Kizhakkambalam Dalit Issue : केरल के किझक्कंबलम में दलित परिवारों की बेदखली पर विवाद, पुलिस-प्रदर्शनकारी आमने-सामने

केरल के एर्नाकुलम जिले के किझक्कंबलम में दलित परिवारों को जमीन से बेदखल करने के प्रशासनिक फैसले पर भारी विवाद खड़ा हो गया है। इस कार्रवाई का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों और भारी पुलिस बल के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है।

Kizhakkambalam Dalit Issue

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 22, 2026

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Kizhakkambalam Dalit Issue : केरल के एर्नाकुलम जिले के अंतर्गत आने वाले किझक्कंबलम के परीयाथुकावु इलाके में रह रहे दलित परिवारों को उनके आशियाने से हटाने का मामला एक बार फिर गरमा गया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर पेरुंबवूर की मुंसिफ कोर्ट ने पुलिस और प्रशासन को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने पुलिस को आदेश दिया है कि विवादित क्षेत्र में जीवन-यापन कर रहे 7 से 8 दलित परिवारों को हर हाल में 23 मई तक वहां से बेदखल किया जाए।

यह न्यायिक आदेश एडवोकेट कमिश्नर द्वारा अदालत में सौंपी गई ताजा स्थिति रिपोर्ट के आधार पर जारी किया गया है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि बुधवार को प्रशासन द्वारा इन परिवारों को हटाने का प्रयास किया गया था, लेकिन स्थानीय निवासियों के भारी हंगामे और कड़े विरोध के चलते यह अभियान सफल नहीं हो सका।

ढाई एकड़ जमीन पर मालिकाना हक का विवाद और पुलिस की कार्रवाई

बीते बुधवार को इस विवादित भूमि को खाली कराने के लिए पुलिस की एक भारी-भरकम टीम दंगा नियंत्रण और सुरक्षा उपकरणों के साथ मौके पर पहुंची थी। पुलिस प्रशासन एडवोकेट कमिशन के सहयोग से करीब ढाई एकड़ की इस कीमती जमीन को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराने के उद्देश्य से गया था। देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के एक पुराने फैसले के मुताबिक, इस पूरी जमीन का कानूनी और वास्तविक मालिकाना हक एक अन्य निजी व्यक्ति के पास है।

जैसे ही राजस्व अधिकारियों और पुलिस बल ने कार्रवाई के लिए इलाके में प्रवेश करने की कोशिश की, वहां रहने वाले सैकड़ों स्थानीय लोग उनके रास्ते में आकर खड़े हो गए। देखते ही देखते मौके पर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को पानी की बौछारें (वाटर कैनन) चलानी पड़ीं। स्थिति पर काबू पाने के लिए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया।

अवरोध पैदा करने पर 50 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज, सीपीएम हुई सक्रिय

भूमि खाली कराने की प्रक्रिया में बाधा डालने और कानून व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। थडियिट्टापरम्बु पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने इस हिंसक विरोध प्रदर्शन में शामिल 50 लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस के अनुसार, इन सभी लोगों पर सरकारी अधिकारियों को उनकी आधिकारिक ड्यूटी करने से जबरन रोकने और शांति भंग करने का आरोप है।

इन आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। इस बीच, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) भी पूरी तरह सक्रिय हो गई है। पार्टी ने पीड़ित परिवारों की ढाल बनने के लिए इलाके में एक विशेष ‘सुरक्षा समिति’ का गठन किया है, ताकि भविष्य में होने वाली किसी भी संभावित पुलिस कार्रवाई से इन परिवारों का बचाव किया जा सके।

‘जनता का आंदोलन ही अब एकमात्र सहारा‘: वामपंथी नेताओं का बयान

सीपीएम के वरिष्ठ नेता पी. राजीव ने विवादित क्षेत्र का दौरा कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और प्रशासन की इस कार्रवाई की तीखी आलोचना की। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि पिछली एलडीएफ (LDF) सरकार ने इस क्षेत्र में सर्वे की पूरी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद वहां रह रहे भूमिहीन लोगों को नियमों के तहत जमीन का पट्टा और कानूनी अधिकार देने की एक ठोस योजना तैयार की थी।

उन्होंने खेद जताते हुए कहा, “दुर्भाग्य से राज्य में सरकार बदलने से पहले सर्वे का यह काम पूरा नहीं हो पाया। अब जिस अमानवीय तरीके से इन गरीब परिवारों के खिलाफ बल प्रयोग किया जा रहा है, वह पूरी तरह निंदनीय है। इसी वजह से हमें यहां सुरक्षा समिति बनाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। पहले बिना किसी समिति के भी लोग सुरक्षित थे, लेकिन अब मौजूदा हालात बदल चुके हैं और केवल जनता का मजबूत आंदोलन ही इन गरीबों को सुरक्षा प्रदान कर सकता है।”

गृह मंत्री ने दिए पुलिसिया कार्रवाई की उच्च स्तरीय जांच के निर्देश

सीपीएम नेता पी. राजीव ने मौजूदा राज्य सरकार से पुरजोर मांग की है कि इस जमीन के सर्वे की अटकी हुई प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए और जब तक कोई अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक बेदखली की किसी भी कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाई जाए। दूसरी तरफ, केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने भी इस पूरे घटनाक्रम और बढ़ते विवाद को बेहद गंभीरता से लिया है। उन्होंने राज्य के पुलिस प्रमुख (डीजीपी) रवाडा चंद्रशेखर को इस मामले में हस्तक्षेप करने के निर्देश दिए हैं।

गृह मंत्री ने आदेश दिया है कि किझक्कंबलम में दलित परिवारों के खिलाफ हुई पुलिसिया कार्रवाई की विस्तृत और निष्पक्ष जांच की जाए और 3 दिनों के भीतर इसकी पूरी रिपोर्ट उन्हें सौंपी जाए। उन्होंने कहा कि जांच में यह मुख्य रूप से देखा जाए कि क्या पुलिस की तरफ से कोई मानवीय चूक या ज्यादती हुई है, साथ ही भविष्य में ऐसी कानून-व्यवस्था की स्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक सुझाव भी मांगे गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट से शुरू हुई थी इस विवाद की लंबी कानूनी लड़ाई

वास्तव में, इस जमीन से जुड़ा यह कानूनी और सामाजिक विवाद कई दशक पुराना है। जिस ढाई एकड़ जमीन पर ये दलित परिवार पीढ़ियों से अपने कच्चे-पक्के मकान बनाकर रह रहे हैं, उस पर एक अन्य स्थानीय व्यक्ति ने अपना पुश्तैनी और कानूनी मालिकाना हक होने का दावा ठोक दिया था। विभिन्न निचली अदालतों से होते हुए यह मामला आखिरकार देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) तक पहुंचा, जहां लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी उस व्यक्ति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उसके मालिकाना हक को सही करार दिया था।

इसके बाद केरल हाईकोर्ट ने प्रशासन को आदेश दिए कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को जमीन पर कड़ाई से लागू कराया जाए, जिसके अनुपालन में यह बेदखली अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि, बेदखल हो रहे प्रभावित परिवारों का अब भी यही तर्क है कि वे जिस जमीन पर बसे हैं, वह पूरी तरह से सरकारी (पोरमबोक) भूमि है न कि कोई निजी संपत्ति। लेकिन अदालतों ने उनके द्वारा दायर की गई सभी पुनर्विचार याचिकाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

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