
Women Reservation Bill: महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर केंद्र सरकार ने कांग्रेस से सहयोग की अपील की है। केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर इन मुद्दों पर चर्चा करने और विधेयकों को लेकर समर्थन देने की बात कही है। यह पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खरगे की ओर से लिखे गए पत्र के जवाब में भेजा गया है।
दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष ने 16 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर मांग की थी कि परिसीमन संशोधन विधेयक को संसद में विचार के लिए लाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए। कांग्रेस की मांग थी कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों के साथ चर्चा होनी चाहिए। अब रिजिजू ने अपने जवाब में सरकार का पक्ष रखते हुए विपक्ष से बातचीत और सहयोग की अपील की है।
महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष से सकारात्मक चर्चा की अपील
बताते चले कि, किरेन रिजिजू ने अपने पत्र में कहा है कि सरकार महत्वपूर्ण विधेयकों पर सार्थक चर्चा और सभी राजनीतिक दलों की भागीदारी के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कांग्रेस से अपील की कि वह महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा में सकारात्मक भूमिका निभाए।

रिजिजू का कहना है कि सरकार और विपक्ष के बीच पहले भी बातचीत हुई है और इस संबंध में पत्राचार भी किया गया है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि भविष्य में सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी कांग्रेस को रचनात्मक सहयोग करना चाहिए। सरकार चाहती है कि संसद में अहम मुद्दों पर चर्चा हो और विधायी प्रक्रिया आगे बढ़े।
केंद्रीय मंत्री ने खरगे को लिखे पत्र की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी साझा की। उन्होंने बताया कि यह पत्र प्रधानमंत्री को लिखे गए खरगे के पत्र के जवाब में है।
संसद का सत्रावसान नहीं होने पर क्या बोले किरेन रिजिजू?
पत्र में संसद का सत्रावसान नहीं किए जाने को लेकर उठाए गए सवालों पर भी रिजिजू ने अपनी बात रखी। उन्होंने 13 अगस्त 2026 को लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के बाद से अब तक सत्रावसान नहीं होने के मुद्दे का जिक्र किया। रिजिजू के मुताबिक, संविधान में ऐसी कोई निश्चित समयसीमा तय नहीं है, जिसके तहत सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद एक निर्धारित अवधि में सत्रावसान करना अनिवार्य हो। उन्होंने कहा कि केवल इस आधार पर कि संसद का सत्रावसान नहीं हुआ है, किसी संवैधानिक अनियमितता का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
संसद के पुराने सत्रों का भी किया जिक्र
अपने पक्ष को समझाने के लिए रिजिजू ने संसद के पुराने सत्रों के उदाहरण भी दिए। उन्होंने बताया कि 2009 में लोकसभा 21 और 22 जुलाई को प्रस्ताव पर चर्चा के लिए बैठी थी। इसके बाद सदन की बैठक 17 अक्टूबर को हुई और 24 अक्टूबर को स्थगित हुई। फिर अगली बैठक 10 दिसंबर को आयोजित की गई।इसके अलावा उन्होंने 1987 में 76 दिन, 1989 में 54 दिन, 2006 और 2013 में 49-49 दिन और 1963 में 41 दिन के अंतराल का भी उल्लेख किया। इन उदाहरणों के जरिए उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि संसद की बैठकों के बीच लंबा अंतराल पहले भी रहा है।
महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर आगे क्या होगा?

किरेन रिजिजू के पत्र के बाद अब महिला आरक्षण और परिसीमन संशोधन विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा पर नजर रहेगी। सरकार ने जहां सकारात्मक बातचीत और सहयोग की अपील की है, वहीं कांग्रेस पहले ही सर्वदलीय बैठक की मांग उठा चुकी है। अब यह देखना अहम होगा कि इन विधेयकों पर आगे किस तरह की बातचीत होती है और क्या सभी राजनीतिक दल किसी साझा रास्ते पर पहुंच पाते हैं। फिलहाल सरकार की ओर से संसद में सार्थक चर्चा और विपक्ष की भागीदारी पर जोर दिया गया है।











