
Karwa Chauth 2026 : करवा चौथ का व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष करवा चौथ का पर्व 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जा रहा है। व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए पूजा का शुभ समय जानना बेहद जरूरी है, ताकि वे विधि-विधान से पूजा संपन्न कर सकें।
शाम 5:38 बजे से शुरू होगा पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, नई दिल्ली में करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 38 मिनट से शुरू होकर 6 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। इस दौरान महिलाएं भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करती हैं। कई स्थानों पर करवा चौथ की कथा सुनने और करवा माता की पूजा करने की परंपरा भी निभाई जाती है। हालांकि, अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होने के कारण पूजा के मुहूर्त में भी बदलाव हो सकता है।

लखनऊ, नोएडा और कानपुर में पूजा का समय
उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में करवा चौथ की पूजा के समय की बात करें तो नोएडा में शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 38 मिनट से 6 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। कानपुर में पूजा का समय शाम 5 बजकर 29 मिनट से 6 बजकर 45 मिनट तक निर्धारित है। वहीं, लखनऊ में महिलाएं शाम 5 बजकर 26 मिनट से 6 बजकर 43 मिनट के बीच पूजा कर सकती हैं। वाराणसी में पूजा का शुभ समय शाम 5 बजकर 19 मिनट से 6 बजकर 36 मिनट तक और गोरखपुर में शाम 5 बजकर 16 मिनट से 6 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। अयोध्या में पूजा का समय शाम 5 बजकर 21 मिनट से 6 बजकर 38 मिनट तक बताया गया है।

मुंबई, जयपुर और अन्य शहरों में जानें शुभ मुहूर्त
देश के अन्य शहरों में भी करवा चौथ की पूजा के समय में अंतर देखने को मिलेगा। मुंबई में पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 7 मिनट से 7 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। पुणे में यह समय शाम 6 बजकर 3 मिनट से 7 बजकर 18 मिनट तक है। जयपुर में शाम 5 बजकर 46 मिनट से 7 बजकर 3 मिनट तक पूजा की जा सकती है। पटना में शुभ समय शाम 5 बजकर 10 मिनट से 6 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। कोलकाता में पूजा का मुहूर्त शाम 5 बजकर 1 मिनट से 6 बजकर 17 मिनट तक निर्धारित है।

सरगी से चंद्रमा को अर्घ्य देने तक निभाएं परंपरा
करवा चौथ के दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करके व्रत की शुरुआत करती हैं। इसके बाद पूरे दिन निर्जला व्रत रखा जाता है। शाम को पूजा और कथा के बाद महिलाएं चंद्रमा निकलने का इंतजार करती हैं। चंद्र दर्शन के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है और पारंपरिक रीति से व्रत खोला जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की विधियों और परंपराओं में थोड़ा अंतर हो सकता है। महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा और चंद्रोदय का समय अवश्य जांच लें।
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