Asian Games 2026 : भारत की युवा तीरंदाज कुमकुम मोहोद ने एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं के व्यक्तिगत रिकर्व फाइनल में दक्षिण कोरिया की ओह येजिन को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। महज 17 साल की उम्र में कुमकुम ने एशियाई खेलों जैसे बड़े मंच पर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उनकी जीत के साथ भारत के खाते में 16वां गोल्ड मेडल भी जुड़ गया।
फाइनल में दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी को दी मात
महिला व्यक्तिगत रिकर्व के फाइनल में कुमकुम का सामना दक्षिण कोरिया की ओह येजिन से हुआ। मुकाबले में भारतीय तीरंदाज ने दबाव के बीच संयम बनाए रखा और शानदार निशानेबाजी करते हुए जीत हासिल की। इस सफलता ने न सिर्फ कुमकुम का नाम इतिहास में दर्ज कराया, बल्कि भारतीय तीरंदाजी के लिए भी एक नया अध्याय जोड़ दिया।

व्यक्तिगत रिकर्व में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय
कुमकुम मोहोद की इस उपलब्धि की सबसे खास बात यह है कि वह एशियाई खेलों में महिलाओं के व्यक्तिगत रिकर्व इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। इससे पहले भारतीय तीरंदाजों ने टीम और अन्य स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन व्यक्तिगत रिकर्व में यह स्वर्ण पदक एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
दादी के पैसों से खरीदे धनुष से शुरू हुआ सफर
कुमकुम की सफलता की कहानी बेहद साधारण शुरुआत से जुड़ी है। उन्होंने तीरंदाजी का प्रशिक्षण एक साधारण धनुष से शुरू किया था, जिसे उनकी दादी के पैसों से खरीदा गया था। सीमित संसाधनों के बावजूद कुमकुम ने अपने खेल को बेहतर बनाने के लिए लगातार मेहनत की और धीरे-धीरे प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बनानी शुरू की।

अमरावती के साधारण परिवार से निकलीं कुमकुम
कुमकुम अमरावती के एक साधारण परिवार से आती हैं। शुरुआती दिनों में उनके लिए तीरंदाजी की ट्रेनिंग तक पहुंचना भी आसान नहीं था। एकेडमी आने-जाने के खर्च को कम रखने के लिए उनके पिता अक्सर उन्हें अपनी मोटरसाइकिल पर लेकर जाते थे। परिवार के सीमित साधनों के बावजूद उन्होंने बेटी के सपने को पूरा करने में पूरा सहयोग दिया।
पुराने उपकरणों के साथ जारी रही ट्रेनिंग
कुमकुम ने कई वर्षों तक सीमित संसाधनों और पुराने उपकरणों के साथ अभ्यास किया। बेहतर सुविधाओं और आधुनिक उपकरणों की कमी उनके रास्ते में चुनौती जरूर बनी, लेकिन उन्होंने इसे अपनी मेहनत के सामने बाधा नहीं बनने दिया। लगातार अभ्यास, अनुशासन और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने से उनके प्रदर्शन में सुधार होता गया।
एशियन गेम्स में तीन पदकों का शानदार सफर
इस एशियाई खेलों में कुमकुम का प्रदर्शन बेहद खास रहा है। उन्होंने महिला रिकर्व टीम स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीता, जबकि मिक्स्ड रिकर्व टीम इवेंट में सिल्वर मेडल हासिल किया। इसके बाद व्यक्तिगत रिकर्व में गोल्ड जीतकर उन्होंने अपने अभियान को यादगार बना दिया। तीन पदकों का यह सफर उनके शानदार प्रदर्शन को दर्शाता है।
LA28 ओलंपिक कोटा से जुड़ी बड़ी उपलब्धि
कुमकुम की इस ऐतिहासिक जीत का असर सिर्फ एशियाई खेलों तक सीमित नहीं है। उनकी शानदार उपलब्धि के साथ भारत के लिए LA28 ओलंपिक खेलों में व्यक्तिगत कोटा स्थान भी हासिल हुआ है। ऐसे में कुमकुम की जीत को भारतीय तीरंदाजी के भविष्य के लिहाज से भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
मेहनत से इतिहास तक पहुंची युवा तीरंदाज
जिस खिलाड़ी ने दादी के पैसों से खरीदे साधारण धनुष से अपना सफर शुरू किया था, वही आज एशियाई खेलों के सबसे बड़े मंच पर गोल्ड मेडल जीत चुकी है। कुमकुम मोहोद की कहानी सीमित संसाधनों के बीच लगातार मेहनत, परिवार के सहयोग और खेल के प्रति समर्पण की मिसाल बन गई है। 17 साल की उम्र में मिली यह सफलता उनके अंतरराष्ट्रीय करियर की एक ऐतिहासिक शुरुआत है।










