Karnataka Sugar Prices: त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले कर्नाटक में चीनी और गुड़ की कीमतों में तेजी ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में बढ़ती मांग, मौसम की मार, गन्ने की फसल में बीमारी और चीनी के निर्यात को कीमतों में बढ़ोतरी की प्रमुख वजह माना जा रहा है। वहीं, कई उपभोक्ता आगे दाम और बढ़ने की आशंका में जरूरत से ज्यादा चीनी खरीदकर घर में रख रहे हैं।
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चीनी के दाम में करीब 20 रुपये प्रति किलो का उछाल
बेंगलुरु के साउथ एंड सर्कल इलाके में चीनी कारोबारियों के मुताबिक, बाजार में आने वाली चीनी की सप्लाई फिलहाल यशवंतपुर से हो रही है। यहां चीनी की कीमत करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। करीब दो दशक से कारोबार कर रहे व्यापारी रमेश चंद्र लाहोटी के अनुसार, उपभोक्ताओं को चीनी के दाम में लगभग 20 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी का सामना करना पड़ रहा है।
इसके बावजूद चीनी रोजमर्रा की जरूरत की वस्तु होने के कारण इसकी मांग पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है। सीमित विकल्प होने की वजह से लोग बढ़ी कीमतों के बावजूद इसकी खरीद जारी रख रहे हैं।
गुड़ की कीमतों में भी जोरदार तेजी
चीनी के साथ-साथ कर्नाटक की प्रमुख मंडियों में गुड़ के भाव भी तेजी से बढ़े हैं। मांड्या एपीएमसी में मंगलवार को गुड़ की आवक 1,805 इकाई रही। यहां गुड़ की अलग-अलग किस्मों के दाम 4,600 से 5,780 रुपये प्रति क्विंटल के बीच दर्ज किए गए।
अच्चू यानी क्यूब गुड़ की सबसे ज्यादा आवक रही। इसका मॉडल भाव बढ़कर 5,260 रुपये प्रति क्विंटल हो गया, जबकि अगस्त की शुरुआत में यही भाव करीब 4,450 रुपये प्रति क्विंटल था। बॉक्स गुड़ का मॉडल भाव 5,650 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। वहीं बाल्टी गुड़ का भाव 5,250 रुपये प्रति क्विंटल रहा। कुरिकलाच्चू गुड़ का मॉडल भाव 4,900 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।
चार दिन में 2,700 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा भाव
बागलकोट की महालिंगपुर एपीएमसी में गुड़ की कीमतों में बेहद तेज उछाल देखने को मिला। व्यापारियों के मुताबिक, महज चार दिनों में गुड़ का भाव 2,700 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ गया। पहले जहां गुड़ करीब 4,500 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था, वहीं रविवार को इसकी कीमत बढ़कर 7,200 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई।
गन्ने की फसल पर मौसम और बीमारी की मार
कीमतों में बढ़ोतरी के बीच कर्नाटक में गन्ने के उत्पादन को लेकर भी चिंता गहराने लगी है। कर्नाटक राज्य गन्ना उत्पादक संघ के मुताबिक, गन्ने की फसल बीमारी से प्रभावित हुई है। इसके अलावा कई इलाकों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है। संघ के अध्यक्ष कुरुबुरु शांतकुमार के अनुसार, इस साल राज्य में गन्ने का उत्पादन करीब 30 फीसदी तक घट सकता है। साल 2025 में कर्नाटक में गन्ने का उत्पादन लगभग 5.8 करोड़ टन था, जो इस साल घटकर करीब 5 करोड़ टन रह सकता है।
त्योहारों में बढ़ती मांग भी बड़ी वजह
व्यापारियों का कहना है कि अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के दौरान आमतौर पर चीनी की खपत बढ़ जाती है। त्योहारों में मिठाइयों और अन्य पकवानों की मांग बढ़ने के कारण बाजार में चीनी की जरूरत भी बढ़ती है। इसी वजह से कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
हालांकि, गन्ना उत्पादक संघ ने चीनी उत्पादन में संभावित कमी के लिए एथेनॉल मिश्रण को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। संघ ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ थोक व्यापारी बिना अनुमति के चीनी का स्टॉक कर रहे हैं। इससे बाजार में कृत्रिम कमी की स्थिति बनने और कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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