Kharmas 2026: सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए मुहूर्त देखना जरूरी माना जाता है। मान्यता है कि अगर शुभ मुहूर्त में कार्यों को किया जाए तो पुण्य की प्राप्ति होती है। ज्योतिष अनुसार खरमास जिसे मलमास भी कहा जाता है इसका अपना महत्व होता है। इस दौरान शादी विवाह जैसे शुभ कार्यों को करना मना होता है। इस साल खरमास 15 मार्च से आरंभ हो रहा है जो कि 13 अप्रैल को समाप्त होगा। इस पूरे महीने में विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, यज्ञ, मुंडन, नामकरण जैसे सभी तरह के मांगलिक और शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। मान्यता है कि इस दौरान नया घर खरीदना, वाहन लेना या नया कारोबार शुरू करना भी अच्छा नहीं माना जाता है।
खरमास के दिनों को मुख्य रूप से आध्यात्मिक साधना, पूजा पाठ और दान पुण्य के लिए अच्छा माना जाता है। इस दौरान धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों को करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और ईश्वर की कृपा भी बनी रहती है।
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क्या होता है खरमास?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो इस प्रक्रिया को संक्रांति कहा जाता है। कुछ विशेष स्थितियों में जब सूर्य गुरु की राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास का आरंभ होता है।
ऐसा माना जाता है कि इस समय सूर्य की गति सामान्य से धीमी हो जाती है। सूर्य की कमजोर स्थिति के कारण किसी भी शुभ कार्य के सफल होने की संभावना कम मानी जाती है। इसी कारण इस अवधि को मांगलिक कार्यों के लिए उचित नहीं माना जाता। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस समय भगवान सूर्य की आराधना करने से विशेष फल प्राप्त होता है। इसलिए इस पूरे महीने सूर्य देव की पूजा करना शुभ माना जाता है।
साल में दो बार आता है खरमास
ज्योतिष अनुसार खरमास साल में दो बार आता है, पहला खरमास मध्य मार्च से मध्य अप्रैल के बीच पड़ता है। दूसरा खरमास मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी के बीच पड़ता है। इन दोनों अवधियों में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। हालांकि पूजा-पाठ, दान और धार्मिक कार्यों के लिए यह समय बेहद शुभ माना जाता है।
खरमास में क्यों बंद हो जाते हैं शुभ कार्य
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु ग्रह (बृहस्पति) धनु राशि के स्वामी हैं। जब सूर्य देव गुरु की राशि में प्रवेश करते हैं, तब सूर्य की शक्ति कमजोर मानी जाती है। इसी कारण इस अवधि को मलमास कहा जाता है। ऐसा भी माना जाता है कि इस समय सूर्य का स्वभाव उग्र हो जाता है, जिससे शुभ कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं। इसलिए इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश और नए कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कमजोर सूर्य व्यक्ति के जीवन में अस्थिरता और बाधाएं ला सकता है। इसी वजह से इस अवधि में जीवन के बड़े फैसलों को टालना ही बेहतर माना जाता है।
खरमास में भूलकर भी न करें ये काम

आपको बता दें कि खरमास के दौरान विवाह और सगाई जैसे मांगलिक कार्य करना वर्जित माना जाता है। मान्यता है कि इस समय विवाह करने से शादीशुदा जीवन में समस्याएं आती है और परेशानियां उठानी पड़ती हैं। इस अवधि में मकान निर्माण या संपत्ति खरीदना भी अच्छा नहीं माना जाता है। इस दौरान बनाए गए घर में रहने वाले लोगों के जीवन में सुख समृद्धि की कमी आती है।
खरमास के दिनों में किसी भी नए कारोबार या प्रोजेक्ट की शुरुआत करने से बचना चाहिए। मान्यता है कि इस दौरान किए गए कार्यों में सफलता नहीं मिलती है और दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इस दौरान मुंडन संस्कार, कर्णवेध, यज्ञोपवीत, नामकरण जैसे कई संस्कार भी इस समय नहीं किए जाते। हालांकि रोजमर्रा की पूजा-पाठ जारी रखी जा सकती है। खरमास में नई चीजों जैसे वाहन या महंगी वस्तुओं की खरीदारी करना अशुभ माना जाता है। इसके अलावा इस दौरान मांसाहार, तामसिक भोजन और शराब का सेवन करने से भी बचना चाहिए।
खरमास में जरूर करें ये काम
खरमास का समय भले ही मांगलिक कार्यों के लिए उचित नहीं माना जाता है, लेकिन धार्मिक नजरिए से यह बेहद ही पवित्र समय होता है। खरमास के दिनों में नियमित रूप से सूर्यदेव की पूजा करनी चाहिए। उन्हें तांबे के पात्र से जल अर्पित करना चाहिए। इसके अलावा सूर्य मंत्रों का जाप जरूर करें। गरीबों और जरूरतमंदों को दान देना भी अच्छा होता है। खरमास में धार्मिक ग्रंथों का पाठ भी करें। इस दौरान व्रत और तप करना अच्छा होता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां पौराणिक कथाओं,धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। खबर में दी जानकारी पर विश्वास व्यक्ति की अपनी सूझ-बूझ और विवेक पर निर्भर करता है। प्राइम टीवी इंडिया इस पर दावा नहीं करता है ना ही किसी बात पर सत्यता का प्रमाण देता है।










