UP News: मायावती ने कांशीराम को दी श्रद्धांजलि, आकाश आनंद की भूमिका पर भी चर्चा

UP News: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पार्टी संस्थापक कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कांशीराम के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सदियों से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से पिछड़े तथा शोषित बहुजन समाज को वोट की ताकत का एहसास कराया। कांशीराम का उद्देश्य बहुजन समाज को केवल राजनीतिक भागीदारी तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उसे सत्ता की मास्टर चाबी सौंपकर शासक वर्ग के रूप में स्थापित करना था। कांशीराम का मिशन और डॉ. आंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाने का

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 9, 2026

UP News: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पार्टी संस्थापक कांशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कांशीराम के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सदियों से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से पिछड़े तथा शोषित बहुजन समाज को वोट की ताकत का एहसास कराया। कांशीराम का उद्देश्य बहुजन समाज को केवल राजनीतिक भागीदारी तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उसे सत्ता की मास्टर चाबी सौंपकर शासक वर्ग के रूप में स्थापित करना था।

कांशीराम का मिशन और डॉ. आंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प

कांशीराम का मिशन और डॉ. आंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प

मायावती ने अपने संदेश में कहा कि कांशीराम ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के आत्मसम्मान, स्वाभिमान और सामाजिक समानता के आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने बहुजन समाज को संगठित कर उसे राजनीतिक रूप से मजबूत बनाने का काम किया। मायावती के मुताबिक, कांशीराम के इसी संघर्ष और मिशनरी संकल्प का परिणाम रहा कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में बसपा को चार बार सरकार बनाने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि कांशीराम का जीवन सामाजिक परिवर्तन और राजनीतिक जागरूकता की दिशा में समर्पण का उदाहरण है।

बसपा सरकार में सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति पर जोर

बसपा प्रमुख ने पार्टी की पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए। उन्होंने महात्मा ज्योतिबा फुले, श्री नारायण गुरु, छत्रपति शाहूजी महाराज और डॉ. बी.आर. आंबेडकर जैसे महापुरुषों के विचारों को सामाजिक समानता की बुनियाद बताया। मायावती के अनुसार, बसपा सरकारों ने इन महापुरुषों के समतावादी विचारों को जमीन पर उतारने और संविधान की मूल भावना के अनुरूप समाज में समान अवसर तथा सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया।

यूपी में कानून-व्यवस्था और जनकल्याणकारी शासन का दावा

यूपी में कानून-व्यवस्था और जनकल्याणकारी शासन का दावा

मायावती ने उत्तर प्रदेश में बसपा शासन के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर किए गए प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकारों ने अपराध नियंत्रण और कानून का राज स्थापित करने पर जोर दिया था। उनके मुताबिक, जनहित, विकास और पारदर्शी प्रशासन के माध्यम से जनता को जनकल्याणकारी सरकार देना ही कांशीराम के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर बसपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भी कांशीराम के अधूरे मिशन को आगे बढ़ाने तथा बहुजन समाज को राजनीतिक रूप से मजबूत करने का संकल्प दोहराया।

लखनऊ में कांशीराम परिनिर्वाण दिवस कार्यक्रम

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि, कांशीराम के 20वें परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर लखनऊ में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मायावती मॉल एवेन्यू स्थित केंद्रीय कैंप कार्यालय में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगी। राजधानी के कांशीराम स्थल पर होने वाले मुख्य कार्यक्रम में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल को मुख्य अतिथि बनाया गया है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के लखनऊ पहुंचने की जानकारी सामने आई है। शहर में जगह-जगह नीले रंग के पोस्टर और बैनर लगाए गए हैं। बसपा नेताओं को उम्मीद है कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल होंगे।

आकाश आनंद और ईशान आनंद की भूमिका पर भी नजर

आकाश आनंद और ईशान आनंद की भूमिका पर भी नजर

परिनिर्वाण दिवस के कार्यक्रमों के बीच बसपा के प्रमुख नेताओं की भागीदारी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक ईशान आनंद के दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने की जानकारी दी गई है। वहीं, हाल ही में पार्टी में वापसी के बाद दोबारा राष्ट्रीय संयोजक बनाए गए आकाश आनंद के कार्यक्रम को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। समर्थकों के बीच यह चर्चा भी रही कि उन्हें लखनऊ के कार्यक्रम में संबोधन की जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष की तरह मायावती इस बार भी मुख्य कार्यक्रम को संबोधित नहीं करेंगी। ऐसे में सभी की नजरें कार्यक्रम की गतिविधियों और पार्टी नेतृत्व के संदेश पर टिकी रहेंगी।