JPSC Exam Scam: CID का बड़ा एक्शन, 18 ठिकानों पर रेड, OMR शीट और लैपटॉप जब्त

JPSC परीक्षा घोटाला मामले में CID ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 18 ठिकानों पर छापेमारी की है। जांच एजेंसी ने कई अहम दस्तावेज, OMR शीट और लैपटॉप जब्त किए हैं। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी कैसे हुई और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।

JPSC Exam Scam

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 4, 2026

JPSC Exam Scam: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने राज्यभर में व्यापक कार्रवाई की है। विशेष जांच दल (SIT) ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी अभियान चलाया। यह कार्रवाई रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद सहित पांच प्रमुख जिलों के कुल 18 ठिकानों पर की गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य कथित परीक्षा अनियमितताओं से जुड़े साक्ष्य जुटाना और पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच करना है।

छापेमारी में मिले कई अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य

सीआईडी की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, तलाशी अभियान के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं। जांच टीम ने आरोपियों के ठिकानों से लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस अपने कब्जे में लिए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन उपकरणों में जांच से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड और संचार संबंधी जानकारी मिल सकती है। बरामद सामग्री की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि कथित अनियमितताओं से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जा सके।

ओएमआर शीट और परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड भी जब्त

जांच के दौरान सीआईडी ने विभिन्न अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी, एडमिट कार्ड और मार्कशीट जैसे कई दस्तावेज भी जब्त किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन दस्तावेजों की जांच से परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है। इसके अलावा जांच एजेंसी ने कई बैंकों की चेकबुक और पासबुक भी अपने कब्जे में ली हैं, ताकि संभावित वित्तीय लेन-देन और धन के प्रवाह की जांच की जा सके। सीआईडी का कहना है कि आर्थिक पहलुओं की जांच भी इस मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अभय तिवारी से जुड़े तथ्यों की हो रही जांच

जांच के दौरान मुख्य आरोपियों में शामिल अभय तिवारी से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां भी सामने आई हैं। सीआईडी के अनुसार, प्रारंभिक जांच में पता चला है कि अभय तिवारी ने वर्ष 2018 में आयोजित पुलिस सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) भर्ती परीक्षा की लिखित परीक्षा सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सफलता हासिल की थी। इन दावों की सत्यता की पुष्टि के लिए जांच एजेंसियों ने संबंधित भर्ती संस्थाओं और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों से उनके आवेदन, चयन प्रक्रिया और अन्य मूल रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

भर्ती एजेंसियों से मांगे गए मूल दस्तावेज

सीआईडी और एसआईटी ने संबंधित विभागों से अभय तिवारी की उम्मीदवारी और चयन प्रक्रिया से जुड़े सभी आधिकारिक दस्तावेज तलब किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन रिकॉर्ड का मिलान बरामद दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों से किया जाएगा। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में किसी प्रकार का संगठित नेटवर्क सक्रिय था या नहीं। दस्तावेजों की विस्तृत जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जांच का दायरा बढ़ने के संकेत

सीआईडी अधिकारियों का कहना है कि छापेमारी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तृत जांच अभी जारी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे और लोगों से पूछताछ की जा सकती है। अधिकारियों के अनुसार, यदि जांच में अन्य व्यक्तियों या किसी संगठित नेटवर्क की संलिप्तता के संकेत मिलते हैं, तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच एजेंसी ने मामले में कोई अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किया है और कहा है कि सभी साक्ष्यों का वैज्ञानिक एवं कानूनी परीक्षण पूरा होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में इससे जुड़े नए तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

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