Ken River Sand Mining: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा अवैध रेत खनन मामला, Panna Tiger Reserve और घड़ियालों पर खतरा

केन नदी में कथित अवैध रेत खनन का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है, जिससे पन्ना टाइगर रिजर्व और घड़ियालों के संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ी है। आखिर खनन से नदी के पारिस्थितिकी तंत्र पर कितना असर पड़ सकता है, याचिका में क्या आरोप हैं और सुप्रीम कोर्ट का रुख क्या होगा?

Ken River Sand Mining

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 27, 2026

Ken River Sand Mining:  मध्य प्रदेश की प्रमुख नदियों में शामिल केन नदी में कथित अवैध रेत खनन का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। पन्ना निवासी भारत मिलन पांडेय ने याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि केन नदी के अलग-अलग हिस्सों में वैध खनन अनुबंध के बिना बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है। याचिका के मुताबिक, इस गतिविधि में खुदाई मशीनों और रेत निकालने वाले पंपों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

चंबल घड़ियाल अभयारण्य मामले के साथ होगी सुनवाई

भारत मिलन पांडेय की याचिका पर 18 अगस्त को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत ने केन नदी में कथित अवैध रेत खनन से जुड़े मामले को राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य से संबंधित स्वतः संज्ञान मामले के साथ सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।

पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से अहम माना जा रहा फैसला

दोनों मामलों को साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने को पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केन और चंबल नदियां जलीय जीवों तथा नदी आधारित पारिस्थितिकी के लिए अहम हैं। ऐसे में अदालत के सामने यह सवाल महत्वपूर्ण हो सकता है कि संवेदनशील नदी क्षेत्रों में खनन गतिविधियों पर नियंत्रण और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा के लिए मौजूदा व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

पन्ना टाइगर रिजर्व पर भी असर की आशंका

याचिका में दावा किया गया है कि कथित अवैध रेत खनन से पन्ना टाइगर रिजर्व और केन घड़ियाल अभयारण्य के पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। नदी तल से बड़े पैमाने पर रेत निकालने से जल प्रवाह, नदी की प्राकृतिक संरचना और किनारों की स्थिरता प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। इससे नदी पर निर्भर वन्यजीवों और जलीय प्रजातियों के आवास को भी नुकसान पहुंच सकता है।

घड़ियालों के प्राकृतिक आवास को लेकर चिंता

नदी की रेत और प्राकृतिक तट कई जलीय जीवों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। विशेष रूप से घड़ियालों के जीवन और प्रजनन के लिए नदी की प्राकृतिक परिस्थितियां अहम मानी जाती हैं। ऐसे में अनियंत्रित रेत खनन से उनके प्राकृतिक आवास में बदलाव का खतरा हो सकता है। याचिका में इसी व्यापक पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई है।

बिना वैध अनुबंध खनन का लगाया गया आरोप

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि जिस क्षेत्र में रेत निकाली जा रही है, वहां सरकार की ओर से वैध खनन अनुबंध जारी नहीं किया गया है। इसके बावजूद मशीनों और पंपों के जरिए रेत निकालने की गतिविधियां कथित तौर पर जारी हैं। पांडेय के अनुसार, उन्होंने कथित गतिविधियों से जुड़ी तस्वीरें स्थानीय प्रशासन को भी उपलब्ध कराई थीं।

शिकायत के बाद परिवार पर मामले दर्ज होने का दावा

याचिका में भारत मिलन पांडेय ने आरोप लगाया है कि कथित अवैध खनन की शिकायत करने के बाद उनके और उनके परिवार के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए। उन्होंने दावा किया कि बाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिली। इस पूरे घटनाक्रम ने पर्यावरणीय शिकायतों के साथ-साथ शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा का मुद्दा भी सामने ला दिया है।

केन नदी यमुना की प्रमुख सहायक नदी

केन नदी यमुना की प्रमुख सहायक नदियों में शामिल है और मध्य प्रदेश के प्राकृतिक एवं पर्यावरणीय परिदृश्य में इसका विशेष महत्व है। इसके आसपास के क्षेत्रों में नदी, वन्यजीव और स्थानीय पारिस्थितिकी एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इसलिए यहां होने वाली खनन गतिविधियों का असर जल संसाधनों और जैव विविधता पर पड़ने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

नदी तंत्र पर मानवीय दबाव बना बड़ी चुनौती

देश के कई हिस्सों में रेत की मांग लगातार बनी हुई है। निर्माण गतिविधियों के लिए रेत जरूरी संसाधन है, लेकिन संवेदनशील नदी क्षेत्रों में इसका अनियंत्रित दोहन पर्यावरणीय समस्या पैदा कर सकता है। नदी तल में बदलाव, जल प्रवाह में परिवर्तन और तटों के क्षरण जैसे प्रभाव लंबे समय में नदी के प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।

अगली सुनवाई पर टिकी सभी की नजर

अब केन नदी में कथित अवैध रेत खनन मामले की आगे की सुनवाई पर नजर रहेगी। अदालत के सामने याचिका में लगाए गए आरोपों, प्रशासन की कार्रवाई और पर्यावरण पर संभावित प्रभावों से जुड़े तथ्य सामने आएंगे। मामले की सुनवाई चंबल घड़ियाल अभयारण्य से जुड़े प्रकरण के साथ होने के कारण नदी संरक्षण और वन्यजीव सुरक्षा का मुद्दा भी व्यापक संदर्भ में देखा जा सकता है।

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