Parliament Session: कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने परिसीमन के प्रस्तावों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक बार फिर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। खरगे ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि परिसीमन जैसे बड़े संवैधानिक मुद्दे पर संसद में कोई विधेयक लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ बातचीत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को किसी भी प्रस्ताव पर अंतिम फैसला लेने से पहले विपक्ष समेत सभी दलों को अपनी बात रखने का पूरा मौका देना चाहिए। इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री को पत्र लिखने का यह उनका चौथा मौका है।
परिसीमन पर सर्वदलीय बैठक की मांग

बताते चले कि, मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने पत्र में कहा कि परिसीमन से जुड़े नए प्रस्तावों को अंतिम रूप देने और संसद में पेश करने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ विस्तार से चर्चा की जानी चाहिए। उनका कहना है कि यह ऐसा विषय है, जिसका असर देश की राजनीति और संवैधानिक व्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए इस पर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय सभी पक्षों की राय सुनना जरूरी है।
खरगे ने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों को आपस में विचार-विमर्श करने और दूसरे संबंधित पक्षों से बातचीत करने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री को आगाह किया कि किसी बड़े संवैधानिक संशोधन विधेयक को बिना पर्याप्त चर्चा के संसद से पारित कराने की कोशिश दोबारा नहीं होनी चाहिए।
परिसीमन विधेयक पर पहले भी नहीं बनी थी सहमति
आपको बता दे कि, कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने पत्र में पहले हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पहले भी संवैधानिक संशोधन विधेयक को संसद में पारित कराने की कोशिश की गई थी, लेकिन उसे जरूरी समर्थन नहीं मिल पाया। खरगे के मुताबिक, सरकार को पिछली घटनाओं से सबक लेते हुए इस बार सभी दलों के साथ पहले ही बातचीत करनी चाहिए।
उनका जोर इस बात पर है कि परिसीमन के प्रस्तावों पर सहमति बनाने के लिए राजनीतिक दलों को पर्याप्त समय दिया जाए। इससे पहले ही मतभेदों को दूर करने और संसद में किसी भी विधेयक पर गंभीर चर्चा का रास्ता साफ हो सकता है।
संसद के मॉनसून सत्र को लेकर भी खरगे ने उठाए सवाल
खरगे ने संसद के मॉनसून सत्र और उसके सत्रावसान में हो रही देरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पत्र में कहा कि 13 अगस्त 2026 को मॉनसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के 64 दिन बाद भी लोकसभा और राज्यसभा का सत्रावसान नहीं हुआ था।

उन्होंने इस स्थिति को अभूतपूर्व बताया। संसद का सत्रावसान करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, लेकिन विपक्षी दलों ने इसमें देरी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष को आशंका है कि सरकार परिसीमन विधेयक को दोबारा संसद में पेश करने के लिए विशेष सत्र बुला सकती है। हालांकि, विधेयक को दोबारा पेश किए जाने की कोई पुष्टि नहीं हुई थी।
अप्रैल में भी खरगे ने लिखा था पत्र, फिर क्या हुआ था?
मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया कि उन्होंने पहली बार 11 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से परिसीमन पर संवैधानिक संशोधन लाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया था। इसके बाद उन्होंने 16 जुलाई और 27 अगस्त को भी पत्र लिखकर यही मांग दोहराई, लेकिन उनके मुताबिक बैठक नहीं बुलाई गई।
खरगे के पत्र के अनुसार, 14 अप्रैल 2026 की देर शाम संबंधित विधेयकों को सार्वजनिक किया गया और 16 अप्रैल को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। इसके बाद 17 अप्रैल को परिसीमन से संबंधित विधेयक संसद में जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और पारित नहीं हो पाया। खरगे ने इस घटनाक्रम का हवाला देते हुए पहले चर्चा की जरूरत पर जोर दिया।
परिसीमन विधेयक दोबारा लाने की अटकलों से बढ़ी सियासी हलचल
विधेयक के पारित नहीं होने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा होती रही है कि सरकार पर्याप्त संख्या बल जुटाने के बाद इसे फिर से संसद में पेश कर सकती है। हालांकि, अब तक इसके दोबारा पेश किए जाने की पुष्टि नहीं हुई थी।
खरगे ने अपने ताजा पत्र के जरिए एक बार फिर साफ कर दिया है कि परिसीमन पर आगे बढ़ने से पहले सभी राजनीतिक दलों के साथ बातचीत होनी चाहिए। अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार क्या रुख अपनाती है और क्या सर्वदलीय बैठक बुलाई जाती है, इस पर राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।










