UP Politics: कन्नौज में खाली कुर्सियों से सपा में भूचाल, अखिलेश पर राजभर का तंज

कन्नौज में समाजवादी पार्टी के PDA सम्मेलन में कम भीड़ जुटने के बाद पार्टी ने जिलाध्यक्ष कलीम खान समेत जिला कार्यकारिणी और फ्रंटल संगठनों को भंग कर दिया। इस कार्रवाई पर कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा और कहा, '27 में सपा साफ'। जानिए खाली कुर्सियों से शुरू हुआ यह विवाद यूपी की राजनीति में क्यों चर्चा में है।

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Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अक्टूबर 19, 2026

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UP Politics: उत्तर प्रदेश के कन्नौज में समाजवादी पार्टी के पीडीए सम्मेलन में कम भीड़ जुटने का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ने लगा है। शनिवार को आयोजित सम्मेलन में बड़ी संख्या में कुर्सियां खाली नजर आईं। इसके बाद सोशल मीडिया पर सम्मेलन के वीडियो और तस्वीरें वायरल होने लगी। इन तस्वीरों को लेकर सपा के संगठन और कार्यकर्ताओं की सक्रियता पर सवाल उठाए गए।

मामले ने रविवार को उस समय नया मोड़ ले लिया, जब समाजवादी पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने कन्नौज के जिलाध्यक्ष कलीम खान को हटाने के साथ पूरी जिला कार्यकारिणी और फ्रंटल संगठनों को भंग कर दिया। इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक विरोधियों को सपा पर निशाना साधने का मौका मिल गया।

ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर कसा तंज

आपकूी जानकारी के लिए बता दे कि, कन्नौज में सपा की संगठनात्मक कार्रवाई को लेकर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर खाली कुर्सियों के मुद्दे पर सपा अध्यक्ष को घेरा। राजभर ने तंज कसते हुए लिखा कि अखिलेश यादव ने कन्नौज की जिला इकाई को भंग कर दिया, लेकिन सवाल यह है कि इसमें जिला संगठन के लोगों की गलती क्या थी? उन्होंने आरोप लगाया कि जब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष खुद एसी, पीसी और ट्विटर की दुनिया से बाहर नहीं निकलेंगे, तो जिला स्तर के कार्यकर्ता क्या करेंगे?

ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर कसा तंज

राजभर ने कन्नौज को समाजवादी पार्टी का पारंपरिक गढ़ बताते हुए कहा कि जिस क्षेत्र को अखिलेश यादव अपनी खानदानी विरासत मानते थे, वहां सम्मेलन में खाली कुर्सियां नजर आना पार्टी की राजनीतिक स्थिति पर सवाल खड़े करता है।

राजभर की अखिलेश को दी सलाह

कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अपने पोस्ट में अखिलेश यादव को सलाह देते हुए कहा कि अगर संगठन की स्थिति ऐसी ही है, तो चुनाव से पहले पूरे प्रदेश की कार्यकारिणी भी भंग कर देनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कन्नौज के सम्मेलन में कम भीड़ जुटने से समाजवादी पार्टी के संगठन की स्थिति सामने आ गई है।

राजभर ने सपा की पिछली पीढ़ी के नेताओं का जिक्र करते हुए भी अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि साइकिल चलाने वाले असली नेता अब पार्टी में नहीं रहे और अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम सिंह यादव और चाचा शिवपाल सिंह यादव की राजनीतिक विरासत को ठीक से संभाल नहीं पाए।

अपने पोस्ट के आखिर में राजभर ने एक बार फिर अपना पुराना राजनीतिक दावा दोहराया और लिखा, ‘ऐसे ही मैंने नहीं कहा था कि सत्ताइस में सपा साफ है।’ उनका यह बयान आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और सपा के बीच जारी राजनीतिक खींचतान को और तेज कर सकता है।

खाली कुर्सियों के बाद सपा ने क्यों भंग की कन्नौज जिला कार्यकारिणी?

दरअसल, शनिवार को कन्नौज स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में पीडीए सम्मेलन आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल भी मौजूद थे, लेकिन अपेक्षा के मुताबिक कार्यकर्ताओं की भीड़ नहीं जुट सकी। सम्मेलन की खाली कुर्सियों के वीडियो सामने आने के बाद पार्टी संगठन की तैयारियों पर चर्चा शुरू हो गई।

खाली कुर्सियों के बाद सपा ने क्यों भंग की कन्नौज जिला कार्यकारिणी?

सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश नेतृत्व ने सम्मेलन में कम भीड़ जुटने के लिए जिला संगठन और विभिन्न फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारियों को जिम्मेदार माना। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को दी। इसके बाद मिले निर्देशों के आधार पर रविवार को संगठनात्मक कार्रवाई की गई। जारी पत्र के मुताबिक, जिलाध्यक्ष कलीम खान को पद से हटाने के साथ जिला कार्यकारिणी और फ्रंटल संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया।

यूपी की राजनीति में बढ़ी बयानबाजी

कन्नौज में पीडीए सम्मेलन के बाद हुई कार्रवाई और ओम प्रकाश राजभर के बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ सपा ने संगठन के स्तर पर कार्रवाई की है, वहीं दूसरी तरफ विरोधी दल इसे पार्टी की कमजोरी से जोड़कर देख रहे हैं।

अब यह देखना अहम होगा कि समाजवादी पार्टी कन्नौज में संगठन को मजबूत करने के लिए आगे क्या कदम उठाती है और इस पूरे मामले पर अखिलेश यादव की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है। फिलहाल, खाली कुर्सियों से शुरू हुआ विवाद अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा बन गया है।