Kharge vs PM Modi: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक विकास दर से जुड़े बयान पर मंगलवार को तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार भले ही सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की वृद्धि का जश्न मना रही हो, लेकिन आम जनता बेरोजगारी, महंगाई और बढ़ती आर्थिक असमानता जैसी समस्याओं से परेशान है। खरगे ने कहा कि आर्थिक मोर्चे पर सरकार की उपलब्धियों के दावों और जमीनी स्थिति के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।
7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि पर प्रधानमंत्री ने जताई खुशी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया था। उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाने वालों पर तंज कसते हुए कहा था कि निराशावादी नाकाम हुए और भारत एक बार फिर खिल उठा। प्रधानमंत्री ने पहली तिमाही के आर्थिक प्रदर्शन को असाधारण उपलब्धि करार दिया।
खरगे ने बताए आम आदमी के सामने तीन बड़े संकट
प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए खरगे ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आम नागरिक तीन बड़े संकटों से जूझ रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने इन्हें ‘तीन यू’ यानी अभूतपूर्व बेरोजगारी, असहनीय मूल्य वृद्धि और बेलगाम असमानता के रूप में बताया। उनका कहना है कि केवल GDP के आंकड़ों से आम लोगों की आर्थिक स्थिति की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।
बेरोजगारी के आंकड़ों को लेकर सरकार पर निशाना
खरगे ने दावा किया कि देश में बेरोजगारी पांच दशक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में युवा शिक्षा पूरी करने के बाद भी रोजगार हासिल नहीं कर पा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष के अनुसार, करीब 40 प्रतिशत युवा स्नातक बेरोजगार हैं। उन्होंने जुलाई 2026 में 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के प्रत्येक छह में से एक युवा के बेरोजगार होने का भी दावा किया।
दो करोड़ रोजगार के वादे पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार के रोजगार संबंधी पुराने वादों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि हर वर्ष दो करोड़ रोजगार उपलब्ध कराने का दावा पूरा नहीं हुआ। खरगे ने कहा कि युवाओं के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा नहीं होने से आर्थिक विकास के लाभ का बड़ा हिस्सा आम लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
महंगाई और रोजमर्रा की वस्तुओं का मुद्दा उठाया
खरगे ने खुदरा महंगाई को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि खुदरा मुद्रास्फीति 19 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। कांग्रेस अध्यक्ष ने चीनी, प्याज, टमाटर, दाल, खाद्य तेल, चावल और दूध जैसी रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनकी बढ़ती लागत का सीधा असर परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ रहा है।
पेट्रोल डीजल और गैस की कीमतों पर भी हमला
कांग्रेस अध्यक्ष ने पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और सीएनजी की कीमतों का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि ईंधन और घरेलू जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से आम परिवारों के खर्च पर दबाव बढ़ता है। खरगे ने सरकार से आर्थिक विकास के साथ आम लोगों की क्रय शक्ति और जीवन-यापन की लागत पर भी ध्यान देने की मांग की।
आर्थिक असमानता को लेकर केंद्र पर गंभीर आरोप
खरगे ने देश में बढ़ती आर्थिक असमानता का मुद्दा उठाते हुए दावा किया कि शीर्ष एक प्रतिशत लोगों के पास देश की कुल संपत्ति का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि निचले 50 प्रतिशत लोगों के पास केवल 15 प्रतिशत संपत्ति है। उन्होंने केंद्र सरकार पर ऐसी आर्थिक नीतियां अपनाने का आरोप लगाया, जिनसे बड़े कारोबारी समूहों को फायदा पहुंच रहा है।
कॉरपोरेट कर्ज माफी का भी किया जिक्र
कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया कि वर्ष 2014 के बाद से 16 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कॉरपोरेट कर्ज माफ किए गए हैं। उन्होंने सरकार की आर्थिक नीति को ‘बेलगाम मित्रवादी पूंजीवाद’ बताते हुए आरोप लगाया कि आम जनता की आर्थिक परेशानियों के बीच बड़े कारोबारी हितों को प्राथमिकता दी जा रही है।
कारोबारी मामले का हवाला देकर सरकार को घेरा
खरगे ने एक मीडिया कारोबारी से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए दावा किया कि 22,006 करोड़ रुपये के स्वीकार किए गए दावों के मुकाबले ऋणदाताओं को केवल 6.5 करोड़ रुपये की वसूली हुई। इसी उदाहरण के आधार पर उन्होंने केंद्र की आर्थिक व्यवस्था और कारोबारी हितों से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाए।
मोदी पर कारोबारी मित्र के हितों के आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक कारोबारी मित्र के हितों के लिए काम करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने प्रधानमंत्री की भारतीय नागरिकों से सोना खरीदने और विदेश यात्रा से बचने की अपील का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी सलाह देश की मौजूदा आर्थिक वास्तविकताओं से मेल नहीं खाती। खरगे ने दावा किया कि सरकार के आर्थिक दावों और जनता की परेशानियों के बीच अंतर लगातार बना हुआ है। हालांकि, खरगे द्वारा लगाए गए आरोपों पर इस बयान के आधार पर केंद्र सरकार या भाजपा की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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