Makar Sankranti 2026: भारत में मकर संक्रांति का त्योहार नई उमंग और खुशियों का प्रतीक है। इस दिन देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग व्यंजन बनाए जाते हैं। उत्तर भारत में दही-चूड़ा तो कुछ जगहों पर खिचड़ी खाई जाती है। यही कारण है कि खिचड़ी को ‘मकर संक्रांति का खास भोजन’ कहा जाता है। यह न केवल साधारण भोजन है, बल्कि त्योहारों, भक्ति और पारिवारिक समारोहों में इसका विशेष महत्व है।
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खिचड़ी: हर उम्र और स्थिति के लिए भोजन
खिचड़ी भारतीय थाली का ऐसा व्यंजन है जो गरीब- अमीर, बच्चे- बुजुर्ग, बीमार- स्वस्थ सभी के लिए समान रूप से उपयोगी है। बच्चों का पहला आहार या बीमार व्यक्ति का हल्का भोजन—खिचड़ी हर स्थिति में आरामदायक और पौष्टिक साबित होती है। कई मंदिरों में इसे प्रसाद के रूप में भी बांटा जाता है। यही कारण है कि खिचड़ी को भारत का पारंपरिक और राष्ट्रीय भोजन कहा जाता है।
इतिहास और साहित्य में खिचड़ी

संस्कृत शब्द “खिच्चा” से उत्पन्न खिचड़ी चावल और दाल को मिलाकर बनाई जाती है। महाभारत में भी इसका उल्लेख मिलता है। वनवास के दौरान द्रौपदी ने पांडवों के लिए खिचड़ी बनाई थी। इसके अलावा, कृष्ण और सुदामा के प्रसंग में भी खिचड़ी का जिक्र मिलता है।
इतिहास में खिचड़ी का महत्व सिर्फ भारतीय साहित्य तक ही सीमित नहीं रहा। सिकंदर के सेनापति सेल्यूकस निकेटर ने 305-303 ईसा पूर्व में भारत में खिचड़ी जैसी डिश का उल्लेख किया। 14वीं शताब्दी में घुमंतू यात्री इब्नबतूता ने “किशरी” का जिक्र किया, जिसे चावल और मूंग की दाल से बनाया जाता था। 15वीं शताब्दी में रूसी यात्री अफानासी निकितिन ने भी खिचड़ी का उल्लेख किया।
मुगलों से लेकर ब्रिटिश राज तक
मुगल काल में खिचड़ी ने शाही रसोई में खास जगह बनाई। अकबर, जहांगीर और औरंगजेब अपनी पसंदीदा खिचड़ी के लिए जाने जाते थे। बाद में बहादुर शाह ज़फ़र की पसंदीदा खिचड़ी ‘बादशाह पसंद’ कहलाती थी। ब्रिटिश राज में क्वीन विक्टोरिया को भी खिचड़ी पसंद आई, जिसे उनके टीचर मुंशी अब्दुल करीम ने पहली बार चखाई। ब्रिटिश रसोई में इसे ‘केडगिरी’ के नाम से अपनाया गया।
क्षेत्रीय विविधता और व्यंजन में रूप

भारत में खिचड़ी अलग-अलग राज्यों और अवसरों में अलग रूप में मिलती है। उत्तर भारत में मूंग दाल वाली खिचड़ी आम है, दक्षिण में नारियल के तड़के वाली खिचड़ी, गुजरात में खिचड़ी कढ़ी के साथ, हैदराबाद में कीमा या मछली के साथ। व्रत के दौरान साबूदाने की खिचड़ी भी लोकप्रिय है।
खिचड़ी: भक्ति और संस्कृति का प्रतीक
कई मंदिरों में खिचड़ी को प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। बंगाल में दुर्गा पूजा और ओडिशा में जगन्नाथ मंदिर में खिचड़ी थाल विशेष महत्व रखती है। यह व्यंजन न केवल स्वाद में उत्कृष्ट है, बल्कि सामाजिक और धार्मिक समरसता का प्रतीक भी है।
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स्वास्थ्य और पोषण का आदर्श
खिचड़ी सरल होने के बावजूद अत्यंत पौष्टिक और हल्का भोजन है। बच्चों, बुजुर्गों और व्यस्त जीवन जीने वाले सभी के लिए यह आसानी से पचने योग्य और सेहतमंद भोजन है। यही कारण है कि आज खिचड़ी को दुनिया में हेल्दी फूड के रूप में भी मान्यता मिली है।










