बांग्लादेश में खोकन दास की अस्पताल में मौत, तालाब में कूदकर भी नहीं बची जान, क्रूरता का शिकार हुआ युवक

ढाका  बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे बर्बर हमलों ने एक और जान ले ली है. ढाका से लगभग 150 किलोमीटर दूर अपने गांव में दवा और मोबाइल बैंकिंग का व्यवसाय चलाने वाले खोकन चंद्र दास पर बुधवार रात इस्लामिक कट्टरपंथियों ने जानलेवा हमला किया था. हमलावरों ने न केवल उन पर धारदार हथियारों से वार किया, बल्कि उन्हें जिंदा जलाने की कोशिश भी की थी. खोकन चंद्र दास के परिवार ने बताया कि वह बुधवार रात दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, तभी उन पर हमला किया गया. हमले में गंभीर रूप से झुलसे खोकोन दास किसी तरह

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Published On :

जनवरी 3, 2026

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ढाका 

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे बर्बर हमलों ने एक और जान ले ली है. ढाका से लगभग 150 किलोमीटर दूर अपने गांव में दवा और मोबाइल बैंकिंग का व्यवसाय चलाने वाले खोकन चंद्र दास पर बुधवार रात इस्लामिक कट्टरपंथियों ने जानलेवा हमला किया था. हमलावरों ने न केवल उन पर धारदार हथियारों से वार किया, बल्कि उन्हें जिंदा जलाने की कोशिश भी की थी.

खोकन चंद्र दास के परिवार ने बताया कि वह बुधवार रात दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, तभी उन पर हमला किया गया. हमले में गंभीर रूप से झुलसे खोकोन दास किसी तरह पास के तालाब में कूद गए, जिससे आग बुझ सकी, लेकिन उनका चेहरा और सिर बुरी तरह झुलस गया था.

स्थानीय लोगों ने उन्हें पहले नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, बाद में हालत बिगड़ने पर ढाका रेफर किया गया, जहां शुक्रवार तड़के उनकी मौत हो गई. खोकन दास अपने गांव में दवा और मोबाइल बैंकिंग का छोटा कारोबार चलाते थे. यह गांव ढाका से करीब 150 किलोमीटर दूर स्थित है. घटना के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए.

इस मामले को लेकर पश्चिम बंगाल बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. पार्टी ने इसे धार्मिक आधार पर हो रही हिंसा बताते हुए कहा कि यह सिलसिला बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल दोनों जगह चिंताजनक रूप से जारी है. पार्टी ने पिछले साल मुर्शिदाबाद में हुई हत्याओं का हवाला देते हुए कहा कि बंगाली हिंदुओं पर हमले थमने का नाम नहीं ले रहे.

लगातार हो रहे हैं हमले

खोकन दास का नाम अब उन हिंदुओं की बढ़ती सूची में जुड़ गया है, जिन पर मुस्लिम-बहुल बांग्लादेश में कथित तौर पर धार्मिक कारणों से जानलेवा हमले हुए हैं. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौर में अल्पसंख्यकों पर हिंसा के मामलों में इजाफे को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है.

बांग्लादेश में हिंसा की यह कड़ी नई नहीं है. इससे पहले 18 दिसंबर 2025 को दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी. आरोप है कि पहले उन्हें मार डाला गया और फिर शव को पेड़ से बांधकर जला दिया गया. उन पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया था.

इसके बाद 25 दिसंबर को अमृत मंडल की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. हालांकि अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बीच बांग्लादेश सरकार ने दावा किया कि अमृत मंडल एक आपराधिक गतिविधियों में लिप्त व्यक्ति था और उगाही के विवाद में भीड़ ने उसे निशाना बनाया.

वहीं 29 दिसंबर को मेहराबारी इलाके में सुरक्षा ड्यूटी के दौरान बजेंद्र बिस्वास (42) की गोली लगने से मौत हो गई. पुलिस ने आरोपी नोमान मिया (29) को गिरफ्तार किया, जिसने पूछताछ में दावा किया कि गोली “मजाक में” चली थी.

भारत ने भी कई बार बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ “लगातार शत्रुता” पर गंभीर चिंता जताते हुए हालात पर करीबी नजर रखने की बात कही है. वहीं बांग्लादेश सरकार का कहना है कि वह अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, हालांकि जमीनी हालात कुछ और कहानी बयां करते हैं.

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