Regime Change Controversy : रिजीम चेंज विवाद में किरेन रिजिजू का विपक्ष पर हमला, भारत-बांग्लादेश तुलना से बढ़ा सियासी घमासान

‘भारत बांग्लादेश नहीं है’ - किरेन रिजिजू के इस बयान ने राजनीतिक बहस तेज कर दी है। रिजीम चेंज, चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन और तिरंगा मार्च को लेकर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने हैं। पी. चिदंबरम ने भी जवाब दिया है। सवाल यह है कि यह विवाद आने वाले दिनों में किस दिशा में जाएगा और राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?

Regime Change Controversy

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 17, 2026

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Regime Change Controversy : केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के ‘रिजीम चेंज’ वाले बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने विपक्षी नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि भारत बांग्लादेश नहीं है। रिजिजू ने स्पष्ट किया कि देश में सरकार का गठन और सत्ता परिवर्तन लोकतांत्रिक चुनावों के जरिए जनता के जनादेश से होता है। उनके इस बयान के बाद भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।

सोशल मीडिया पोस्ट में भारतीय युवाओं का किया जिक्र

शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए रिजिजू ने विपक्षी दलों और कुछ कार्यकर्ताओं पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों की आड़ में लोकतांत्रिक संस्थाओं को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय युवा देश को तोड़ने के बजाय उसके निर्माण में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने युवाओं की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए खेल, कौशल विकास, नवाचार, स्टार्टअप, तकनीक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में उनकी प्रगति को रेखांकित किया।

चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन से जुड़ा है विवाद

रिजिजू की यह टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा और कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के हालिया बयानों के संदर्भ में आई है। इन बयानों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन और ‘रिजीम चेंज’ की चर्चा सामने आई थी। यह विरोध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में कथित अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा है। हालांकि, इन आरोपों और राजनीतिक बयानों के बीच चुनावी प्रक्रिया को लेकर बहस जारी है।

बांग्लादेश के छात्र आंदोलन से तुलना पर विवाद

विवाद का एक अहम पहलू यह भी है कि कुछ छात्र कार्यकर्ताओं ने भारत में विरोध प्रदर्शनों की तुलना बांग्लादेश के जेन-जी छात्रों के नेतृत्व वाले आंदोलन से की। बांग्लादेश में हुए उस आंदोलन के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। इसी तुलना को लेकर भाजपा नेताओं ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक परिस्थितियों की तुलना दूसरे देशों की घटनाओं से करना उचित नहीं है।

तिरंगा मार्च को लेकर भाजपा ने उठाए सवाल

नई दिल्ली में विपक्षी समूहों और नागरिक समाज से जुड़े संगठनों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान तिरंगा मार्च निकाला। भाजपा नेताओं ने इस कदम की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि राष्ट्रीय ध्वज का इस्तेमाल राजनीतिक विरोध के लिए किया जा रहा है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने तिरंगा मार्च और ‘हर घर तिरंगा’ जैसे राष्ट्रीय गौरव अभियानों के बीच अंतर बताया। उन्होंने विपक्ष की मंशा पर सवाल उठाए। हालांकि, तिरंगा मार्च को लेकर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक मतभेद सामने आए हैं।

राजनाथ सिंह और भाजपा नेताओं ने भी साधा निशाना

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर भारत में बांग्लादेश जैसी राजनीतिक उथल-पुथल पैदा करने की कोशिश का आरोप लगाया। लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि युवाओं को अराजक राजनीति का हिस्सा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के बयान की आलोचना की और बांग्लादेश से प्रेरणा लेने के विचार पर सवाल उठाए।

चिदंबरम ने लोकतंत्र का हवाला देकर दिया जवाब

भाजपा के आरोपों पर पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल किया कि भाजपा ‘रिजीम चेंज’ शब्द के इस्तेमाल पर इतना विरोध क्यों कर रही है। चिदंबरम के मुताबिक, लोकतंत्र में सत्ता परिवर्तन सामान्य प्रक्रिया है। इस तरह एक राजनीतिक शब्द को लेकर शुरू हुई बहस अब लोकतंत्र, विरोध प्रदर्शन, चुनावी प्रक्रिया और राष्ट्रीय प्रतीकों के इस्तेमाल तक पहुंच गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।

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