JPSC Exam 2026 : JPSC परीक्षा पर HC के फैसले से छात्र नाराज, बोले- झारखंड सरकार ने धोखा दिया

JPSC परीक्षा विवाद में झारखंड हाई कोर्ट के फैसले के बाद छात्रों की नाराजगी सामने आई है। कोर्ट ने सरकार के 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर रोक लगाई है। छात्र नेताओं ने सरकार पर धोखा देने का आरोप लगाया और कहा कि अब उनकी लड़ाई नए चरण में पहुंच गई है।

JPSC Exam 2026

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अगस्त 20, 2026

JPSC Exam 2026 : झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन एक बार फिर तेज होने के संकेत दे रहा है। झारखंड हाई कोर्ट के हालिया फैसले के बाद छात्र नेता रविंद्र पासवान ने रांची में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि छात्रों के हित में सरकार की ओर से किए गए वादों और अदालत में उसके रुख के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, पिछले 26 दिनों से छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे हैं और अब सरकार के खिलाफ आंदोलन को और व्यापक करने की तैयारी है।

हाई कोर्ट के फैसले पर छात्र नेता ने जताई नाराजगी

रविंद्र पासवान ने कहा कि झारखंड की गठबंधन सरकार ने छात्रों के साथ विश्वासघात किया है। उनका आरोप है कि सरकार की मंशा हाई कोर्ट में हुई कार्रवाई के दौरान साफ दिखाई दी। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर झारखंड की आम जनता पर भी पड़ता है।

26 दिनों से जारी है छात्रों का प्रदर्शन

छात्र नेता के मुताबिक, JPSC-JSSC Reforms मंच पिछले 26 दिनों से रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहा था। उन्होंने कहा कि छात्रों ने सरकार की बातों और आश्वासनों पर भरोसा किया था। अब उन्हें लगता है कि सरकार आंदोलन को खत्म कराने की कोशिश कर रही है, लेकिन छात्रों का संगठन पहले से ज्यादा मजबूत हो चुका है।

दो महीने की समयसीमा पर सरकार को चेतावनी

रविंद्र पासवान ने कहा कि सरकार को जो दो महीने का समय मिला है, उसे केवल आंदोलन शांत करने का माध्यम नहीं समझना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यदि जरूरत पड़ी तो छात्र संगठन दो महीने का इंतजार किए बिना दोबारा बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू कर सकता है। उनके मुताबिक, संगठन के आह्वान पर बड़ी संख्या में छात्रों को फिर रांची बुलाया जा सकता है।

सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग

छात्र नेता ने राज्य सरकार से अपनी मंशा स्पष्ट करने और अपने वादों पर ठोस प्रतिबद्धता दिखाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने छात्रों के मुद्दों पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही आंदोलन शुरू किया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मौजूदा कार्यशैली से छात्रों में असंतोष बढ़ रहा है।

24 जिलों में मुख्यमंत्री का पुतला दहन

रविंद्र पासवान ने आंदोलन के अगले चरण का ऐलान करते हुए कहा कि झारखंड के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया जाएगा। उन्होंने छात्रों और समर्थकों से सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराने का आह्वान किया। इस घोषणा के बाद आने वाले दिनों में राज्य में राजनीतिक और छात्र गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

सरकार पर वादे से पीछे हटने का आरोप

प्रेस कॉन्फ्रेंस में रविंद्र पासवान ने कहा कि छात्र संगठन न्यायपालिका के फैसले पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। हालांकि, उन्होंने सरकार के रवैये पर सवाल जरूर उठाए। उनका कहना था कि सरकार ने आंदोलनकारी छात्रों के साथ जो वादे किए थे, हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान उसका वैसा इरादा दिखाई नहीं दिया।

सरकारी वकील की भूमिका पर भी सवाल

रविंद्र पासवान ने आरोप लगाया कि हाई कोर्ट में सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने छात्रों के पक्ष में अपेक्षित तरीके से अपनी बात नहीं रखी। उन्होंने कहा कि छात्र मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के आश्वासनों पर भरोसा करके आंदोलन के दौरान आगे बढ़े थे। अब उन्हें लग रहा है कि उनके साथ भी राजनीतिक व्यवहार किया जा रहा है।

अब छात्र भी राजनीतिक जवाब देने को तैयार

छात्र नेता ने कहा कि छात्रों ने हमेशा अपने मुद्दों को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाने की कोशिश की है। लेकिन यदि सरकार छात्रों के मुद्दों को राजनीतिक तरीके से देखेगी, तो छात्रों को भी राजनीतिक रूप से जवाब देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि आंदोलन को कमजोर समझना सरकार की भूल होगी।

22 परीक्षाओं को रद्द करने पर शुरू हुआ विवाद

दरअसल, 18 अगस्त को झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने वर्ष 2014 से आयोजित 22 परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। इसके अलावा 23 अन्य परीक्षाओं की जांच कराने का आदेश दिया गया था। सरकार के इस फैसले के बाद भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया और पुराने मामलों को लेकर बहस तेज हो गई थी।

हाई कोर्ट के आदेश से सरकार के फैसले पर रोक

सरकार के फैसले के खिलाफ मामला झारखंड हाई कोर्ट पहुंचा। गुरुवार को अदालत ने सरकार के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसके बाद छात्र संगठनों की नाराजगी और बढ़ गई। अब पूरे मामले में अदालत की आगामी सुनवाई और सरकार की अगली कार्रवाई पर सबकी नजर है। वहीं छात्र नेताओं ने संकेत दिया है कि यदि उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आंदोलन दोबारा बड़े स्तर पर शुरू किया जा सकता है।

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