोष मौर्य समाजवादी पार्टी के विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद से उनके भाजपा की ओर झुकाव को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। अप्रैल 2024 में उनकी पत्नी सुषमा मौर्य, जो बिल्सी नगर पालिका की पूर्व चेयरमैन रह चुकी हैं, और उनकी बहन भाजपा में शामिल हो गई थी। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई थी कि आने वाले विधानसभा चुनाव में आशुतोष मौर्य की दावेदारी मजबूत हो सकती है। माना जा रहा है कि इन घटनाक्रमों से कुशाग्र सागर और उनके समर्थकों की नाराजगी बढ़ी।
कौन हैं कुशाग्र सागर?
कुशाग्र सागर बदायूं जिले के एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता योगेंद्र कुमार सागर भी विधायक रह चुके हैं। कुशाग्र ने 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर बिसौली सीट से जीत हासिल की थी। उन्हें 1,00,287 वोट मिले थे और उन्होंने 10,688 वोटों के अंतर से चुनाव जीता था।
हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में मुकाबला बेहद करीबी रहा। इस बार कुशाग्र सागर को 1,08,735 वोट मिले, जबकि आशुतोष मौर्य को 1,10,569 वोट हासिल हुए। इस तरह कुशाग्र सागर महज 1,834 वोटों के अंतर से चुनाव हार गए। कम अंतर से मिली हार के बाद बिसौली सीट पर दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मुकाबला चर्चा में रहा।
कुशाग्र सागर सपा में होंगे शामिल?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कुशाग्र सागर समाजवादी पार्टी में शामिल होंगे? अगर ऐसा होता है, तो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बिसौली सीट पर सियासी समीकरण बदल सकते हैं। एक तरफ आशुतोष मौर्य के भाजपा की ओर जाने की अटकलें हैं, तो दूसरी तरफ कुशाग्र सागर के सपा में शामिल होने की चर्चा तेज है।

हालांकि, अभी इन संभावित राजनीतिक बदलावों पर अंतिम मुहर नहीं लगी है। कुशाग्र सागर की अगली राजनीतिक चाल क्या होगी और इसका बिसौली विधानसभा सीट पर कितना असर पड़ेगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। फिलहाल उनके इस्तीफे ने भाजपा के भीतर की नाराजगी और 2027 के चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया है।











